Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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निर्गमन 9:18—स्थिति का उद्घाटन और संदेश
इस वचन के अनुसार परमेश्वर मिस्र के लोग और उनके राजा पर कड़ा निर्णय लेकर वही-सा भयंकर बाण चलाने जा रहे हैं—ऐसी स्थितियाँ जिन्हें देखने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि परमेश्वर की शक्ति और निर्देश कितने निर्णायक हैं। यह वचन परमेश्वर की चेतावनी और न्याय दोनों को एक साथ प्रस्तुत करता है: वह समय आ गया है जब वह ऐसी प्रकम्पनकारी घटनाओं के द्वारा अपना स्वरूप दिखाता है कि संहारकारी शक्ति भी उसकी अनुमति से चलती है।
ईश्वर की सत्ता और विश्वास पर इसका क्या संकेत है
यह पाठ स्पष्ट करता है कि परमेश्वर ने मिस्र के राजा और उसके देश पर शासन किया है—उसने अत्याचार के समय में भी अदृश्य सुरक्षा-रेखा को नहीं छोड़ना। भयभीत करने वाले ओले और भारी आंधियाँ स्वर्गीय नियंत्रण के अधीन हैं; वे तब ही आते हैं जब ईश्वर को ठीक वही आवश्यकता समझ में आ जाए। यह उद्धार की राह में विश्वासयोग्यता और निर्भयता दोनों को प्रशिक्षित करता है—کہ परमेश्वर अपने लोगों की रक्षा के लिए जटिल संघर्षों से भी गुजरता है और उसे उनके लिए सबसे बुरे हालात में भी उपयुक्त मार्ग दिखता है।
महत्वपूर्ण शब्दों और छवि-संकेतों की व्याख्या
अन्य उपदेशक-उद्धरण से संकेत
यहां न तो संपूर्ण उद्धरण पाया जाता है, न ही विधान-रस से जुड़ी लंबी दलीलों की ज़रूरत है, पर पवित्र लेखन के भरोसे के साथ, पुराने टिप्पणीकारों ने यह स्पष्ट किया है कि परमेश्वर का निर्णय और उसके दया के साथ अनुशासन एक साथ चलते हैं।
अन्य प्रासंगिक पाठ
कुछ संबंधित संदर्भ जो इस पठ के साथ विचार कर सकते हैं: निर्गमन 7–11 में मिस्र पर निरंतर आघात और चेतावनियाँ; व्यवस्थावली 32 में न्याय की परिभाषा; यहोशू 10 में परमेश्वर की अद्भुत शक्ति की अनुभूति। नोट करें कि ये क्रियात्मक रूप से पाठक को यह समझाते हैं कि परमेश्वर कैसे अपने लोगों के लिए न्याय करते हैं और कैसे प्रकृति पर नियंत्रण रखते हैं।
आज के पाठ पर लागू तात्पर्य
क्लोजिंग विचार
निर्गमन 9:18 हमें यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर की योजना कभी-कभी हमारी समझ के बाहर कठोरता लेकर आती है, पर इसका उद्देश्य मानव की चेतना को जागृत करना और उसकी कृपा के मार्ग को स्पष्ट करना है। भरोसे के साथ आगे बढ़ें, क्योंकि प्रभु की शक्ति अद्भुत और उसकी रक्षा अटूट है।
क्रॉस-रेफरेंसेस
1) निर्गमन 7–11: मित्र-राजी और दंड की घटनाओं का क्रम; यह दिखाता है कि कैसे परमेश्वर अपने लोगों के लिए चोट-भर घटनाओं के बीच मार्ग बनाते हैं।
2) यशायाह 28:22: प्रमाणीकरण और चेतावनी में संतुलन—न्याय और कृपा दोनों का मेल।
3) दान 2:11–13: ईश्वर की समयसूची और निर्देशात्मक संकेत जो मानव इतिहास में उनका उद्देश्य स्पष्ट करते हैं।