Old Testament
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सभोपदेशक 8:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
चाहे पापी सौ बार पाप करे अपने दिन भी बढ़ाए, तो भी मुझे निश्चय है कि जो परमेश्वर से डरते हैं और उसको सम्मुख जानकर भय से चलते हैं, उनका भला ही होगा;
सभोपदेशक 8:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
सभोपदेशक 8:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 37:11 (HINIRV) »
परन्तु नम्र लोग पृथ्वी के अधिकारी होंगे, और बड़ी शान्ति के कारण आनन्द मनाएँगे। (मत्ती 5:5)

2 पतरस 2:9 (HINIRV) »
तो प्रभु के भक्तों को परीक्षा में से निकाल लेना और अधर्मियों को न्याय के दिन तक दण्ड की दशा में रखना भी जानता है।

सभोपदेशक 7:15 (HINIRV) »
अपने व्यर्थ जीवन में मैंने यह सब कुछ देखा है; कोई धर्मी अपने धर्म का काम करते हुए नाश हो जाता है, और दुष्ट बुराई करते हुए दीर्घायु होता है।
सभोपदेशक 8:12 पर टिप्पणी — भय परमेश्वर में जीवित रहना
पुष्ट रूप से यह आयत सामर्थ्य और धैर्य की शिक्षा देती है: यहाँ लेखक बताता है कि भले ही पापी बार-बार पाप करें और उनका जीवन किसी तरह विस्तारित दिखे, परमेश्वर से भय रखने वालों का भविष्य सदा उनके हक में सुरक्षित है। यह एक दृढ़-विश्वाससूचक सत्य है कि ईश्वर के भय के साथ जीवन जीना अंततः भला ही लाता है, भले स्थिति कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हो। वचन में इस बात का आश्वासन है कि वास्तविक इनाम, परमेश्वर के साथ संबद्ध रहने में है, न कि बहुतेरी सांसारिक सफलताओं में।
मुख्य विचार
केंद्रीय/themes
1) परमेश्वर के भय में जीवन का दिशा-निर्देश: भय-वालों के लिए स्पष्ट नीति—ईश्वर के आदर्शों के अनुसार चलना।
2) समय और प्रतिफल: पापी वही भ्रम बनाते हैं कि वे समय को नियंत्रित कर रहे हैं, पर वास्तविक कल्याण परमेश्वर की राह पर टिके रहने से आता है।
3) न्याय और दया की संतुलित दृष्टि: समय के साथ यह विचार उभरता है कि निश्चय भलाई परमेश्वर की सत्ता के अंतर्गत है, न मानवीय समझ के अनुसार कैसे भी प्रयत्न करें।
प्रासंगिक सामान्य टिप्पणी
यही विचार हनुवाइयाल उपायों और मेहनत के कारण नहीं, बल्कि परमेश्वर के भय और उसके सामने विवेकपूर्वक रहने के कारण स्थिरता देता है। अकथित मानवीय बुद्धि समय-समय पर भ्रमित करती है, परन्तु भक्ति-जीवन में ईश्वर के समय की पूर्णता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (सरल परिचय)
1) यूसुफ के प्रेरणादायक धैर्य के संदर्भ: कठिन हालातों में विश्वास बनाए रखना—यशायाह जैसी शिक्षाओं की उम्मीद।
2) प्रकटीकरण 2:10 के समान दृढ़ता: सत्य से समझौता न करना, भले दुष्कर्म कितने भी हो।
3) आदर्शोचित भय और वफादारी के विचार: भक्ति-जीवन के फायदे और दीर्घकालीन आशीष।
व्यावहारिक विचार
- पत्थर की तरह अडिग रहें: असमय के दुखों के बीच भी परमेश्वर के भय को नहीं छोड़ना चाहिए।
- अपने विश्वास-मार्ग की समीक्षा करें: क्या हमारी दिनचर्या ईश्वर के निर्देश के अनुरूप है? छोटे-छोटे कदम भी भलाई की दिशा में हों।
संक्षिप्त समापन
सभोपदेशक 8:12 हमें याद दिलाता है कि वास्तविक, टिकाऊ भला परमेश्वर के भय में रहने और उसकी सम्मुख जीवन जीने से ही आता है। भले पापी कितनी भी देर तक क्यों न सफलता पाए, जो परमेश्वर से डरते हैं और उसे जानते हैं, उनका भविष्य सुरक्षित रहता है।
इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्रकाशित विचारों से संक्षिप्त प्रेरणा समाहित की गई है; स्पष्ट उद्धरणों के लिए नीचे छोटे नोट हैं:
“जो परमेश्वर से डरते हैं…” (Henry)
“धर्मिता का अंत वही है — परमेश्वर का भय।” (Barnes)
“नियतिशील भलाई वही है जो परमेश्वर के भय के साथ आती है।” (Clarke)