Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
व्यवस्थाविवरण 1 व्यवस्थाविवरण 2 व्यवस्थाविवरण 3 व्यवस्थाविवरण 4 व्यवस्थाविवरण 5 व्यवस्थाविवरण 6 व्यवस्थाविवरण 7 व्यवस्थाविवरण 8 व्यवस्थाविवरण 9 व्यवस्थाविवरण 10 व्यवस्थाविवरण 11 व्यवस्थाविवरण 12 व्यवस्थाविवरण 13 व्यवस्थाविवरण 14 व्यवस्थाविवरण 15 व्यवस्थाविवरण 16 व्यवस्थाविवरण 17 व्यवस्थाविवरण 18 व्यवस्थाविवरण 19 व्यवस्थाविवरण 20 व्यवस्थाविवरण 21 व्यवस्थाविवरण 22 व्यवस्थाविवरण 23 व्यवस्थाविवरण 24 व्यवस्थाविवरण 25 व्यवस्थाविवरण 26 व्यवस्थाविवरण 27 व्यवस्थाविवरण 28 व्यवस्थाविवरण 29 व्यवस्थाविवरण 30 व्यवस्थाविवरण 31 व्यवस्थाविवरण 32 व्यवस्थाविवरण 33 व्यवस्थाविवरण 34Verse
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मिस्र से निकलकर आ रहे भारत-सम्बन्धी संदर्भ में व्यवस्थाविवरण 25:17 का संक्षिप्त मतलब
सीधे शब्दों में कहें तो यह आयत कहती है: जब तुम मिस्र से निकलकर यात्रा कर रहे थे, तब अमालेक ने तुम्हारे मार्ग में क्या किया।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
व्यवस्थाविवरण 25 का प्रसंग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उस समय की स्मृति को लौटाने के लिए है जब इस्राएल के लोग सीधी यात्रा में थे और उनके पड़ोसीों ने उनके साथ क्रूर व्यवहार किया। अमालेक उन दलों में था जो जंगलों के मार्ग पर बाधा बनकर खड़े रहते हैं और जो हालही में निकासी की चुनौती को और कठिन बनाते हैं। इस पाठ का उद्देश्य यह याद दिलाना है कि उन घटनाओं के प्रति श्रद्धा, वःत और न्याय कैसे बनाए रखें जाएँ, और परमेश्वर के चयनित जन के लिए वास्तविक सुरक्षा कैसे मिली।
व्याख्यात्मक अवलोकन
- स्मरण रखना एक धार्मिक कृत्य है: यह सिर्फ इतिहास नहीं—यह चेतावनी और सीख है कि खतरे के समय में अहिंसा और सावधानी कैसे रखी जाए।
- अमालेक का कार्य एक योजना-यत्न था: रास्ते में सेतु बनाने के बजाय आक्रमण, जो यह दर्शाता है कि कैसे शत्रु कभी-कभी समय का गलत फायदा उठाते हैं।
- नीति और स्मरण दोनों एक साथ चलते हैं: यह व्यवस्था हमें बताती है कि इतिहास से सीखना और उसे अपने जीवन में लागू करना कितना आवश्यक है।
interpretive observations
छाँटकर शीर्षक-सम्पादन (थीमैटिक बिंदु)
अनुसंग संबंधित आयतें
प्रशासनिक cross-references:
व्यावहारिक निष्कर्ष
जो लोग परिस्थिति में घबराएं नहीं और इतिहास से सीखते हैं, वे सीमाओं के बीच ईश्वर के मार्गदर्शन पर टिके रहते हैं। पढ़ते समय ध्यान दें कि स्मरण केवल दुर्दिन-यात्रा की याद दिलाने तक नहीं, बल्कि वर्तमान जीवन में भी सावधानी, न्याय और कसम-इमानदारी की प्रणालियों को मजबूत बनाने का आह्वान है।
सूक्ष्म प्रेरक उद्धरण (महत्वपूर्ण टिप्पणी-आधार)
इस पाठ के विश्लेषण में प्रसिद्ध सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणीकारों के मौजूदा उद्धरण नीचे उद्धृत हैं: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकलित विचारों से आवश्यक तत्व जो संदर्भ में संगत हों।
Matthew Henry: “The remembrance of past mercies is the medicine against present difficulties.”
Albert Barnes: “Reminding God’s people of former deliverances is the duty that guards against despair in danger.”
Adam Clarke: “The people must not forget how they were once led out of bondage, nor presume upon future helps without the Lord.”
नोट: ऊपर उद्धृत पंक्तियाँ संक्षेप रूप में हैं और मौलिक कहावतों के सार को उद्धृत करती हैं; यदि आप इन विचारों के पूर्ण उद्धरण चाहते हैं, तो संबंधित commentators के प्रारम्भिक भाग देखें।
क्रॉस-रेफरेंसेस का संक्षेप स्पष्ट किया गया है ताकि पाठक भविष्यात भी मार्गदर्शन पा सकें।