Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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निर्गमन 9:21 परमुख interpretive बिंदु
यहोवा के शब्दों पर आस्था के बिना, जिन्होंने अपने मन से निर्णय किया कि वे Vermittlung नहीं करेंगे, वे सत्ता के नियमों से परे जाकर अपने सेवकों और पशुओं को मैदान में छोड़ते हैं। यह आयत स्पष्ट करती है कि जातीय दंगा-रोष और दास-उद्धार के लिए मानव विवेक कितनी बार विरोधी हो सकता है; वही लोग जो प्रभु के निर्देशों को अनसुना करते हैं, वे अपनी सुरक्षा और समृद्धि को जोखिम में डालते हैं।
पाठ-संदर्भ का literaryContext
यह निषेधात्मक घटना मिस्र के कठोर शासन के बीच आता है, जब अग्नि, बारिश, और अन्य आपदाओं के क्रम के बीच स्प्ष्ट चेतावनी दी जा रही है। जिस वचन-आचरण का इशारा है, वह प्रामाणिक है कि जो लोग भय या शंका से परे नहीं जाते, वे अपने और अपने परिवार के लिए खतरे को न्योता देते हैं। पुराने नियम में बार-बार दिखता है कि विश्वास रखने वाले लोग सुरक्षित रहते हैं; जो नहीं मानते, वे परिणाम भुगतते हैं।
तेहकील/Theological significance
इस आयत में प्रभु की सार्वभौमिकता और लोक-न्याय का संतुलन उभर कर आता है। यह ध्यान दिलाता है कि प्रभु के आदेश में धार्मिक-आचरण एक नैतिक सुरक्षा-बंधन है—जिन्होंने प्रभु के निर्देशों को नहीं माना, वे अपनी दुनिया को खतरे में डालते हैं। यह भी बताता है कि मानवीय विवेक एक परमेश्वर-निर्णय नहीं तोड़ सकता; जब परमेश्वर की बात स्वीकार नहीं की जाती, तो परिणाम प्राकृतिक परिणामों के रूप में सामने आते हैं।
Cross-reference connections
प्रेरणा से पूछने योग्य प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
निर्गमन 9:21 यह स्मरण कराता है कि ईश्वर के वचनों पर दृढ़ता से चलना जीवन को सुरक्षित और संदर्भ-उन्नत बनाता है। जो लोग निष्ठा नहीं अपनाते, वे अपने समाज के लिए जोखिम खड़ा कर देते हैं। यह आयत विश्वास के महत्व औरobedience के परिणामों के बीच संतुलन प्रस्तुत करती है, और पवित्र-निर्देशों के अनुसार जीवन जीने की प्रेरणा देती है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (public-domain commentators): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke द्वारा सम्मिलित विश्लेषण में यह बात उभरती है कि मन के निर्णय की स्वतंत्रता के बावजूद, प्रभु की ओर से आदेश-पालन ही सुरक्षा और आशीष लाता है; यदि किसी ने कठोर चेतावनियों के बावजूद टाल दिया, तो परिणाम स्पष्ट होते हैं।
नीचे दिए गए क्रॉस-रेफरेंस से आप देखेंगे कि विश्वास-आचरण और परिणामों के बीच संबंध पुराने नियम के अन्य हिस्सों में भी गहराई से चित्रित है।