Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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निर्गमन 9:5 पर नज़र: हैं यह समय और संकेत क्या कहते हैं
यह अयोध्या-सी भांति नहीं है; यहोवा के दया-नियम और न्याय के बीच एक कालखंड का संकेत है। निर्गमन 9:5 में पुत्र-निदर्शन का वह भाग आता है जहाँ योजनाबद्ध दुःखों के अवसर पर यहोवा अपने निर्णय की स्पष्टता से बताता है कि अगला चक्र कब और कैसे पूरा होगा। इस वचन का महत्व यह है कि यह प्रभु की सत्ता और समय-सारिणी की भरोसेमंदता को दिखाता है।
परिप्रेक्ष्य: प्रकरण और संदेश
इस अध्याय में मिस्र के राजा और देश के जन मुस्लिम नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से मिस्र के ऊपर आने वाले दोषों के बारे में है। यहोवा ने प्राकृतिक çेज़-घटनों के माध्यम से मिस्र के दमन और पूजा-विधानों पर जवाब माँगा, ताकि बंधन में चूका हुआ विश्व यहोवा के विरुद्ध अपनी निर्बलता समझ सके। इस संदेश में एक निर्धारित समय के साथ संकेत दिए गए हैं कि कब कैसे अगला चरण लिया जाएगा।
मूल संदेश: समय का फैसला, धरती पर पालन
“मैं यह काम इस देश में कल करूँगा।” यह कथन समय-सीमा को स्पष्ट करता है। परमेश्वर किसी अंजाम को बिना सूचना नहीं देता; वह अपने निर्णयों में क्रम बनाए रखता है ताकि धैर्य और विश्वास से विश्वासयोग्य लोग सजग रहें और अन्याय के विरुद्ध दया से दमनाओं के लिए भी तैयार रहें। यह उद्धार की प्रक्रिया में एक पीस-सी परछाईं है: बुरा समय आते समय भी परमेश्वर अपनी योजना के अनुसार कार्य करता है और इससे लोगों को चेतावनी मिलती है।
मुख्य विषय और समान दिशा
क्रॉस-रेफरेंस (छोटे संकेत) और उनका सार
1) यूहन्ना 5:19-20 की तरह, यह दर्शाता है कि सत्ता और सत्य परमेश्वर के नियंत्रण में है; आधारभूत नियंत्रण और न्याय के लिए सतर्कता आवश्यक है।
2) पूर्व के आशीर्वचन में भी ऐसे समय आते हैं जब मिस्र-ज्यों दमन के खिलाफ ईश्वर की शक्ति स्पष्ट होती है, जिससे विनम्रता और भक्ति बढ़ती है।
3) हबक्कूक के अंदाज़ में भी यह देखा जा सकता है कि परमेश्वर अपने समय के अनुसार काम करता है, और समर्थ विश्वासियों को धैर्य प्रदान करता है।
ऐतिहासिक-आध्यात्मिक सूत्र
यह वाक्य पुराने नियम के कठोर समय की स्मृति कराता है—जब लोग पाप की कठोरता में रहते थे और एक दिव्य उद्धार की प्रतीक्षा थी। फिर भी यहोवा की कथा में दया और न्याय के सरल, स्पष्ट संकेत मिलते हैं: समय आता है, निर्णय होता है, और फिर जीवन पुनः जागृत होता है।
संक्षिप्त devotional मार्गदर्शन
हर समय के साथ एक नया अवसर जुड़ता है। जब आपको लगता है कि परिस्थितियाँ अत्यधिक कठिन हो गईं, तब यह वचन स्मरण दिलाता है कि प्रभु अपना समय ठीक जानता है। अपने दैनिक निर्णयों में—धैर्यपूर्वक प्रार्थना करें, अन्याय के विरुद्ध साहस दिखाएं, और विश्वास करें कि यदि वह कल का कदम निर्धारित करता है, तो वह आज आपकी राह भी ठीक करेगा।
समाप्त विचार
इस वचन का केंद्र यह है कि परमेश्वर का वचन और समय एक साथ चलते हैं ताकि दया, न्याय और उद्धार की कहानी आगे बढ़े। यह एक चेतावनी नहीं, बल्कि मार्गदर्शक प्रकाश है जो विश्वासियों को आशा देता है कि आगे क्या होगा, यह परमेश्वर के हाथ में है।