भजन संहिता 55:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परमेश्‍वर जो आदि से विराजमान है यह सुनकर उनको उत्तर देगा। (सेला) ये वे है जिनमें कोई परिवर्तन नहीं, और उनमें परमेश्‍वर का भय है ही नहीं।

भजन संहिता 55:19 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 55:19 – परमेश्वर की प्रतिज्ञा और परिवर्तनहीनता

इस पार्टी verse में मग्न शास्त्रीय संदर्भ है जहाँ तोरण-आह्वान वाले स्थल में लोग विनय-स्वरूप परमेश्वर से सहायता माँगते हैं। भजनकार बताता है कि परमेश्वर जो प्राचीन काल से जागृत है, वह उच्च स्थान पर विराजमान है और संकट के समय हमारे रुदन को भी सुन लेता है। इसके पीछे एक नयी आशा है: परमेश्वर उत्तर देगा, चाहे परिस्थिति कितनी भी गम्भीर क्यों न हो। साथ ही शास्त्रीय टिप्पणी संकेत देते हैं कि कुछ लोग ऐसे हैं जिनमें ईश्वर का भय नहीं है, वे अस्थिर और परिवर्तित रहते हैं; यह भजनकार के विरुद्ध आघात का एक प्रमुख कारण है।

मुख्य 의미

यह पद दोतरफा संदेश देता है: (1) ईश्वर चेतन है, वह विराम नहीं लेता; प्रलय से पहले से वह हमारे क्रंदन को सुनता है और समय पर उत्तर देता है। (2) यह चेतावनी दे रहा है कि जो व्यक्ति परमेश्वर के भय से विरं जुटे रहते हैं, उनमें स्थिरता नहीं होती, वे जीवन के दौड़ में परिवर्तनशील बन जाते हैं। भजनकार यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि ईश्वर का षण्ख (उत्तर) न मिलने पर भी विश्वासयोग्यता बनाए रखना चाहिए, क्योंकि परमेश्वर एक ऐसी सत्ता है जो सत्य और न्याय के मार्ग से कभी पीछे नहीं हटती।

कुंजी विषय

  • परमेश्वर की श्रेष्ठता और मौन नहीं रहने का वादा: संकट के समय भी ध्यान और सुनवाई बनाये रखना।
  • परिवर्तनहीनता बनाम मानव परिवर्तनशीलता: जहाँ परमेश्वर पर निर्भरता स्थिर है, वहीं इंसान सहजता से डगमगा सकता है।
  • ईश्वर का भय: जैसा कि अन्य स्थूल पाठों में कहा गया है, परमेश्वर का भय ऐसे व्यक्ति से जुड़ा है जो सत्य और नैतिकता के अनुसार चलता है और विपत्ति के समय भी दया-न्याय की राह नहीं छोड़ता।

पूर्व-व्याख्या से सम्बद्ध मार्ग

— मैथ्यू हेनरी के अनुसार, इस psalmist का आशय यह है कि ईश्वर क्रोध के समय भी न्याय ढूँढता है और विश्वासियों की रक्षा करता है; दुष्टों का अंत भी उसी की पवित्र सत्ता के अनुसार तय है।

— अलबर्ट बार्न्स के दृष्टिकोण से यह संदेश यह है कि ईश्वर की देख-रेख में संकट के बीच भी मनुष्य को सत्यता और नैतिकता नहीं छोड़नी चाहिए; उनके मुताबिक दृष्टांतों से अहंवाद और मूढ़ता दूर होती है।

— एडम क्लार्क के व्याख्यानों के अनुसार, ऐसे समय में परमेश्वर की प्रतिज्ञा व्यक्ति के चरित्र-निर्माण का परीक्षण होती है: विश्वासियों को धैर्यपूर्वक उसकी योजना पर भरोसा रखना चाहिए।

पठित सम्बन्धी संदर्भ

1) भजन संहिता 37:3-7 — क्रमबद्ध आस्था से परमेश्वर पर भरोसा बनाये रखने की शिक्षा देता है।

2) भजन संहिता 46:1 — संकट के समय परमेश्वर हमारा मददगार और सीधी रक्षा है।

3) यशायाह 46:9-10 — परमेश्वर के स्थायित्व और उत्साहपूर्ण योजना की पुष्टि कि वह अपने उद्देश्य को पूरा करेगा।

व्यावहारिक विचार

जब वर्तमान संकट उग्र हो, तब भी हमें ध्यान रखना चाहिए कि ईश्वर listen करता है, और उसकी उत्तर देने की पारी मानवीय समय-सीमा से परे हो सकती है। इसलिए Pray करते समय धैर्य और आस्था बनाए रखें। अपने व्यवहार में ईश्वर के भय को संरक्षित करें, क्योंकि यह स्थिरता और नैतिकता की कुंजी है।

संक्षिप्त समापन

55:19 न सिर्फ एक आश्वासन देता है कि परमेश्वर सुनता है, बल्कि यह चेतावनी भी देता है कि मानव निर्भरता और भय के अभाव में परिवर्तनशीलता रहती है। परमेश्वर के विराजमान रहते, आशा और विश्वास के साथ संतुष्टि मिलती है कि वह समय आने पर न्याय और कृपा से उत्तर देगा।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 55:19 समानांतर पद और संबंधित वचन

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