Old Testament
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आशय का स्पष्ट संकेत
व्यवस्थाविवरण 20:18 के अनुसार परमेश्वर यह कहता है कि जो घिनौने कर्म वे अपने देवताओं की सेवा में करते चले आए हैं, वैसा करके तुम अपने परमेश्वर से पाप करने लगो, यह न हो। इसका अर्थ है कि उनके धार्मिक आचरण से जुड़ी बुराइयों को नकल करना घोर पाप है; चले आओ, वे जो करते हैं, उसका अनुकरण न करें, ताकि तुम्हारा धर्म विरोध न बने।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह मिस्त्रियों के साथ युद्धों के समय का निर्देश है, जहां यहोवा ने इस्राएलियों को अन्य देशों के देवताओं के प्रतीकों और उनके अनुष्ठानों से दूर रहने को कहा है। देवताओं के पवित्र आचरण के समानांतर, उनके अनुकरण से यहूदियों का नैतिक ढांचा और एकता टूट सकता है। यह अध्याय बहरहाल युद्ध-विधि के साथ-साथ धार्मिक आचरण के सावधान रहने की सीख देता है।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
- यह चेतावनी सच्चे मुस्लिम/यही मान लिया गया है कि पूजा-प्रथाओं में घिनौने या अपवित्र कार्यों का नकल पवित्रता को क्षीण कर देता है।
- यहाँ “घिनौने काम” वह धार्मिक-आचरण से जुड़ी धारणाएँ हैं जो अन्य देवताओं के प्रसंग में प्रचलित थीं; इससे यह स्पष्ट होता है कि ईश्वर का पवित्र आचरण दूसरों के पापों को अपनाने से अधिक श्रेष्ठ है।
बहुवचन पाठ्य-आकर्षण (Cross-references)
इन संदर्भों में स्पष्ट संकेत मिलता है कि अलग-अलग धर्म-प्रथाओं के प्रभाव से धार्मिक दिशा-निर्देश प्रभावित होते हैं और इस कारण यहोवा के लिए निर्दोष जीवन चुनना आवश्यक है।
संक्षिप्त थीमैटिक सूची
छोटी-सी व्याख्या (संकेतित उद्धरणों के साथ)
इस वक्तव्य में यहोवा उन धार्मिक प्रथाओं के प्रभाव को स्पष्ट कर रहे हैं जिन्हें वह नहीं स्वीकारते; यदि आप ताकत से दूसरों के पापों के पैटर्न अपनाते हैं, तो यह आपके विश्वास की ठहराव को नुकसान पहुँचा सकता है।
मथ्यू हेन्री (Matthew Henry) इस प्रकार समझाते हैं कि “किसी बाहरी कर्म को अपनाने से आंतरिक चरित्र नहीं बनता”; वह पथ जो पाप के नकल से बनता है, वह परमेश्वर के_COMMANDment के विरुद्ध है। उद्धरण केवल संकेतात्मक है: “प्रत्यक्ष पाप की नकल से बचना चाहिए”
एलेक्ट बेटर (Albert Barnes) पाते हैं कि यह निर्देश यहूदियों को धार्मिक अनुष्ठानों के प्रति सतर्क बनाता है ताकि वे अन्य जातियों के घृणित कृत्यों को अपनाकर खुद के नैतिक ढांचे को ध्वस्त न करें।
एडम क्लार्क (Adam Clarke) बतलाते हैं कि हर घिनौना कर्म, चाहे वह किसी देव-उत्सव का साधारण हिस्सा हो, समग्र आस्था के बीच अंश बनकर उसके लिए खतरा है; इसलिए वैसी नकल करना निषेध है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
अपने जीवन में ऐसे आचरण न रखें जो किसी बाहरी पाप-प्रथा की नकल से प्रकट हों। धर्म-आचरण की पवित्रता बनाए रखिए; अपने परमेश्वर यहोवा के प्रति वचनों और आस्थाओं की ऊँचाई को बनाए रखना ही सच्ची भक्ति है।