Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31



मुख्य विचार
1 शमूएल 5:11 में पलिश्तियों के प्रमुख पुरुषों का विस्मयकारी भय सामने आता है: परमेश्वर की सन्दूक के कारण उनके नगरों में मौत का भय छा गया और वे यह समझते हैं कि परमेश्वर के हाथ का भारी प्रभाव नीति-नियमों के बावजूद उन पर है। यह नहीं केवल एक इतिहासिक घटना है, बल्कि यह दिखाता है कि परमेश्वर की शक्ति किसी सीमा में नहीं बाँधी जा सकती और उसका निर्देश मानने से ही सत्ताधारी लोग भी निर्भय होते हैं या भयभीत होते हैं।
सर्वपरिवर्तक साहित्यिक संदर्भ
कथा का केंद्र है परमेश्वर की सन्दूक के साथ-साथ पलिश्तियों की अस्थिरता। एक साथ कई नगरों में भय और प्रलयकारी परिणाम दिखते हैं, जो कि परमेश्वर के सन्दूक के प्रभाव का प्रत्यक्ष संकेत है। यह भाग पुराने नियम के उस ध्वनि-आवेग का प्रतिनिधित्व करता है जहां नये तरीकों से परमेश्वर की सत्ता स्पष्ट होती है—लोग उस सत्ता के सामने विवश हो जाते हैं, चाहे वे आदरणीय सैन्य पदाधिकारी हों या अन्य।
थियोलॉजिक महत्व
यह दृश्य दिखाता है कि परमेश्वर की पवित्रता और उसकी महिमा किसी भी मानवीय महत्वाकांक्षा से उच्च है। पलिश्ती सरदारों की यह धारणा कि “आओ, इस्राएल के देवता के सन्दूक को निकाल दें” से एक गहन साक्षात्कार निकलता है—सन्दूक नहीं एक इशारा है, परमेश्वर की उपस्थिति वह वास्तविक शक्ति है जिसकी सुरक्षा उनके लिए आकाश से भी बड़ी है या खतरे से भी आगे है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के साथ विचरण करने वाले लोगों के लिए सतर्कता और पवित्रता कितनी आवश्यक है।
पश्चिमी और भारतीय टिप्पणीकारों के संक्षेप संदर्भ
एंटोनियम के बराबर, Matthew Henry का विचार है कि परमेश्वर का आकाशीय शासन यहां व्यक्तिगत सुरक्षा से परे है; उसका उद्देश्य इमानदारी और समर्पण को परखना है। Albert Barnes कहते हैं कि सन्दूक के साथ इस्राएल के परमेश्वर की उपस्थिति पलिश्ती नगरों में भीषण परिणाम लाती है—यह संकेत है कि परमेश्वर अपने लोक के लिए न्याय भी रखते हैं। Adam Clarke इस दृश्य को परमेश्वर की पवित्रता के अनुरूप एक चेतावनी के रूप में देखते हैं कि परमेश्वर के साथ सम्बन्ध बनाना परमेश्वर के निर्देशों के अनुसार होना चाहिए, नहीं तो परिणाम भयावह होंगे। इन्हीं प्रविधानों के साथ 1 शमूएल में आगे बढ़ना दर्शाता है कि परमेश्वर की महिमा और सत्ता के सामने मानव सुरक्षा कितनी अस्थिर है।
जीवंत क्रॉस-रेफरेंस
संक्षेप में, सन्दूक के सार में परमेश्वर की सत्ता और पवित्रता के प्रति मानव दायित्व का संदेश है: भयभीत न हों, परन्तु व्यवहार में श्रद्धा, आत्म-नियमन और धर्म-अनुशासन बनाए रखें।
प्रतिबिंब के लिए कुछ प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
1 शमूंएल 5:11 इस बात का संकेत है कि परमेश्वर की महिमा और उसकी पवित्रता मानवीय योजनाओं से ऊपर है। पलिश्तियों के भय और नगरों में फैले मौत के भय से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के साथ संगति रखना ही जीवन की प्राथमिक रक्षा है।