Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 8:1 1 राजाओं 8:2 1 राजाओं 8:3 1 राजाओं 8:4 1 राजाओं 8:5 1 राजाओं 8:6 1 राजाओं 8:7 1 राजाओं 8:8 1 राजाओं 8:9 1 राजाओं 8:10 1 राजाओं 8:11 1 राजाओं 8:12 1 राजाओं 8:13 1 राजाओं 8:14 1 राजाओं 8:15 1 राजाओं 8:16 1 राजाओं 8:17 1 राजाओं 8:18 1 राजाओं 8:19 1 राजाओं 8:20 1 राजाओं 8:21 1 राजाओं 8:22 1 राजाओं 8:23 1 राजाओं 8:24 1 राजाओं 8:25 1 राजाओं 8:26 1 राजाओं 8:27 1 राजाओं 8:28 1 राजाओं 8:29 1 राजाओं 8:30 1 राजाओं 8:31 1 राजाओं 8:32 1 राजाओं 8:33 1 राजाओं 8:34 1 राजाओं 8:35 1 राजाओं 8:36 1 राजाओं 8:37 1 राजाओं 8:38 1 राजाओं 8:39 1 राजाओं 8:40 1 राजाओं 8:41 1 राजाओं 8:42 1 राजाओं 8:43 1 राजाओं 8:44 1 राजाओं 8:45 1 राजाओं 8:46 1 राजाओं 8:47 1 राजाओं 8:48 1 राजाओं 8:49 1 राजाओं 8:50 1 राजाओं 8:51 1 राजाओं 8:52 1 राजाओं 8:53 1 राजाओं 8:54 1 राजाओं 8:55 1 राजाओं 8:56 1 राजाओं 8:57 1 राजाओं 8:58 1 राजाओं 8:59 1 राजाओं 8:60 1 राजाओं 8:61 1 राजाओं 8:62 1 राजाओं 8:63 1 राजाओं 8:64 1 राजाओं 8:65 1 राजाओं 8:66



1 राजाओं 8:27 पर टिप्पणी — परमेश्वर का स्थायी निवास और आयाम
इस पद का सार यह है: परमेश्वर अपने लोक-जन के बीच एक ठहराव या धारण स्थान चाहते हैं, पर आत्मिक रूप से वह सब कुछ से ऊपर हैं—सीमाओं में नहीं बाँधे जा सकते। राजा के मंदिर के प्रति सुझत विचार में शंका उठती है कि क्या ईश्वर किसी भी कसरत के भीतर आ सकता है; लेकिन वह सर्वव्यापक हैं और शब्दित निवास के भीतर भी उनके साथतय का अर्थ यह है कि संसद-गृह बनना मानवीय प्रार्थना और आराधना के लिए एक संकेत है, न कि परमेश्वर की सीमाओं का समाधान।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पद सुलैमान के मंदिर के समापन के समय का है, जब मंदिर की महिमा और परमेश्वर के साथ उसका पवित्र मिलन दर्शाया जा रहा है। सुलैमान ने परमेश्वर से याचना की कि वह इस भवन में निवास करे, पर विधिवत चेतावनी भी दी कि परमेश्वर पृथ्वी के ऊपर है और शाश्वत स्थान पर टिकते हैं। यह उद्घाटन सन्देश भक्तों को यह याद दिलाता है कि पूजा के ठहराव का केन्द्र बनना चाहिए, न कि परमेश्वर को मंदिर के अंदर समेटना।
Interpretive observations
संश्लेषित प्रमुख विचार
अन्वयित क्रॉस-रेफरेंसेस
ईश्वर के विश्वव्यापी निवास और मंदिर-प्रत्यय पर इन संदर्भों को देखें:
व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारे प्रतिदिन के आराधना-चर्या में: - मंदिर या पवित्र स्थल से भी ऊपर ईश्वर का आशीर्वाद और उपस्थिति चाहिए; प्रार्थना में आत्मिक निष्ठा और ईमानदार दिल रखें। - भवन बनवाने से पहले, दिल की पवित्रता और नैतिक समुदाय की उन्नति को प्राथमिकता दें। - समुदायिक आराधना में समर्पण और याचना की मार्गदर्शिका बनी रहे ताकि परमेश्वर की महिमा हमारे जीवन में स्पष्ट बने।
ईसाई-पश्चात्ताप और क्लासिक टीका (संक्षेप)
यह विचार 17वीं-18वीं सदी के प्रचलित टीकाओं में भी देखने को मिलता है—जहाँ मुफ्त-ऊँचाई के साथ मंदिर-आश्रय भी एक प्रतीक होता है। तीन प्रसिद्ध सार्वजनिक-डायरेक्शन कमेंटेटरन की संक्षिप्त प्रेरणा:
मैथ्यू हेनरी: मंदिर के स्थान का प्रश्न ईश्वर के सर्वव्यापीत्व पर नहीं डालना चाहिए; बल्कि यह बताता है कि आराधना में दिल की स्वच्छता कितनी अनिवार्य है।
आल्बर्ट बार्न्स: परमेश्वर का निवास भू-गृहों से ऊपर है, पर मंदिर एक चेतावनी देता है कि बाहरी व्यवस्था से आंतरिक परिवर्तन संभव हो।
एडम क्लार्क: यह आशीष कि परमेश्वर द्वार-उद्धार के साथ-साथ समुदाय-निर्माण की उपयोगिता को मानते हैं; भवन केवल संकेत है, वास्तविकता परमेश्वर की उपस्थिति है।
यदि आप चाहें तो मैं इन उद्धरणों से सटीक वाक्यों को संक्षेप में दे सकता हूँ और अधिक क्रॉस-रेफरेंसेस जोड़ सकता हूँ।