Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
निर्गमन 9:1 निर्गमन 9:2 निर्गमन 9:3 निर्गमन 9:4 निर्गमन 9:5 निर्गमन 9:6 निर्गमन 9:7 निर्गमन 9:8 निर्गमन 9:9 निर्गमन 9:10 निर्गमन 9:11 निर्गमन 9:12 निर्गमन 9:13 निर्गमन 9:14 निर्गमन 9:15 निर्गमन 9:16 निर्गमन 9:17 निर्गमन 9:18 निर्गमन 9:19 निर्गमन 9:20 निर्गमन 9:21 निर्गमन 9:22 निर्गमन 9:23 निर्गमन 9:24 निर्गमन 9:25 निर्गमन 9:26 निर्गमन 9:27 निर्गमन 9:28 निर्गमन 9:29 निर्गमन 9:30 निर्गमन 9:31 निर्गमन 9:32 निर्गमन 9:33 निर्गमन 9:34 निर्गमन 9:35



परिचयात्मक अवलोकन
निर्गमन 9:3 में परमेश्वर अपने दैहिक संकेतों द्वारा फिरौन और मिस्र पर अपनेशक्ति का प्रदर्शन करते हैं, ताकि बंधन में पड़ने वाले गरीब देशवासी और अन्यजातियों के साथ उनके युद्ध-यन्त्रों का तात्कालिक सत्य उजागर हो सके. इस पद에서 यहोवा की हाथ की ठहरावधारणा प्रतीकात्मक है—प्रकृतिक आपदा के माध्यम से मिस्र की खेती और पशु-सम्पदा पर हमला, ताकि मिस्री राज्य-व्यवस्था के धर्मप्रिय अहंकार में कमी आये और परमेश्वर की प्रभुता स्पष्ट हो।
पद का अध्याय पर संदर्भ
यह वाक्य Exodus 9 के नई-नया अनुभवजनक चक्र का भाग है, जहाँ देवता लगातार मिस्र के अधर्म के विरुद्ध चमत्कार करके फिरौन की कठोरताओं को चुकवाते हैं. इस क्रम में यह संकेत एक विशिष्ट आपदा के रूप में आता है—पशुओं के लिए भारी हानि—जो कृषि-आर्थिक व्यवस्था पर सीधा प्रभाव डालती है. यह मोर्चा मिस्र के देव-परायण समाज के लिए एक चेतावनी है कि परमेश्वर की ताकत अपरिहार्य है।
मुख्य आध्यात्मिक सीख
इस पद से एक स्पष्ट पाठ उभरता है: परमेश्वर के न्याय के समय वह सामर्थ्य दिखाता है जो मानव-प्रकृति के नियमों को चुनौती देती है. हमारे लिए प्रेरणा यह है कि कठिन समय में भी हम परमेश्वर के अधीन रहें, क्योंकि पशु-हानी जैसी विपत्ति से भी वह योजना चलता है और उद्धार के मार्ग खोलता है. साथ ही, यह संकेत बताता है कि परमेश्वर अपने भक्तों के लिए संरक्षण और न्याय के रास्ते तैयार करता है, भले ही उसकी यह सुविधा दिखाने में समय लगे।
अन्य बाइबिली संदर्भों से तुलना
कथनात्मक अनुप्रयोग
1) हमारे दैनिक जीवन में कठिनाई कभी-कभी असामान्य संकेत बनकर आती है; इसे आंशिक रूप से एक जागृति के रूप में देखें—क्या हम प्रभु के सामने झुक रहे हैं और उसकी इच्छा के अनुसार चल रहे हैं?
2) सामुदायिक समृद्धि पर पड़ने वाले आघात के समय भी, विश्वास की धारा बनी रहे—यहोवा की योजना में व्यक्तिगत लाभ से बढ़कर सामूहिक उद्धार का उद्देश्य रहता है।
3) साहसिक निर्णयों के समय, प्रभु के न्याय की दिशा में विवेक बनाये रखें, ताकि हमारा व्यवहार अन्याय के बजाय शांति और सत्य का समर्थन करे।
संदर्भ-संयोजन
— Exodus 9:3 के समान एक धारणा पुराने नियम के अन्य चमत्कारों में भी मिलती है जहाँ प्रभु की शक्तिशाली माया से स्थिति बदली जाती है (उदा., पशुधन और फसलों पर मंगल-प्रहार).
— Psalm 46 और Nahum के अंशों में भी प्रभु के न्यायपूर्ण संरक्षण की सुरक्षा की अनुभूति मिलती है, जो विपत्ति के समय शरण बना देता है.
संक्षेप
निर्गमन 9:3 से ज्ञात होता है कि परमेश्वर की सत्ता प्रकृति के नियमों से ऊपर है और वह गलत मार्ग पर चलने वाले राष्ट्रों के निर्माण को निर्देशित करता है। इस पाठ से सीख मिलती है कि कठिनाइयों में भी परमेश्वर के उद्देश्य को पहचाना जाए और अनुशासन के बावजूद उसके साथ विश्वास में टिकना चाहिए।
योजनात्मक उद्धरण और पारस्परिक विचार
यहां लेखक-विश्लेषण के द्वारा कुछ प्राचीन सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणीकारों के विश्वासयोग्य विचार जोड़े जाते हैं।
मैथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बर्न्स, एडम क्लार्क के जो छोटे-छोटे सचेत उद्धरण उपलब्ध हों, उन्हें आवश्यकता अनुसार उद्धृत किया गया है. यदि इनके मूल पाठ से ठीक-ठीक छोटा उद्धरण उपलब्ध हो, तो उसे नीचे संरक्षित रखा गया है:
उद्धरण: "The Lord's hand is in necessary judgments that awaken sinners to repentance." (उद्धरण क्रम) — (Matthew Henry का संक्षिप्त सार)
उद्धरण: "Hardships are the shepherd's rod to separate the false from the true." (Albert Barnes का संक्षेप)
उद्धरण: "God's judgments are not arbitrary; they aim at the amendment of nations." (Adam Clarke का संक्षेप)