Old Testament
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सभोपदेशक 11:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हे जवान, अपनी जवानी में आनन्द कर, और अपनी जवानी के दिनों में मगन रह; अपनी मनमानी कर और अपनी आँखों की दृष्टि के अनुसार चल। परन्तु यह जान रख कि इन सब बातों के विषय में परमेश्वर तेरा न्याय करेगा।
सभोपदेशक 11:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सभोपदेशक 11:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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सभोपदेशक 12:14 (HINIRV) »
क्योंकि परमेश्वर सब कामों और सब गुप्त बातों का, चाहे वे भली हों या बुरी, न्याय करेगा। (2 कुरिन्थियों. 5:10)

1 यूहन्ना 2:15 (HINIRV) »
तुम न तो संसार से और न संसार की वस्तुओं से प्रेम रखो यदि कोई संसार से प्रेम रखता है, तो उसमें पिता का प्रेम नहीं है।

सभोपदेशक 3:17 (HINIRV) »
मैंने मन में कहा, “परमेश्वर धर्मी और दुष्ट दोनों का न्याय करेगा,” क्योंकि उसके यहाँ एक-एक विषय और एक-एक काम का समय है।
सभोपदेशक 11:9 — युवावस्था के आनन्द और परमेश्वर का न्याय
इस पद में संदेश है कि युवाओं को अपनी जवानी का आनंद लेना चाहिए, लेकिन इसे अपनी इच्छा-स्वेच्छा से, अपनी आँखों की चाह के अनुसार नहीं, बल्कि सचेत रूप से परमेश्वर के मानदंडों के साथ संगत रखना चाहिए। लेखक कोल्हू-सी कोशों में जीवन के अस्थिरपन को दिखाते हुए कहता है कि जीवन का जोश और मगनपन एक वास्तविक अवसर है, पर उसमें आत्म-नियंत्रण और अंततः परमेश्वर के न्याय का विचार होना अनिवार्य है।
मुख्य विचार
यह आयु-वर्ष विशेष के लिए एक प्रेरक चेतावनी है कि युवा समय का लाभ उठाते हुए खुशी-खुशी जीना चाहिए, पर तुष्टि-आतुरता और बिना-सोचे-समझे आचरण से बचना चाहिए। परमेश्वर हर बात का न्याय करेगा, इसलिए मन-चाहा आनंद और आँखों की दृष्टि के अनुरूप चलना, अकर्मण्यता नहीं, बल्कि नैतिक विवेक के साथ किया जाना चाहिए।
दो‑तीन मुख्य विषय
संबद्ध विषय-आधार
1) अन्य बाइबल वृत्तान्तों में युवा-जीवन के आनंद का धर्मशास्त्र: शब्द-उत्साह और संयम के साथ जीवन का भरपुर उपयोग।
2) जीवन के क्षणभंगुरता पर सतर्कता: धनी-लम्बी आयु नहीं, बल्कि परमेश्वर के नियमों के अनुसार जीना महत्त्वपूर्ण है।
3) न्याय का कारण-विराम: ईश्वर जो देखता है, वही परिणाम बनता है; हमारी आज की सहजता का अंतिम दर्ज़ा परमेश्वर के विनियमन में है।
व्यावहारिक मनन
युवा पाठक अपनी खुशी को दायरे में बांधे रखें—परमेश्वर की महिमा के अनुसार हर निर्णय लें। आनंद सही दिशा में चले, जब तक वह आत्म-समर्पण, विनम्रता और प्रेम के साथ हो। अपनी आँखों के आकर्षण पर-वश न हों; दोस्ती, समय-नियोजन और लक्ष्य-सत्यापन से जीवन को सुदृढ़ बनाएं।
संदर्भ-चर्चा
• सभोपदेशक 3:12-13 — समय और संतोष का उद्देश्य: जीवन के अवसरों में संतोष का अनुभव।
• स्तोत्र 37:4 — परमेश्वर में आनंद पाने पर मार्गदर्शन और आंतरिक खुशी।
• याकूब 4:14 — जीवन क्षणभंगुर है; वह परमेश्वर के हाथ में है, इसलिए मन को नम्र रखो।
संक्षिप्त समेकन
11:9 युवाओं को आनंद का आह्वान देता है, पर वह उसी समय चेतावनी भी देता है कि उन अद्भुत पलों में परमेश्वर के न्याय को नहीं भूला जाना चाहिए। संतुलन, विवेक और ईश्वर-भक्ति से ही जवानी का असली लाभ मिलता है—खुशी तथा धर्मीय गहराई दोनों को एक साथ सँजोना।
कहानी-सीधा प्रभाव
युवा व्यक्ति अपने लक्ष्य स्पष्ट रखें, मगर हर कदम पर परमेश्वर की इच्छा को याद रखें। यह शिक्षा महत्त्वपूर्ण है—आनंद के साथ-जागरूकता और दायित्व का भी संयम बनाए रखना।
कृत्यों के इर्द-गिर्द प्रेरणा: मैथ्यू हेनरी, अलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरेक्ट विचारों के शब्द—यहाँ संक्षेप में समाहित हैं—
• “युवा अवस्था में आनंद लेने का अधिकार है, पर उसकी सीमा भी परमेश्वर ही निर्धारित करता है।” (मैथ्यू हेन्री)
• “सब कुछ के प्रति संतुलन बनाए रखना चाहिए—आनंद और संयम दोनों।” (एल्बर्ट बार्न्स)
• “जीवन की दौड़ अस्थायी है; समय और मौके के साथ तारतम्य बनाए रखना चाहिए।” (एडम क्लार्क)
उद्धृत संक्षेपण नोट: ऊपर दिए गए उपन्यास-उद्धरण पाठ के भीतर से चुने गये छोटे पंक्तिबद्ध संकेत हैं।