Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
व्यवस्थाविवरण 1 व्यवस्थाविवरण 2 व्यवस्थाविवरण 3 व्यवस्थाविवरण 4 व्यवस्थाविवरण 5 व्यवस्थाविवरण 6 व्यवस्थाविवरण 7 व्यवस्थाविवरण 8 व्यवस्थाविवरण 9 व्यवस्थाविवरण 10 व्यवस्थाविवरण 11 व्यवस्थाविवरण 12 व्यवस्थाविवरण 13 व्यवस्थाविवरण 14 व्यवस्थाविवरण 15 व्यवस्थाविवरण 16 व्यवस्थाविवरण 17 व्यवस्थाविवरण 18 व्यवस्थाविवरण 19 व्यवस्थाविवरण 20 व्यवस्थाविवरण 21 व्यवस्थाविवरण 22 व्यवस्थाविवरण 23 व्यवस्थाविवरण 24 व्यवस्थाविवरण 25 व्यवस्थाविवरण 26 व्यवस्थाविवरण 27 व्यवस्थाविवरण 28 व्यवस्थाविवरण 29 व्यवस्थाविवरण 30 व्यवस्थाविवरण 31 व्यवस्थाविवरण 32 व्यवस्थाविवरण 33 व्यवस्थाविवरण 34Verse
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व्यवस्थाविवरण 16:15 का संक्षेप व्याख्यान
यह पद यहोवा के तीन प्रमुख पर्वों के त्योहार-आयोजन के क्रम में का भाग है। इस भेंट में इजराइल के लोग हर वर्ष चुनिंदा स्थान पर सात दिन तक पर्व मनाते थे, जिससे यहोवा उनकी सारी बढ़ती, उनकी मेहनत और उनके कामों में आशीष देता रहे। यहां पर ताजगी यह है कि ईश्वर का आशीर्वाद जुड़ाव के पर्व-समारोहों से नहीं, बल्कि एक समर्पित जीवनशैली से आता है—उस स्थान पर जो यहोवा चुन ले.
मुख्य अर्थ
इस verse का केंद्रीय संदेश है कि परमेश्वर के लिए समर्पण और उत्सवों का क्रम हमारे क्रमबद्ध आशीष का आधार है। यहोवा हमारे आर्थिक, सामाजिक और कार्य-जीवन में वृद्धि देता है, जब हम उसकी पूजना और व्यवस्था के अनुसार जीवन जीते हैं। मनोभाव रूप से यह सम्मान का संकेत है: केवल रीतिरिवाज नहीं, बल्कि हृदय की प्रसन्नता और परमेश्वर के निर्देशों के पालन की लगन।
दो-तीन प्रमुख विषय
संयुक्त पाठ-संबंध
यह verse टोली-आशीष के सिद्धांत को अन्य प्रचलित भागों से जोड़ता है जहाँ परमेश्वर की रुचि हमारे दिल की स्थिति और समुदाय के उत्सवों में दिखती है:
युक्त सुझाव (व्यावहारिक अनुभाग)
पवित्रता से जुड़ी क्रॉस-रेफरेंसेस
1) आदर्श वाक्य में खुशी और परमेश्वर की उपस्थिति का मेल दिखता है; 2) एक स्थान-प्राप्ति का विचार यहूदी परंपरा में पूजा के केन्द्र की पुष्टि करता है; 3) समुदाय में आशीष और समृद्धि अनुभव करने के लिए धर्म-पालन आवश्यक है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह verse हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर के लिए जीवन-क्रम और समुदाय-समारोह न सिर्फ रीति-रिवाज हैं, बल्कि आशीष का मार्ग हैं। जब हम उसे चुन कर, उसकी व्यवस्था में प्रसन्नता से भाग लेते हैं, वही हमारे बढ़ोतरी का स्रोत बनती है।
नोट: नीचे उद्धरण-उद्धरण केवल संदर्भ हेतु हैं—यह अंश Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों से हैं।
उद्धरण (संक्षेप): “पर्व-उत्साह और परमेश्वर की इच्छा में खुशी एक साथ चलते हैं; आशीष उसी समय आते हैं जब मन pursuesGodward.”
क्रॉस-रेफरेंसेस का संक्षेप तर्क नीचे: यह verse यह दिखाता है कि सच्चा आशीष प्लान और समर्पण से आता है, न कि किसी एक रीतिरिवाज से एक ही स्थान पर पूर्णता की अपेक्षा नहीं है, बल्कि परमेश्वर के निर्देशों के अनुसार जीवन को बनाना है।
उद्धृत टिप्पणीकारों से छोटे-छोटे विचार (नोट)\ - Matthew Henry: यहोवा की ओर से चुने गए स्थान पर खुशी के साथ पर्व मनाने को आशीष और समृद्धि की कुंजी माना गया है।\ - Albert Barnes: आशीष का वास्तविक स्रोत परमेश्वर की व्यवस्था और दिल की श्रद्धा है; बाहरी उत्सव उसी दिल की प्रतिक्रिया है।\ - Adam Clarke: बन्धन-रहित परमेश्वर की कृपा जीवन के सभी क्षेत्रों में बढ़ोतरी देती है, जब जागरूकता के साथ उसका स्थान मान्य हो।