Old Testament
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सभोपदेशक 11:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
भोर को अपना बीज बो, और सांझ को भी अपना हाथ न रोक; क्योंकि तू नहीं जानता कि कौन सफल होगा, यह या वह या दोनों के दोनों अच्छे निकलेंगे।
सभोपदेशक 11:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सभोपदेशक 11:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 कुरिन्थियों 9:10 (HINIRV) »
अतः जो बोनेवाले को बीज, और भोजन के लिये रोटी देता है वह तुम्हें बीज देगा, और उसे फलवन्त करेगा; और तुम्हारे धार्मिकता के फलों को बढ़ाएगा। (यशा. 55:10, होशे 10:12)

यशायाह 55:10 (HINIRV) »
“जिस प्रकार से वर्षा और हिम आकाश से गिरते हैं और वहाँ ऐसे ही लौट नहीं जाते, वरन् भूमि पर पड़कर उपज उपजाते हैं जिससे बोलनेवाले को बीज और खानेवाले को रोटी मिलती है, (2 कुरि. 9:10)

हाग्गै 1:6 (HINIRV) »
तुम ने बहुत बोया परन्तु थोड़ा काटा; तुम खाते हो, परन्तु पेट नहीं भरता; तुम पीते हो, परन्तु प्यास नहीं बुझती; तुम कपड़े पहनते हो, परन्तु गरमाते नहीं; और जो मजदूरी कमाता है, वह अपनी मजदूरी की कमाई को छेदवाली थैली में रखता है।
सभोपदेशक 11:6 परिप्रेक्ष्य में
यह पद भोर और सांझ दोनों समयों में कार्य करने की प्रेरणा देता है, ताकि जीवन-यात्रा में अति-संतोष या आराम के बजाय निरंतर, उद्यमशीलता बनी रहे। लेखक कहता है कि तू प्रत्येक दिन की शुरुआत में बीज बो, और दिन के अंत में भी हाथ न रोक, क्योंकि कौन सफल होगा—यह वह नहीं जानता; वह समय-समय पर वह होगा जो मेहनत में लगे रहते हैं। आयु और भाग्य के पहेलों में इस विवेकपूर्ण निर्देश का उद्देश्य आत्म-संतुष्टि नहीं, बल्कि निष्काम लगन और विश्वास है कि भगवान की व्यवस्था के भीतर प्रयास मायने रखते हैं।
ईश्वर या विश्वास के बारे में पाठ से जो स्पष्ट होता है
पाठ यह संकेत देता है कि सच्चा विश्वासी दोनों समयों में मेहनत करने को जारी रखे, क्योंकि परिणाम अप्रत्याशित और अनिश्चित है। ईश्वर के अधिकारीय योजनाओं के सामने इंसानी योजना का महत्व छोटा हो सकता है, पर परमेश्वर के नियंत्रण में हमारे प्रयत्न भी एक महत्त्वपूर्ण भाग बन जाते हैं। यह संदेश हौसला देता है कि निराशा में भी स्थिर और परिश्रमी बना रहे।
महत्वपूर्ण शब्दों व imagery की स्पष्ट व्याख्या
संयुक्त क्रॉस-रेफरेंसेज (संदर्भ) और उनके संक्षिप्त अर्थ
1) यूहन्ना 4:34-35 — यीशु के अनुसार खुराक के साथ कर्म करने की बात: अन्य आयामों में भी कार्यबल का महत्त्व।
2) इफिसियों 5:15-16 — घड़ियों के सदुपयोग की शिक्षा; जीवन को अंधेरे में नहीं, बल्कि समय की सष्टता के साथ चलना।
3) मत्ती 6:34 — कल की चिंता छोड़कर आज के आरम्भ और प्रयत्न पर भरोसा रखना।
आज के संदर्भ में व्यावहारिक अनुप्रयोग
- अपनी रुचि और दायित्वों में संतुलित अभ्यास बनाये रखें; भूले-बिसरे अवसरों पर भी उद्यम छोड़ना नहीं।
- निर्णयों में धैर्य रखें; क्योंकि परिणाम कभी-कभी पहले से परे हैं, और परमेश्वर की समय-सारिणी में होते हैं।
- छोटे-छोटे कदमों को भी महत्व दें; नियमितता से बड़े लक्ष्य प्राप्त होते हैं।
सारांश
भोर और सांझ—दोनों समयों में मेहनत जारी रखने की प्रेरणा इस बात को रेखांकित करती है कि सफलता का सटीक अनुमान इंसान के हाथ में नहीं है; पर यह स्पष्ट है कि परिश्रम और विश्वास साथ-साथ चलते रहें, ताकि परमेश्वर की सामर्थ्य से हमारे प्रयास फलित हों।
उद्धरण नोट: नीचे दी गई क्लासिक टीका-आधारित धारणा से जो विचार प्रकट होते हैं, उनमें Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विचार अपेक्षित हैं। इस पाठ के अनुवादित संदर्भ में इन दार्शनिक टिप्पणीकारों के व्यापक कोट नहीं हैं, पर उनके समन्वित सार से प्रेरित व्याख्या का समावेश किया गया है।