Old Testament
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सभोपदेशक 8:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
परन्तु दुष्ट का भला नहीं होने का, और न उसकी जीवनरूपी छाया लम्बी होने पाएगी, क्योंकि वह परमेश्वर का भय नहीं मानता।
सभोपदेशक 8:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सभोपदेशक 8:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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सभोपदेशक 6:12 (HINIRV) »
क्योंकि मनुष्य के क्षणिक व्यर्थ जीवन में जो वह परछाई के समान बिताता है कौन जानता है कि उसके लिये अच्छा क्या है? क्योंकि मनुष्य को कौन बता सकता है कि उसके बाद दुनिया में क्या होगा?

अय्यूब 14:2 (HINIRV) »
वह फूल के समान खिलता, फिर तोड़ा जाता है; वह छाया की रीति पर ढल जाता, और कहीं ठहरता नहीं।

reader-friendly overview
सभोपदेशक 8:13 नiratिहंकार भरे हुए संसार में एक विपरीत सत्य दिखाता है: दुष्टता टिकती नहीं; उसका परिणाम अल्पकालिक होता है, लेकिन परमेश्वर के भय के बिना जीवन की शमा कभी स्थिर नहीं रहती। यह पद हमें यह याद दिलाता है कि शरीर की सुख-सुविधाओं के पीछे भागना भी अस्थिर है, क्योंकि परमेश्वर का मानना और उस के साथ जीना ही स्थायी सुरक्षा प्रदान करता है।
Verse in its chapter
सभोपदेशक (कोहेल्त) के समूचे प्रावचन में जीवन के प्रयोजन, अस्थिरता और ईश्वर-भय के बुनियादी मूल्य पहुँचे जाते हैं।Chapter के प्रसंग में यह शिक्षा एक व्यावहारिक दृष्टि रखती है: अधिनायकत्व और लाभ-लाभ के बीच संतुलन कैसे बना रहे। जब संसारिक बलशाली नहीं मिलते, तब भी परमेश्वर के भय पर टिके रहना जीवन को अर्थ देता है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस अयत की सबसे बड़ी शिक्षा है: दुष्ट व्यक्ति का क्षय होना निश्चित है, जबकि परमेश्वर का भय मानना और उसकी राह पर चलना जीवन की दीर्घायु सुरक्षा का आधार है। इससे प्रेरणा मिलती है कि चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, परमेश्वर के मूल्य और नींव को मानना सबसे स्थिर भाग है।
तुलना—अन्य बाइबिल पवित्र पाठ
- नीतिवचन 10:27 कहते हैं कि परमेश्वर के भय से जीवन में दीर्घता मिलती है और दुष्टों के प्रोत्साहन क्षीण होते हैं।
- भजन 112:1-2 में परमेश्वर के भय से उदय होने वाले आशीर्वाद और सुरक्षा का वर्णन है, जो अंततः सत्य के साथ जुड़े रहते हैं।
इन समान धारणाओं से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के भय का जीवन में क्रमबद्ध अनुपात और नैतिक अनुशासन क्यों आवश्यक है, क्योंकि यह दुष्टता के क्षय के विपरीत स्थिरता देता है।
व्यावहारिक आवेदन
cross-references with brief explanations
- एच. फेथ (नीति) 10:27: परमेश्वर के भय से जीवन में आशीर्वाद और दीर्घायु की चेतावनी। यह अयत से समान ध्वनि में है कि भय जीवन की दिशा निर्धारित करता है।
- भजन 112:1-2: भय में जीवन-सुरक्षा और प्रभुत्व का संकेत, यह बताता है कि वैसा जीवन जो परमेश्वर के साथ जुड़ा है, स्थिर और अभिषिक्त रहता है।
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर का भय जीवन के वास्तविक मूल्य, सुरक्षा, और दीर्घजीवी आशीर्वाद का मार्ग है।
संक्षेप
सभोपदेशक 8:13 यह स्पष्ट करता है कि दुष्ट का भाग स्थाई नहीं और उसकी जीवनरूपी छाया लम्बी नहीं होगी; क्योंकि वह परमेश्वर का भय नहीं मानता। अतः दीर्घकालीन सुरक्षा और शांति के लिए यह आवश्यक है कि हम परमेश्वर के भय को अपनाएं, उसके मार्ग पर चलें, और हर परिस्थिति में उसका सम्मान करें।
कड़ियाँ उद्धरण (यदि मांग हो तो प्रचलित):
मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स, और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी से नीचे के बिंदु संक्षेप में मिलते हैं कि दुष्ट के परिणाम अस्थायी होते हैं और परमेश्वर-भय स्थिरता देता है।