1 राजाओं 8:35 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“जब वे तेरे विरुद्ध पाप करें, और इस कारण आकाश बन्द हो जाए, कि वर्षा न होए, ऐसे समय यदि वे इस स्थान की ओर प्रार्थना करके तेरे नाम को मानें जब तू उन्हें दुःख देता है, और अपने पाप से फिरें, तो तू स्वर्ग में से सुनकर क्षमा करना,

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1 राजाओं 8:35 पद-दर-पद बाइबल टीका

सारांश अर्थ

वराह और सूखे के समय में प्रार्थना की सुनवाई का आश्वासन: राजा सोलोमन कहता है कि यदि लोग अपने पापों के कारण आकाश बंद हो और वर्षा न हो तब भी वे इस मंदिर में आकर ईश्वर से प्रार्थना कर मन-परिवर्तन (पश्चात्ताप) कर लें तो परमेश्वर स्वर्ग से सुनकर क्षमा करेगा और च्याओं को हटाएगा। यह वचन प्रतिज्ञा और दीनता दोनों को जोड़ता है — परमेश्वर की दया उस पर निर्भर है कि लोग सच्चे मन से लौटें।

प्रसंगिक पृष्ठभूमि

यह वचन 1 राजा 8 में सोलोमन के मंदिर-प्रार्थना के हिस्से में आता है। सोलोमन ने मंदिर को समर्पित करते हुए यह बड़ा निवेदन किया कि यह स्थान पश्चात्ताप और प्रार्थना के लिए एक केन्द्र बने। इज़राएल का कृषि-जीवन वर्षा पर निर्भर था; इसलिए वर्षा का रुकना महावीपत्ति और परमेश्वर की अनुशासनाचरण का संकेत माना जाता था। सोलोमन यहाँ उस न्याय और दया के बीच सम्बन्ध को स्थापित कर रहा है जो परमेश्वर के चरित्र में दृष्टिगोचर होता है।

व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ

1) पाप और सामूहिक दण्ड: श्लोक यह मानता है कि पाप सामाजिक-प्राकृतिक प्रभाव डालते हैं—न सिर्फ व्यक्तिगत निदान, बल्कि राष्ट्रीय जीवन पर भी परिणाम होते हैं (जैसे वर्षा का रुक जाना)।

2) स्थान और नाम की मान्यता: "इस स्थान की ओर प्रार्थना करके तेरे नाम को मानें"—यह बताता है कि मंदिर का पवित्रता और परमेश्वर के नाम की सार्वजनिक मान्यता प्रार्थना को प्रभावी बनाते हैं। नाम का मानना ईश्वर की स्वाबाविक प्रतिष्ठा और उसके अधिकार को स्वीकारना है।

3) शर्तीय स्वरूप: वचन में स्पष्ट शर्तें हैं—प्रार्थना, पश्चात्ताप और परमेश्वर की ओर वापसी। परमेश्वर का उत्तर देना शर्तों से जुड़ा है; यह अनुग्रह की सुविधा नहीं बल्कि संबंध की बहाली है।

सन्दर्भित विचार (मथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क)

मथ्यू हेनरी परम्परागत रूप से कहता है (सारांश रूप में): सच्ची प्रार्थना और विनम्रतापूर्वक पश्चात्ताप परमेश्वर के ह्रदय को छूते हैं।

अल्बर्ट बार्न्स का सार यह है: यह वचन यह दिखाता है कि ईश्वर न्यायी भी है और दयालु भी—वह अनुशासन देता है पर वापसी पर क्षमा करता है।

एडम क्लार्क पर प्रकाश डालते हुए: मंदिर-समर्पण और सार्वजनिक प्रार्थना राष्ट्र के पुनरुद्धार के साधन हैं।

थीमगत सूची

  • पश्चात्ताप की आवश्यकता
  • प्रार्थना का स्थान और नाम-सम्मान
  • परमेश्वर की दया और अनुशासित न्याय

संबंधित पद और उनका संक्षिप्त सम्बन्ध

प्रेरितों के काम 3:19 — पश्चात्ताप और पाप से मुक्ति के लिये आग्रह; 1 राजा 8:35 इसी पश्चात्ताप-प्राथना के सिद्धांत पर खड़ा है।

यशायाह 55:7 — पापी के लौटने पर परमेश्वर की क्षमा का आमंत्रण; दोनों पद पश्चात्ताप के उत्तर में दया का वादा जोड़ते हैं।

मत्ती 6:9–13 (प्रार्थना का नमूना) — पूजा और परमेश्वर के नाम की महत्ता; सोलोमन के आग्रह और मसीही प्रार्थना-शिक्षा में समानता है कि प्रार्थना संबंध और निवेदन दोनों है।

व्यावहारिक उपसंहार

यह श्लोक हमको सिखाता है कि कठिनाइयों में पहला कदम बाहरी उपाय नहीं बल्कि आत्म-निरीक्षण और परमेश्वर की ओर सच्चा लौटना है। सार्वजनिक या निजी कोई भी स्थान हो, यदि वह विनय, पश्चात्ताप और परमेश्वर के नाम की वास्तविक मान्यता से मिलकर प्रार्थना उठती है तो परमेश्वर सुनते और क्षमा करते हैं। यह एक समेकित संदेश है—अनुशासन का अर्थ दण्ड नहीं केवल चेतावनी है, और दया का अर्थ शर्तों के बिना नहीं, बल्कि मोड़ पर मिलने वाली अनुग्रहपूर्ण प्रतिक्रिया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 राजाओं 8:35 समानांतर पद और संबंधित वचन

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फिर जब तेरी प्रजा इस्राएल तेरे विरुद्ध पाप करने के कारण अपने शत्रुओं से हार जाए, और तेरी ओर फिरकर तेरा नाम ले और इस भवन में तुझ से गिड़गिड़ाहट के साथ प्रार्थना करे,

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