भजन संहिता 55:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

सांझ को, भोर को, दोपहर को, तीनों पहर मैं दुहाई दूँगा और कराहता रहूँगा और वह मेरा शब्द सुन लेगा।

भजन संहिता 55:17 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 55:17 (HINIRV) – एक प्रार्थना का समय-संवेग

पद का तुरंत संदर्भ दर्शाता है कि वक्ता सांझ, भोर, दोपहर और तीनों पहर में दुहाई देता है—यानी एक निरंतर, बारंबार प्रार्थना का क्रम। यह तीनों पहर की दिनचर्या में हो रही पीड़ा, चिंता और विरोध के बीच दृढ़ Asiसत्य है कि परमेश्वर सुनता है।भजनकार अपनी आवाज बनाए रखता है और दुख के बीच भी आत्म-समर्पण के साथ कहता है कि उसका शब्द सुन लिया जाएगा।

इस पाठ से परमेश्वर या विश्वास के बारे में जो संकेत मिलते हैं

- विश्वास की स्थिरता: दुखी समय में भी प्रार्थना का एक नियमबद्ध क्रम बना रहता है।

- परमेश्वर की सुनने की आस्था: संगीत-सा शब्द नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षण में प्रभु का कान खुला है—वह सुनता है।

- जाने-अनजाने की चिंता नहीं, बल्कि परमेश्वर की सत्ता में विश्राम: दिन-रात संवाद से मन का भय कम होता है और विश्वास पुष्ट होता है।

महत्वपूर्ण शब्दों व छायाओं की स्पष्टता

- सांझ, भोर, दोपहर, तीनों पहर: पूरी दिनचर्या का संकेत—आंखों से ओझल न होने वाला निरंतर संघर्श, जो किसी एक वक्त तक सीमित नहीं।

- दुहाई देना और कराहना: गहरा विवशता-भरा प्रार्थना-क्रंदन, जो आत्मा के हाल दिखाता है और परमेश्वर के प्रति निर्भरता बनाता है।

- “वह मेरा शब्द सुन लेगा”: परमेश्वर के दयालु कानों की पुष्टि—वाणी, आवाज और निवेदन की स्वीकार्यता।

संबद्ध संदर्भ (क्रॉस-रेफरेंसेज़) और संक्षिप्त स्पष्टीकरण

  • नीतिसूत्र 34:17-18: विपत्ति में प्रत्यक्ष प्रार्थना और परमेश्वर की नज़दीकी—जो दबाव में भी सहायता करता है।
  • भजन 34:18: विनम्र Conscience के समय परमेश्वर निकट है; टूटे दिल वालों को θεραπεία देता है।
  • यशायाह 58:9: सच प्रार्थना में ईश्वर सीधे मार्ग खोलता है, भीड़-भाड़ में भी सुनता है।

ये संदर्भ बताते हैं कि परमेश्वर के निकटता की अनुभूति प्रार्थना के निरंतर क्रम से ही उभरती है, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी विपरीत हों।

पूर्व-समकालीन टिप्पणी से समेकित निष्कर्ष

Matthew Henry के अनुसार यह पाठ आंतरिक शांति की मांग नहीं, बल्कि ईमानदार संघर्ष-प्रस्तुति है—प्रार्थना में निरंतरता से मनुष्य अपने डर, ग़लतफहमियों और विरोधों के बीच भी परमेश्वर के साथ संवाद बनाए रखता है। Albert Barnes कहते हैं कि “हर समय में” का मतलब है जीवन के हर क्षण—दुविधा, निर्णय और पीड़ा के बीच भी पवित्र संपर्क। Adam Clarke हर मोड़ पर प्रार्थना की शक्ति को दृढ़ मानते हैं; जब संसार के आतंक थाम नहीं पाते, तब भी ईश्वर का शब्द सच बनकर सामने आता है। एक तीसरे समानांतर टिप्पणीकार के रूप में यह भी दिखता है कि प्रार्थना का यह क्रम विश्वास की एक शिक्षा है: निर्भरता, धैर्य और ईश्वर की प्रतिश्रुति।

इन विचारों के साथ यह पाठ आज भी सदियों से चले आ रहे ईमानदार प्रार्थना के मॉडल को पुष्ट करता है—दिन-रात, हर उदाहरण में प्रभु ही हमारी सहायता बनते हैं; और उनके पास हमारी आवाज सुनने की संवेदना है।

आज के उपयोग योग्य नीतियाँ

  • अपने भय और बाधाओं के बीच नियमित प्रार्थना बनाए रखें—दिन के प्रत्येक भाग में एक छोटा-सा समय दें।
  • कठिन समय में भी परमेश्वर के वचनों पर स्थिर रहें; उसकी प्रतिश्रुति के बारे में आत्म-विश्वास बनाएं।
  • क्रॉस-रेफरेंसेज़ की विचार-परिक्रमा करें और देखें कि कैसे परमेश्वर पहले से ही उद्धारक के रूप में चुप नहीं रहता।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 55:17 समानांतर पद और संबंधित वचन

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निरन्तर प्रार्थना में लगे रहो।

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और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना*, और विनती करते रहो, और जागते रहो कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार विनती किया करो,

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मेरी प्रार्थना तेरे सामने सुगन्ध धूप*, और मेरा हाथ फैलाना, संध्याकाल का अन्नबलि ठहरे! (प्रका. 5:8, प्रका. 8:3,4, नीति. 3:25,1 पत. 3:6)

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