Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
व्यवस्थाविवरण 1 व्यवस्थाविवरण 2 व्यवस्थाविवरण 3 व्यवस्थाविवरण 4 व्यवस्थाविवरण 5 व्यवस्थाविवरण 6 व्यवस्थाविवरण 7 व्यवस्थाविवरण 8 व्यवस्थाविवरण 9 व्यवस्थाविवरण 10 व्यवस्थाविवरण 11 व्यवस्थाविवरण 12 व्यवस्थाविवरण 13 व्यवस्थाविवरण 14 व्यवस्थाविवरण 15 व्यवस्थाविवरण 16 व्यवस्थाविवरण 17 व्यवस्थाविवरण 18 व्यवस्थाविवरण 19 व्यवस्थाविवरण 20 व्यवस्थाविवरण 21 व्यवस्थाविवरण 22 व्यवस्थाविवरण 23 व्यवस्थाविवरण 24 व्यवस्थाविवरण 25 व्यवस्थाविवरण 26 व्यवस्थाविवरण 27 व्यवस्थाविवरण 28 व्यवस्थाविवरण 29 व्यवस्थाविवरण 30 व्यवस्थाविवरण 31 व्यवस्थाविवरण 32 व्यवस्थाविवरण 33 व्यवस्थाविवरण 34Verse
व्यवस्थाविवरण 28:1 व्यवस्थाविवरण 28:2 व्यवस्थाविवरण 28:3 व्यवस्थाविवरण 28:4 व्यवस्थाविवरण 28:5 व्यवस्थाविवरण 28:6 व्यवस्थाविवरण 28:7 व्यवस्थाविवरण 28:8 व्यवस्थाविवरण 28:9 व्यवस्थाविवरण 28:10 व्यवस्थाविवरण 28:11 व्यवस्थाविवरण 28:12 व्यवस्थाविवरण 28:13 व्यवस्थाविवरण 28:14 व्यवस्थाविवरण 28:15 व्यवस्थाविवरण 28:16 व्यवस्थाविवरण 28:17 व्यवस्थाविवरण 28:18 व्यवस्थाविवरण 28:19 व्यवस्थाविवरण 28:20 व्यवस्थाविवरण 28:21 व्यवस्थाविवरण 28:22 व्यवस्थाविवरण 28:23 व्यवस्थाविवरण 28:24 व्यवस्थाविवरण 28:25 व्यवस्थाविवरण 28:26 व्यवस्थाविवरण 28:27 व्यवस्थाविवरण 28:28 व्यवस्थाविवरण 28:29 व्यवस्थाविवरण 28:30 व्यवस्थाविवरण 28:31 व्यवस्थाविवरण 28:32 व्यवस्थाविवरण 28:33 व्यवस्थाविवरण 28:34 व्यवस्थाविवरण 28:35 व्यवस्थाविवरण 28:36 व्यवस्थाविवरण 28:37 व्यवस्थाविवरण 28:38 व्यवस्थाविवरण 28:39 व्यवस्थाविवरण 28:40 व्यवस्थाविवरण 28:41 व्यवस्थाविवरण 28:42 व्यवस्थाविवरण 28:43 व्यवस्थाविवरण 28:44 व्यवस्थाविवरण 28:45 व्यवस्थाविवरण 28:46 व्यवस्थाविवरण 28:47 व्यवस्थाविवरण 28:48 व्यवस्थाविवरण 28:49 व्यवस्थाविवरण 28:50 व्यवस्थाविवरण 28:51 व्यवस्थाविवरण 28:52 व्यवस्थाविवरण 28:53 व्यवस्थाविवरण 28:54 व्यवस्थाविवरण 28:55 व्यवस्थाविवरण 28:56 व्यवस्थाविवरण 28:57 व्यवस्थाविवरण 28:58 व्यवस्थाविवरण 28:59 व्यवस्थाविवरण 28:60 व्यवस्थाविवरण 28:61 व्यवस्थाविवरण 28:62 व्यवस्थाविवरण 28:63 व्यवस्थाविवरण 28:64 व्यवस्थाविवरण 28:65 व्यवस्थाविवरण 28:66 व्यवस्थाविवरण 28:67 व्यवस्थाविवरण 28:68



व्यवस्थाविवरण 28:27 – संदर्भ में पंक्ति का अर्थ
यह पद व्यवस्थाविवरण की उन पंक्तियों में आता है जहाँ परमेश्वर अनुग्रहपूर्ण आशीषों के साथ-साथ चेतावनियों की आवश्यकता को भी स्पष्ट करते हैं। इस अध्याय में चूँकि इब्राहीमी वाचा के अनुसार इस्राइल के लिए जीवन के शुभ और दुष्कर परिणाम दोनों का निर्देश है, इसलिए यहाँ दिया गया दंड तब आता है जब लोग परमेश्वर की आज्ञाओं पर चलने से हटा लेते हैं। Verse 27 विशेष रूप से शारीरिक रोगों के रूप में शुद्ध दंड का चित्र प्रस्तुत करता है ताकि इस्राइलपति एक नई दिशा अपनाने के लिए प्रेरित हों।
मुख्य अर्थ
यह वाक्य स्पष्ट करता है कि परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों के भीतर विश्वासघात या अविश्वासी चालन के परिणामस्वरूप शारीरिक विकारों को अनुमति देते हैं। मिस्र के अनुभवों और मिसालों के संदर्भ में रोग-दैहिक पीड़ा से व्यक्ति अपनी निर्भरता और ईश्वर के नियमों की महत्ता को समझने लगते हैं। इसका उद्देश्य दंड से अधिक मन को फिर से मोड़ना और ईश्वर के नज़दीक लौटना है।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबंधित पवित्र ग्रंथ—संक्षिप्त.Cross-references
1) वही चेतावनी शब्द अन्य जगहों पर भी लौटते हैं जहाँ रोग या आपदा से समापन में ईश्वर के लिए चित्त परिवर्तन होता है (उदा., लुका-छिपी के साथ वचनानुसार प्रति-उत्तेजना).
2) यहूदियों के ऐतिहासिक अनुभव में बीमारी-उद्धार के साथ परमेश्वर की दयालुता का मिश्रण भी दिखता है—यानी दंड के बीच भी आशा की किरण रहती है।
3) एक समान संदेशन में ईश्वर के कानूनों के लिए समर्पण की महत्त्वपूर्णता उजागर होती है, ताकि बीमारी से निपटना केवल शारीरिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक पुनरुद्धार का भाग बन जाए।
व्यावहारिक चिंतन
आज के पाठक के लिए यह शास्त्र प्रेरणा का स्रोत बन सकता है: जब जीवन में अड़चनें आएँ, तब रोग नहीं, बल्कि आत्मा-ध्यान और परमेश्वर के साथ सम्बन्ध की समीक्षा करें। क्या हम अपने नियंत्रण-आधारित योजनाओं में खोते जा रहे हैं? क्या हम प्रभु की आज्ञाओं पर चलने के लिए इच्छाशक्ति और साहस दिखाते हैं? दण्ड का उद्देश्य अवरोध नहीं बल्कि एक मार्ग है जहाँ हम पूरी तरह से ईश्वर के सामने प्रस्तुत हों।
संक्षिप्त समापन
यह वाक्य एक चेतावनी है कि परमेश्वर के नियमों से बिखरना मनुष्य को शारीरिक, सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से खराब स्थिति में डाल सकता है। पर उससे अधिक यह संदेश देता है कि परमेश्वर की दया में लौटना संभव है जब हम सत्यता के साथ अपने मार्ग की समीक्षा करें और उनसे विनती करें।
क्यों प्रेरक है यह पाठ
यहाँ के दंड से प्रेरित चिंतन, मसीह-पूर्व इतिहास की मिसालों के अनुरूप, परमेश्वर के पवित्र नियमों के प्रति अनुराग और विश्वास की आस्था को मजबूत बनाता है।
नोट: इस पाठ के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे स्वामिभाषी सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों के सार-संयोग को समावेशी रूप से एकीकृत किया गया है। उनके स्पष्ट वाक्यांशों के छोटे अंश नीचे उद्धृत हैं: "यहोवा... ऐसा पीड़ित करेगा" — यह एक चेतावनी-उत्साह दोनों दर्शाता है; "क्योंकि यहूदा का रास्ता निर्भरता से दूर हो गया" आदि रूपक-बोध उसमें मिलते हैं।