व्यवस्थाविवरण 5:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

'तू किसी के विरुद्ध झूठी साक्षी न देना। (लूका 18:20)

व्यवस्थाविवरण 5:20 पद-दर-पद बाइबल टीका

reader-friendly overview

व्यवस्थाविवरण 5 में दायित्वों की सूची के साथ, यह आयत निष्पक्ष और सत्य बोलने की कसौटी प्रस्तुत करता है। परमेश्वर ने यह स्पष्ट किया है कि हमारे शब्दों की सच्चाई और निष्पक्ष भावना समाज में न्याय का आधार हैं। यह आयत सीधे तौर पर झूठी साक्षी देने से मना करती है, ताकि दूसरे के विरुद्ध अत्युक्ति या दुरुपयोग न हो सके। यीशु मसीह के वेदांतों से जुड़कर यह दिखाता है कि ज्ञान और वचन की सत्यता परमेश्वर के चरित्र के अनुरूप है, और हमारे रिश्तों में निष्पक्षता को बढ़ावा देती है।

Verse in its chapter

यह नियम मक्का-हाथ में मूर्तिभंजक कानूनों के बीच आने वाले न्यायप्रिय संकल्प का हिस्सा है, जो समाज में गवाह के तौर पर सच्चे शब्द spoken करने की मांग करता है। “तू किसी के विरुद्ध झूठी साक्षी न देना” एक साफ निर्देश है कि भरोसे और सत्यता के बिना समाज टकराव और नरमी खो देता है।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

सत्य बोलना सिर्फ कानून का पालन नहीं, बल्कि दिल की ईमानदारी है। जब हम झूठ बोलते हैं, तो सामने वाले के साथ विश्वास टूटता है और समाजिक व्यवस्था अस्थिर होती है। सत्य की रक्षा करते हुए हम परमेश्वर के प्रति भी सचोट रहते हैं। लूकास 18:20 के संदर्भ में यह भी संकेत देता है कि परमेश्वर के नियमों के अनुरूप जीवन छोटे-छोटे विवरणों से शुरू होता है—यही हमारे चरित्र की परीक्षा है।

अनुशासनात्मक तुलना

- हिनिर्व अनुवाद में यह आयत सीधे कहती है, “तू किसी के विरुद्ध झूठी साक्षी न देना।”

- Matthew Henry: सत्य के बिना नैतिक रीति-रिवाज खो जाते हैं; ईमानदारी और न्याय का आधार सत्य है।

- Albert Barnes: साक्षी देने की जिम्मेदारी एक सामाजिक संरचना की सुरक्षा है; झूठे गवाह से रिश्ते और कानून दूषित होते हैं।

- Adam Clarke: यह नियम व्यक्तिगत आचार का प्रमाण है—हर शब्द हमारे आंतरिक चरित्र की एक झलक है।

संभावित टेकअवे और व्यवहारिक अनुप्रयोग

  • अपनी बताई बातों की सत्यता पर विचार करें—झूठ तब तक न बोलें जब तक यह आवश्यक न हो।
  • जब आप किसी के विरुद्ध झूठी साक्षी देने के दबाव में हों, तो सत्य बोलना ही सबसे उत्तम मार्ग है।
  • रिश्तों में विश्वास बनाए रखने हेतु हर परिस्थिती में स्पष्ट और दायित्वपूर्ण बोली अपनाएं।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त व्याख्या)

1) वाह्य सत्य के लिए अन्याय से बचना: पुराने नियम में सच्चाई की मांग सामाजिक व्यवस्था को मजबूत बनाती है।

2) लूका 18:20 की तुलना: यीशु ने नियमों के सार पर बल दिया—यह हृदय में परमेश्वर के चहिए जाने वाले आचरण का प्रमाण है।

3) परमेश्वर के चरित्र पर निर्भरता: सत्यता से जुड़ी प्रेरणा हमारे व्यवहार को ईश्वर के समान बनाती है।

संक्षेप

तू किसी के विरुद्ध झूठी साक्षी न देना स्मृति-स्तंभ है कि समाज, विश्वास और व्यक्तिगत चरित्र सत्य पर टिका रहता है। यह नियम केवल कानून के अनुरोध नहीं, बल्कि हर शब्द के पीछे के आह्वान हैं कि हम ईमानदार, न्यायप्रिय और भरोसेमंद नागरिक बनें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

व्यवस्थाविवरण 5:20 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

निर्गमन 20:16 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
निर्गमन 20:16 (HINIRV) »
“तू किसी के विरुद्ध झूठी साक्षी न देना।

निर्गमन 23:1 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
निर्गमन 23:1 (HINIRV) »
“झूठी बात न फैलाना। अन्यायी साक्षी होकर दुष्ट का साथ न देना।

नीतिवचन 19:9 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
नीतिवचन 19:9 (HINIRV) »
झूठा साक्षी निर्दोष नहीं ठहरता, और जो झूठ बोला करता है, वह नाश होता है।

व्यवस्थाविवरण 5 (HINIRV) Verse Selection

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें