Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
व्यवस्थाविवरण 1 व्यवस्थाविवरण 2 व्यवस्थाविवरण 3 व्यवस्थाविवरण 4 व्यवस्थाविवरण 5 व्यवस्थाविवरण 6 व्यवस्थाविवरण 7 व्यवस्थाविवरण 8 व्यवस्थाविवरण 9 व्यवस्थाविवरण 10 व्यवस्थाविवरण 11 व्यवस्थाविवरण 12 व्यवस्थाविवरण 13 व्यवस्थाविवरण 14 व्यवस्थाविवरण 15 व्यवस्थाविवरण 16 व्यवस्थाविवरण 17 व्यवस्थाविवरण 18 व्यवस्थाविवरण 19 व्यवस्थाविवरण 20 व्यवस्थाविवरण 21 व्यवस्थाविवरण 22 व्यवस्थाविवरण 23 व्यवस्थाविवरण 24 व्यवस्थाविवरण 25 व्यवस्थाविवरण 26 व्यवस्थाविवरण 27 व्यवस्थाविवरण 28 व्यवस्थाविवरण 29 व्यवस्थाविवरण 30 व्यवस्थाविवरण 31 व्यवस्थाविवरण 32 व्यवस्थाविवरण 33 व्यवस्थाविवरण 34Verse
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व्यवस्थाविवरण 30:12 का संदर्भ और अर्थ
पद्य स्पष्ट करता है कि नियमों, आशीषों और वीतियाँ ऐसे उपलब्ध हैं, जो मानव से सन्निकट हैं—न आकाश में, न समुद्र के पार, न दूर किसी पर्वत शिखर पर जिन्हें ढूंढ़ना पड़े। परमेश्वर की इच्छा है कि इस्राइल के लोग उसे अपने हृदय से जानें, मानें और पालन करें। यह परमेश्वर-प्रदाता वचन की सुलभता को दर्शाता है; यह कहता है कि पत्री-शास्त्र और शिक्षा हमारे भीतर हैं, ताकि सीधे कदमों के लिए मार्ग मिल सके।
मुख्य अर्थ
यह verse बताता है कि परमेश्वर की व्यवस्था, नियम और उद्धार-योजना इतनी नजदीक है कि उसे पाने के लिए कठिन खोज की आवश्यकता नहीं। यह आकाश-झुकाव या दूरी-खोज की स्थिति नहीं है, बल्कि सरलता और पहुँच दोनों की बात है: विवेकपूर्ण मान्यता और आत्म-समर्पण से आत्मा-परामर्श संभव है।
2–3 मुख्य विषय
Related passages (संकेत पथ)
संयोग रूप से इस विचार को और स्पष्ट करने वाले अन्य प्रमाण ये हैं:
व्यावहारिक चिंतन
हम कैसे इस उपलब्धता को अनुभव करें? पहले, दैनिक निर्णयों में परमेश्वर के वचन को मानकर चलना। दूसरे, जब आत्मा प्रेरित करे तो तत्काल आचरण में पवित्र-जीवन को आगे बढ़ाना। तीसरे, कठिनाइयों में भी भरोसा रखें कि परमेश्वर की इच्छा स्पष्ट है और वह हमारे साथ है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पद हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की वाणी और उसकी व्यवस्था हमारे पास ही हैं—कम दूरी पर, सरल तरीके से, यदि हम मन से उसे अपनाते हैं। हमारे जीवन में प्रगट होते हुए, यह दृश्य हमें गहराई से यह सिखाता है कि विश्वास-सम्मत आचरण के लिए दूर-दूर तक खोज करने की आवश्यकता नहीं है; प्रभु की योजना सीधे हमारे भीतर पहुँचती है, जीते-जागते रिश्ते के रूप में।
महत्वपूर्ण उद्धरण (संदर्भित प्रभाव)
यद्यपि नीचे पूर्ण पाठ नहीं दिए गए, परन्तु मार्था हेन्री, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के पुराने-समय के टिप्पणीकारों ने इसे ऐसी सहज उपलब्धता के रूप में समझाया है कि मानव-जीवन में आस्था और आज्ञा नजदीक ही रहती है, न कि मायावी दूरियों में।