Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
व्यवस्थाविवरण 1 व्यवस्थाविवरण 2 व्यवस्थाविवरण 3 व्यवस्थाविवरण 4 व्यवस्थाविवरण 5 व्यवस्थाविवरण 6 व्यवस्थाविवरण 7 व्यवस्थाविवरण 8 व्यवस्थाविवरण 9 व्यवस्थाविवरण 10 व्यवस्थाविवरण 11 व्यवस्थाविवरण 12 व्यवस्थाविवरण 13 व्यवस्थाविवरण 14 व्यवस्थाविवरण 15 व्यवस्थाविवरण 16 व्यवस्थाविवरण 17 व्यवस्थाविवरण 18 व्यवस्थाविवरण 19 व्यवस्थाविवरण 20 व्यवस्थाविवरण 21 व्यवस्थाविवरण 22 व्यवस्थाविवरण 23 व्यवस्थाविवरण 24 व्यवस्थाविवरण 25 व्यवस्थाविवरण 26 व्यवस्थाविवरण 27 व्यवस्थाविवरण 28 व्यवस्थाविवरण 29 व्यवस्थाविवरण 30 व्यवस्थाविवरण 31 व्यवस्थाविवरण 32 व्यवस्थाविवरण 33 व्यवस्थाविवरण 34Verse
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व्यवस्थाविवरण 17:13 — कविता का तात्पर्य और अनुप्रयोग
परिस्थिति का आपसी संदर्भ यह है कि परमेश्वर इस्रएल के हर राजा के लिए कानून स्थापित करता है कि वह लोगों के अनुरोध पर नये राज्य-नियम अपनाने से पहले सावधानी और भय के साथ काम करे। यह पद बताता है कि जनता की इच्छा के अनुसार शासन करने के बजाय परमेश्वर की व्यवस्था के अनुरूप भय और विनम्रता बनाए रखना आवश्यक है ताकि अभिमान पनपने का मौका न मिले।
पुस्तक से पाठ का स्पष्ट अर्थ
यह संदेश बनावटी शक्ति से नहीं, परलोक-भय और निष्कलंक विनम्रता से शासन करने के महत्त्व पर केंद्रित है। लोग सुनकर डर जाएँगे और अभिमान नहीं करेंगे—यानी सरकार के नियमों के प्रति मनोयोग बना रहेगा और दुष्क्षमता नहीं होगी। यह डर एक नीतिगत, नहीं भय-निर्भर, व्यवहार का रूप है।
ईश्वर तथा विश्वास के बारे में संदेश
यह नज़रिए से ईश्वर के राज्य के निहित मानक स्पष्ट दिखते हैं: एक ऐसा शासन जो मानव स्वभाव के अभिमान को रोक दे और नैतिक विनम्रता को प्रेरित करे। भय और समर्पण के बिना ईमानदार आचरण संभव नहीं। विश्वास यही सिखाता है कि परमेश्वर के निर्देशों के सामने हमारीर्त्ता और नम्रता परम कला है।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्ट व्याख्या
अन्य प्रत्यक्ष संदर्भ (क्रॉस-रेफरेंस) और संक्षिप्त व्याख्या
- नीतिवाक्य 16:18 के अभिमान के परिणाम: अभिमान अंततः गिरावट का कारण बनता है; सही शासन में विनय प्रमुख गुण है।
- यशायाह 57:15: आत्माओं के लिए विनम्रता और भय का मूल्य, जिसे ईश्वर सफल बनाता है।
- गिनती 12:3: मनुष्यों में विनय की दुर्लभता के बावजूद परमेश्वर विनम्रों के साथ रहता है।
मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के संकेतित उद्धरण
यदि उपलब्ध हों, इनमें से कुछ संक्षिप्त विवेचन नीचे उद्धृत हैं:
हेनरी/बार्न्स/क्लार्क की पूर्ण उद्धरण यहाँ नहीं दी जा रही; शब्द-संदर्भ एकीकृत विवेचन के क्रम में उनका संक्षिप्त समर्थन मिलता है कि अभिमान पर नियंत्रण परमेश्वर के राज्य की सुरक्षा है।
आज के लिए व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षिप्त सार
इस पद से स्पष्ट होता है कि शासन-व्यवस्था में ईश्वर के नियमों के अनुरूप भय एवं विनम्रता बनाए रखना चाहिए ताकि मानव-आकांक्षा और अभिमान से दूर रहा जा सके। यह आज भी नीति-निर्माण और सार्वजनिक जीवन के हर क्षेत्र में समान रूप से प्रासंगिक है।