Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31



परिशोधन-आवृत्ति: 1 शमोएल 5:6 (हिंदी आयत-संदर्भ) — अश्दोदियों पर परमेश्वर का हाथ
यह पद दिखाता है कि ईश्वर अपने प्रज्वलित न्याय के साथ अश्दोदियों पर कड़ा प्रहार करते हैं। शमोएल की कहानी में अशुद्धि, बुराई और मूर्तिपूजा ने राष्ट्र के भीतर विभ्रम पैदा कर दिया था; परन्तु परमेश्वर की पवित्र शक्ति ने इन्हें नष्ट करने के लिए कदम उठाए। इस पद में यह स्पष्ट है कि ईश्वर अपना शासन स्थापित करते समय असामान्य चमत्कारिक हस्तक्षेप करते हैं, ताकि उनके लोग सुरक्षित रहें और पथभ्रष्ट न हों।
पाद-विश्लेषण (पाठ का संदर्भ)
1 शमूएल 5:6 में कहा गया है कि यहोवा का हाथ अश्दुदियों पर भारी पड़ा, और वे नाश होने लगे; उसने अश्दोद और उसके आस-पास के लोगों के गिलटियाँ निकालीं। यह घटना फिलिस्तीनीय आक्रमणों के समय अश्दोदियों के मूर्तिपूजक आराधनों और साम्राज्य-सम्बन्धी दुष्कार्यों पर दुष्कर प्रतिबिंब है। परमेश्वर अश्दोदियों के ठहाकों को तोड़कर अपनी सत्ता दिखाते हैं और उनके देवताओं की असलियत उजागर होते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
- परमेश्वर की कृपा और न्याय साथ साथ चलता है। जब राष्ट्र मूर्तिपूजा में डूब जाता है, तब ईश्वर कदम उठाकर पवित्रता को पुनः स्थापित करते हैं।
- नेतृत्व और समर्पण की महत्ता: राष्ट्र-नायक यदि परमेश्वर के नियमों से विचलित होते हैं, तो उसी समय दुष्टता का फैलाव होता है; परन्तु यदि नेता ईमानदारी से परमेश्वर की योजनाओं के अनुरूप चलते हैं, तो उसकी सुरक्षा और आशीष रहती है।
अन्य बाइबिल टिप्पणियाँ (संक्षेपित, एकीकृत संदर्भ)
- प्रेरित-पयोग: यह घटना दिखाती है कि परमेश्वर अपने लोग के विरुद्ध की जाने वाली मूर्तिपूजा एवं अत्याचार का कड़ा जवाब देते हैं, ताकि पवित्रता के मानदंड सुरक्षित रहें।
- न्याय और दया का संतुलन: परमेश्वर अश्दोदियों के विरुद्ध न्याय करते हैं ताकि उनकी दुष्ट-नीतियाँ चूक जाएँ और लोगों को सच की राह पर वापस लाया जा सके।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त, परस्पर संबंध स्पष्ट करते हुए)
- यहोवा का हाथ ईश्वर की सत्ता के प्रदर्शन को दिखाता है; अन्य उदाहरणों में प्रभु का दंडीकरण मंदिर-ध्वस्त करने या पतन का कारण बनना भी मिलता है (उद्धृत नहीं, केवल स्थिति-संदर्भ)।
- मूर्तिपूजा के विरुद्ध निंदा और दया—नयायिक परिणाम और फिर पश्चात्ताप के माध्यम से परमेश्वर की उद्धार-योजना की पुष्टि होती है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षेप-सार
1 शमूएल 5:6 यह दर्शाता है कि परमेश्वर अपने अद्भुत राज्य-स्वामित्व को दिखाते हैं जब लोग मूर्तिपूजा और दुष्कर्म में डूब जाते हैं। उनके हाथ का भारीपन एक चेतावनी है कि पवित्रता, न्याय और उद्धार की राह में ढीलेपन नहीं चलेगा। प्रेरणा के लिए यह पाठ हमें याद दिलाता है कि ईश्वर के सामने रुख स्पष्ट, और जीवन में सत्य-न्याय की मांग उच्च रखनी चाहिए।
मुख्य उद्धृत अंश (संदर्भ-उद्धरण): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के स्पष्ट शब्द-सार उपलब्ध होते हैं, परंतु यहाँ पूर्ण पाठ से संक्षेपित अभिव्यक्ति को ही उद्धृत किया गया है।