भजन संहिता 55:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जो लड़ाई मेरे विरुद्ध मची थी उससे उसने मुझे कुशल के साथ बचा लिया है। उन्होंने तो बहुतों को संग लेकर मेरा सामना किया था।

भजन संहिता 55:18 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 55:18 (HINIRV) — संदर्भ और संकल्पना

यह पद DAVID के गीत का एक भाग है जिसमें वे गहरे संकट के समय प्रभु पर भरोसा स्थापित करते हैं। भजन 55 में कलह, धोखा और भीतरी बेचैनी का वर्णन है, जब उनके विरोधी घातक योजनाएं बनाते हैं और कुछ मित्र भी साथ छोड़ देते हैं। आशा यह है कि परमेश्वर फिर भी उनकी रक्षा करेगा और उन्हें कुशल-पूर्वक बचा लेगा। इस Verse में स्पष्ट होता है कि God’s intervention समय पर आता है और उस समय की रक्षा से डर भी शांति में बदल सकता है.

मुख्य संदेश

पद बताता है कि परमेश्वर भरी दैनंदिन मुश्किलों में भी उनके साथ है और संकट के समय में बचाव प्रदान करता है। यह एक विश्वासयोग्य व्यक्ति की प्रार्थना और प्रभु के प्रति पूर्ण निर्भरता का अभिव्यक्त है।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • संकट की घड़ियों में ईश्वर का बचाव आ जाता है; यह उम्मीद बनाए रखकर मानसिक शांति देता है।
  • विरोधी अनेक होते हैं, पर परमेश्वर की कृपा से बचाव संभव है।
  • भय और अराजकता के बीच भी परमेश्वर के साथ विश्वास स्थिर रहता है।

पवित्र ग्रन्थ से सम्बन्धित धाराएँ

कई पारिश्रव्य वैसे ही संकट में भी ईश्वर की सहायता की विशिष्ट गवाही देते हैं—जैसे भजन 3, 34 और 46 में। यह दिखाता है कि भय के बीच भी परमेश्वर की सुरक्षा एक स्थायित्व बनकर रहती है।

उद्धृत उद्धरणों के रूप में पूर्व टिप्पणीकारों के कुछ छोटे विचारों को संक्षेप में मिलता है:

मैथ्यू हेन्री आदि के अनुसार, यह भय से भरे समय में ईश्वर के साथ निकट संबंध की महत्ता है; आर्मबेल क्लार्क कहते हैं कि संकट के समय में परमेश्वर की प्रतिपूर्ति में विश्वास अधिक दृढ़ होता है; एडम क्लार्क भी संकेत देते हैं कि विरुद्ध शक्तियाँ कितनी भी बड़ी क्यों न हों, परमेश्वर की सहायता से विजयी हो सकते हैं।

क्रियात्मक चिंतन

हम कैसे अपने दिनचर्या में इस विश्वास को लागू करें? जब भी मन भयग्रस्त हो, तो निम्न कदम अपनाएं:

  • हमेशा प्रभु को पहले बुलाएं और भय को उसकी देखरेख में रखें।
  • चिंता को लाइन बनाकर रखें—उसके भीतर विशिष्ट प्रार्थना और आशीर्वाद की पुष्टि करें।
  • विश्वास का स्मरण करें कि परमेश्वर मुश्किलों में साथ है और समर्थ है to provide सुरक्षा.

संक्षिप्त समापन

भजन का यह भाग याद दिलाता है कि संकट के बावजूद ईश्वर की सुरक्षा संपूर्ण भरोसे पर टिका है। विरोध चाहे व्यक्तियों के समूह जैसा हो या एक अलोकप्रिय स्थिति, प्रभु की सहायता उसे पार कर देती है। यह हमारे लिए भी एक प्रेरणा है कि हर कठिनाई के समय ईश्वर के उपस्थिति में आश्रय ढूंढ़ना चाहिए और उसकी कृपा से आगे बढ़ना चाहिए।

छोटे cross-references

1) भजन 3:5 — प्रभु के साथ उठनाबैठना शांति देता है; 2) भजन 34:7 — परमेश्वर के दूत संकट के समय रक्षा करते हैं; 3) नीतिवचन 3:5–6 — भरोसा प्रभु पर और उसकी राहों में निर्देश पाते हैं।

व्याख्या सार: इस verse में संकट के समय की ईश्वर-आह्वान, सुरक्षा और विश्वास का मिश्रण दृढ़ है। यह दिखाता है कि परमेश्वर की सहायता समयपूर्व न तय होती, बल्कि आवश्यक समय पर आती है, और भक्त के चरणों को स्थिर रखती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 55:18 समानांतर पद और संबंधित वचन

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