व्यवस्थाविवरण 11:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और यहोवा का कोप तुम पर भड़के, और वह आकाश की वर्षा बन्द कर दे, और भूमि अपनी उपज न दे, और तुम उस उत्तम देश में से जो यहोवा तुम्हें देता है शीघ्र नष्ट हो जाओ।

व्यवस्थाविवरण 11:17 पद-दर-पद बाइबल टीका

व्यवस्थाविवरण 11:17 पर टिप्पणी

इस पद में परमेश्वर यह स्पष्ट करते हैं कि यदि आप कीर्तिनिष्ठ obedience से पीछे हटकर अपने इतिहास-सभ्य जीवन के मार्ग से विचलित होते हैं, तो उसका परिणाम क्या होगा।यह वह समय है जब इजरायली लोग वनों-घासों में नहीं, बल्कि उनके सामने रखे हुए वादा-देश में प्रवेश के बाद भी जोखिम को जानते हैं।यहाँ कोप और उसकी विपरीत धारा एक चेतावनी के रूप में आती है: यदि वे यहोवा के नियमों को भुल जाएँगे, तो आकाश वर्षा रोक दी जाएगी और भूमि अपनी उपज देना छोड़ देगी, और अंततः वे अपने विशिष्ट, उत्तम देश से शीघ्र ही दूर हो जाएंगे।

मुख्य आशय

इस श्लोक के माध्यम से लेखक यह बताता है कि बरकत और आशिर्वाद परमेश्वर के अनुदान पर निर्भर हैं, और आधीनता/अनुशासन के बिना जीवन अस्थिर और कठिन हो सकता है। परमेश्वर के अनुग्रह और निर्गम के बीच एक अनुशासनात्मक संतुलन है: यदि लोग नियमों के अनुसार चलें, वे वर्षा और भूमि की उर्वरता के लाभ उठाते हैं; यदि नहीं, तो विपरीत परिणाम दिखते हैं।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • आजन्म-संरक्षण बनाम अवज्ञा: यहोवा की आज्ञाओं की पालना में ही जीवन-शासन है; उल्लंघन पश्चात वैश्विक और व्यक्तिगत अशांति बढ़ती है।
  • स्थान और कृपा: उत्तम देश का दायरा और उसकी संपदा एक संकेतन है कि परमेश्वर के संरक्षण में जीवन संभव है, लेकिन यह संरक्षण सम्बन्ध-परिशुद्धता से संचालित है।
  • आशिर्वाद–अपमान का चक्र: वर्षा रुकना और भूमि की उपज घटना एक कथा है कि बुराई के परिणाम कैसे सामाजिक-आर्थिक जीवन को अस्थिर करते हैं।

पारस्परिक पाठ (Related Passages)

1) प्रेरित करने वाला सार स्वर्गीय आशीर्वाद के लिए भगवान के मार्ग पर चलना आवश्यक: अन्य तर्क यह कि आशीर्वादी जीवन का आधार परमेश्वर के नियमों का पालन है; इससे जुड़ी अन्य कड़ियाँ: “यहोवा तुम्हारे परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना” इत्यादि।

2) चेतावनी और लाभ: यदि आप चेतावनी को अनदेखा करते हैं, तो परिणाम苦; इससे जुड़ी परिप्रेक्ष्य पाठों में बताते हैं कि केर्तियों के बिना जीवन में स्थायित्व नहीं।

3) वाचा-उद्धार का क्रम: उत्तम देश के संदर्भ में, भक्ति-निष्ठा से प्राप्त कृपा और सुरक्षा के चक्र को समझना महत्वपूर्ण है।

व्यावहारिक विचार

हम आज भी यह देख सकते हैं कि परमेश्वर के मार्ग पर चलना जीवन को स्थिर और उत्पादक बनाता है, जबकि आत्म-स्वार्थ या गलत निर्णय वर्षा-बृष्टि के प्रभावों को कम नहीं कर पाते। आत्म-परिशुद्धि, प्रार्थना और पवित्र लिखित मार्गदर्शन के साथ, हम आशीर्वाद के multilateral लाभों का अनुभव कर सकते हैं—अनुदान, सुरक्षा, और सामाजिक-नैतिक स्थिरता।

क्लोजिंग सार

ऊपर की चेतावनी यह है कि परमेश्वर की कृपा और नियम-पालन दोनों एक-दूसरे से जुड़े हैं। यदि लोग अपने जीवन में ईश्वरीय निर्देशन को याद रखें, तो वर्षा और उपज जैसी वरदानें बनी रहेंगी; अन्यथा, अस्थिरता और नष्टता का खतरा बना रहेगा। यह पाठ हमें याद दिलाता है कि जीवन-यात्रा में परमेश्वर के साथ स्थिर संबंध बनाए रखना कितना निर्णायक है।

क्रॉस-रेफरेंसे

- व्यवस्थाविवरण 28:12-13: आशीर्वादों के मार्ग और उनके अभिवेशन की दिशा का संकेत देता है कि पालन से ही वर्षा और उपज संभव है।

- देउत 11:18-21: वचन की स्मरण शक्ति और उसके पालन की प्रेरणा देता है कि बच्चों को दृढ़ता से सिखाने के लिए यह नियम कैसे बितते हैं।

- यहोशू 1:7-9: पूर्ण मन से वचन-पालन का महत्व और उसमें सफलता की आवश्यकता स्पष्ट है।

नोट: इस पाद के पाठ-वरीय पक्ष के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों के से कुछ निश्चित उद्धृत शब्द उपलब्ध होने पर जोड़े गए हैं, ताकि एक विश्वसनीय और संतुलित दृश्य प्रस्तुत हो सके।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

व्यवस्थाविवरण 11:17 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“जब वे तेरे विरुद्ध पाप करें, और इस कारण आकाश बन्द हो जाए, कि वर्षा न होए, ऐसे समय यदि वे इस स्थान की ओर प्रार्थना करके तेरे नाम को मानें जब तू उन्हें दुःख देता है, और अपने पाप से फिरें, तो तू स्वर्ग में से सुनकर क्षमा करना,

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तो मैं आज आकाश और पृथ्वी को तुम्हारे विरुद्ध साक्षी करके कहता हूँ, कि जिस देश के अधिकारी होने के लिये तुम यरदन पार जाने पर हो उसमें तुम जल्दी बिल्कुल नाश हो जाओगे; और बहुत दिन रहने न पाओगे, किन्तु पूरी रीति से नष्ट हो जाओगे।

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व्यवस्थाविवरण 6:15 (HINIRV) »
क्योंकि तेरा परमेश्‍वर यहोवा जो तेरे बीच में है वह जलन रखनेवाला परमेश्‍वर है; कहीं ऐसा न हो कि तेरे परमेश्‍वर यहोवा का कोप तुझ पर भड़के, और वह तुझको पृथ्वी पर से नष्ट कर डाले।

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