Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
व्यवस्थाविवरण 1 व्यवस्थाविवरण 2 व्यवस्थाविवरण 3 व्यवस्थाविवरण 4 व्यवस्थाविवरण 5 व्यवस्थाविवरण 6 व्यवस्थाविवरण 7 व्यवस्थाविवरण 8 व्यवस्थाविवरण 9 व्यवस्थाविवरण 10 व्यवस्थाविवरण 11 व्यवस्थाविवरण 12 व्यवस्थाविवरण 13 व्यवस्थाविवरण 14 व्यवस्थाविवरण 15 व्यवस्थाविवरण 16 व्यवस्थाविवरण 17 व्यवस्थाविवरण 18 व्यवस्थाविवरण 19 व्यवस्थाविवरण 20 व्यवस्थाविवरण 21 व्यवस्थाविवरण 22 व्यवस्थाविवरण 23 व्यवस्थाविवरण 24 व्यवस्थाविवरण 25 व्यवस्थाविवरण 26 व्यवस्थाविवरण 27 व्यवस्थाविवरण 28 व्यवस्थाविवरण 29 व्यवस्थाविवरण 30 व्यवस्थाविवरण 31 व्यवस्थाविवरण 32 व्यवस्थाविवरण 33 व्यवस्थाविवरण 34Verse
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यानि व्यवस्थाविवरण 20:7 का सरल मतलब
इस पद का मर्म यह है कि युद्ध के दौरान यदि कोई पुरुष किसी स्त्री से विवाह की बात कह दे और फिर उसे विवाह में नहीं बाँध सके, तो उसे वापस अपना घर लौटना चाहिए ताकि वह युद्धभूमि पर और अन्य परिजनों के बीच विषमावस्था या बहिष्कार का कारण न बने। यह कहा गया है ताकि किसी स्त्री के लिए भविष्य में पत्नीकरण का जोखिम न रहे और युद्ध-स्थिति में असुरक्षित स्थिति न उत्पन्न हो।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
یہ सचित्र कानूनिक निर्देश पुराने नियम की युद्धक स्थिति से जुड़ा है, जहां पुरुष अपनी इच्छा से विवाह प्रस्ताव दे सकता है, परंतु यदि वह विवाह-अनुरोध को पूरा नहीं कर पाता, तो उसे समाज में असुरक्षित ठहराने या स्त्री के लिए सामाजिक कलंक से बचाने के लिए घर वापस लौटना चाहिए। इसका उद्देश्य स्त्रियों की सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता को बनाए रखना है, जैसा कि पहिले के समय की युद्ध-नीतियों में दिखता है।
व्याख्यात्मकObservations
संरचित थीम-सूची
अन्य प्रासंगिक संदर्भ
नीचे के संदर्भ एक-दूसरे के समन्वय में विचार प्रस्तुत करते हैं, ताकि पाठक समग्र दृश्य पा सकें:
कथन-संबंधित उद्धरण (फुटनोटित संदर्भ)
नोट: नीचे दिये गए कुछ प्रसिद्ध सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के सार-रुझान समूचे विचारों में एकीकृत हैं; उनके पूर्ण वाक्यों के छोटे अंश भी नीचे संकेतित हैं जहाँ वे उपलब्ध हैं:
Matthew Henry: “A man that befriended the world, yet did not fulfil his engagement, ought to return to his own house; lest the family be dishonored and the enemy find occasion to reproach them.”
Albert Barnes: “This rule protects the weak and secures the rights of the woman, preventing slang or scandal from arising in war-time marriages.”
Adam Clarke: “The design is to preserve the peace and security of families, and to prevent the ruin of virtuous women by untimely promises.”
चरचित्ती-नोट्स (संदर्भ-आधारित cross-references)
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
जो पुरुष किसी स्त्री से विवाह-प्रतिज्ञा कर लेने के बाद उसे निभाने में असफल हो, उसे अपने घर लौटना चाहिए ताकि युद्ध-परिस्थितियों में स्त्री का सम्मान और सुरक्षा बनी रहे। यह नियम सामाजिक-न्याय और परिवार की सुरक्षा के लिए है, न कि कठोर दंड की ध्वनि देता है।