Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीसभोपदेशक 11:10 बाइबल पद की व्याख्या
सभोपदेशक 11:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अपने मन से खेद और अपनी देह से दुःख दूर कर, क्योंकि लड़कपन और जवानी दोनों व्यर्थ हैं*।
सभोपदेशक 11:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
सभोपदेशक 11:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

2 कुरिन्थियों 7:1 (HINIRV) »
हे प्यारों जब कि ये प्रतिज्ञाएँ हमें मिली हैं, तो आओ, हम अपने आप को शरीर और आत्मा की सब मलिनता से शुद्ध करें, और परमेश्वर का भय रखते हुए पवित्रता को सिद्ध करें।

सभोपदेशक 1:14 (HINIRV) »
मैंने उन सब कामों को देखा जो सूर्य के नीचे किए जाते हैं; देखो वे सब व्यर्थ और मानो वायु को पकड़ना है।

2 तीमुथियुस 2:22 (HINIRV) »
जवानी की अभिलाषाओं से भाग; और जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं, उनके साथ धार्मिकता, और विश्वास, और प्रेम, और मेल-मिलाप का पीछा कर।
सभोपदेशक 11:10 - पाद टिप्पणी
परिस्थितीय संदर्भ: सभोपदेशक के इस संदेश में लेखक जीवन के क्षणभंगुरपन और मानव अनुभव की नश्वरता पर चर्चा करता है। अध्याय 11 एक आह्वान है कि उत्तम के साथ-साथ परिवर्तनशीलता को समझते हुए समय के साथ भलाई के कर्म करें, क्योंकि समय और अवसर अनिश्चित हैं. यहाँ Verse 10 विशिष्ट रूप से मनुष्य के आचरण और संकल्प के बारे में है: अपने मन से खेद और अपनी देह से दुःख दूर कर, क्योंकि लड़कपन और जवानी दोनों व्यर्थ हैं।
देह और मन की गति: परमेश्वर के नजरिए में जीवन की क्षणभंगुरता
यह पंक्ति हमारे आंतरिक चेतावनी स्रोत को सक्रिय करती है—मन के खेद (मन का दुख) और देह के दुख (शारीरिक पीड़ा) को दूर रखने के लिए प्रेरित करती है ताकि जीवन के क्षणों को व्यर्थ न गवांया जाए। लेखक बताता है कि मानव अवस्था—नौजवानता,Youthful vigor—अस्थायी है; इसी तथ्य के प्रकाश में हमें अपने व्यवहार को सजग बनाना चाहिए।
शब्दों का अर्थ और चित्रण
खेद यहाँ दुर्बलता, पछतावा या निराशा की निरंतरता को नहीं दर्शाता, बल्कि उन आवेगों को नियंत्रित करने की प्रेरणा है जो अतीत के दाग़ों के कारण मन को बाँध दें। दुःख देह से जुड़ा दर्द या चित्त की तकलीफ है—ऐसे क्षणों में भी संतुलन बनाए रखना श्रेष्ठ कार्य माना गया है। लड़ाकपन और जवानी—यह शारीरिक ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसका चिकित्सक होना यह नहीं कि जीवन की पूरी खुशी केवल इसी पर निर्भर है, बल्कि इसका उचित प्रयोग ही प्रमुख है।
अन्य प्रासंगिक विचारक और उद्धरण (स्वतंत्र सार)
यहाँ पाठ को और गहराई देने के लिए प्रकाशन-पूर्व टिप्पणीकारों से संकल्पना मिलती है:
Related Cross-References (संक्षिप्त टिप्पणियाँ)
1) व्यवस्थावली 3:1-8 के समान विवेकपूर्ण समय की चर्चा; सभी घटनाओं का एक सार है—हर समय उचित कर्म।
2) याद रखने योग्य वचन: जो चीजें दीर्घकाल तक टिकती हैं, वे भीतर की प्रतिज्ञाओं से जुड़ी होती हैं; इसलिए अपने आचरण को सुसंगत बनाएं।
3) यूहन्ना 9:4 का सार: हमें करुणा और प्रयत्न से काम लेना चाहिए—अध्याय 11 का यह भाग इसी विचार को बढ़ावा देता है कि जीवन के क्षणों का व्यर्थ न जाना चाहिए।
आज के लिए अभ्यास
- मौजूदा समय में संतोष और उपयोगी कर्म पर ध्य focused रहें—व्यक्तिगत जीवन में सुख-संतोष पाने के लिए।
- अपने मन और शरीर के संकेतों को पहचानें, परन्तु उग्र भावनाओं को नियंत्रण में रखें; निर्णयों में धैर्य अपनाएं।
- युवा अवस्था को संयम और दायित्व के साथ जीएं, ताकि बाद के दिनों में पछतावा कम हो।
सार निष्कर्ष
सभोपदेशक 11:10 हमें सोचने पर मजबूर करता है कि जीवन के क्षण बहुमूल्य हैं और उनके व्यर्थ न जाने देने के लिए आत्म-नियंत्रण, आशावाद और कर्तव्यनिष्ठा के साथ जीवन यापन जरूरी है। यह वक्तव्य, प्रेरक नहीं, बल्कि मार्गदर्शक है—मन से खेद और देह से दुःख को दूर कर, जवानी की उर्जा को परमेश्वर की आस्था के अनुरूप प्रयोग करें।
टेक्स्ट-स्त्रोत: HINIRV