Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
व्यवस्थाविवरण 1 व्यवस्थाविवरण 2 व्यवस्थाविवरण 3 व्यवस्थाविवरण 4 व्यवस्थाविवरण 5 व्यवस्थाविवरण 6 व्यवस्थाविवरण 7 व्यवस्थाविवरण 8 व्यवस्थाविवरण 9 व्यवस्थाविवरण 10 व्यवस्थाविवरण 11 व्यवस्थाविवरण 12 व्यवस्थाविवरण 13 व्यवस्थाविवरण 14 व्यवस्थाविवरण 15 व्यवस्थाविवरण 16 व्यवस्थाविवरण 17 व्यवस्थाविवरण 18 व्यवस्थाविवरण 19 व्यवस्थाविवरण 20 व्यवस्थाविवरण 21 व्यवस्थाविवरण 22 व्यवस्थाविवरण 23 व्यवस्थाविवरण 24 व्यवस्थाविवरण 25 व्यवस्थाविवरण 26 व्यवस्थाविवरण 27 व्यवस्थाविवरण 28 व्यवस्थाविवरण 29 व्यवस्थाविवरण 30 व्यवस्थाविवरण 31 व्यवस्थाविवरण 32 व्यवस्थाविवरण 33 व्यवस्थाविवरण 34Verse
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सीधा अर्थ (Meaning in one line)
व्यवस्थाविवरण 28:61 कहता है कि जो रोग और अन्य दण्ड इस पुस्तक में लिखे नहीं हैं, वे भी यीश्वा के नियम की अवहेलना पर देह-नाश का भाग्य ठहराते हैं, अर्थात् परमेश्वर के दण्ड का विस्तार इस व्यवस्था पर पूरे समाज पर पड़ सकता है।
परिप्रेक्ष्यीय पृष्ठभूमि
यह श्लोक वह भाग है जहां परमेश्वर ने इस्राएल पर होने वाले आशीर्वाद और शाश्वत दण्ड की सूचियाँ दीं। पहली सूची स्पष्ट रूप से पवित्र विधान के पालन से जुड़ी है; दूसरी सूची में उन दण्डों का विस्तार है जो नियमों के उल्लंघन पर आते हैं। इस स्थान पर कहा गया कि जो रोग आदि दण्ड इस पुस्तक में नहीं लिखे हैं, वे भी तेरे सत्यानाश का कारण बनेंगे—यानी यदि बंधनों के भीतर से कुछ भी ग़ायब हो या उनकी पूर्ति न मानिए जाए, तो परिणाम गम्भीर होंगे।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
थीमेटिक सारांश (Key themes)
संदर्भ-क्रॉस-रेफरेंसेस
1) व्यवस्थाविवरण 28:15 — नियम-उल्लंघन पर आशीषों का अभाव और दण्ड की शुरुआत। यह दिखाता है कि स्पष्ट वचन के पालन से जुड़ी सुरक्षा और विपरीत परिणाम साथ चलते हैं।
2) होशिया 4:6 — ज्ञान की कमी पर विनाश; नियमों के ज्ञान और पालन का सामाजिक प्रभाव बताती है कि चेतना और आचरण कैसे समाज को बनाते हैं।
3) रोम 6:23 — पापकर्म का वेतन मृत्यु है; यह उद्धृत नहीं किया गया पाठ है, पर यह विचार व्यवस्था-आधारित दण्ड के दायरे को व्याख्या देता है कि दण्ड की धारणा सर्वव्यापी है।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
यह श्लोक स्मरण कराता है कि परमेश्वर के नियमों के अनुरूप जीवन जीना सामाजिक, नैतिक और शारीरिक स्वास्थ्य की सुरक्षा है। यदि किसी ने इन नियमों में गड़बड़ियाँ कीं, तो परिणाम निश्चय ही कठिन होंगे; परन्तु ईश्वर की कृपा से सही सुधार और सत्यापन से समाज फिर से सुरक्षित हो सकता है।
सूचनात्मक उद्धरण (महत्वपूर्ण): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke जैसे पवित्र वचन-टीका से विशिष्ट वाक्यांश नहीं दोहराए गए हैं, परन्तु उनके सामान्य विचार—नियम-पालन की महत्ता, दण्ड का व्यापक प्रभाव, और समाज पर परमेश्वर की नीयत का आकलन—इनमें समाहित हैं।