Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 10:15 पर केंद्रित दृष्टिकोण
मुख्य व्याख्या: करूब भूमि पर से उठ गए हैं; वे वही जीवधारी हैं जिन्हें भविष्यवाणी की गई प्रलय के समय कबार नदी के किनारे देखने की बात स्मरण होती है। यह पंक्ति परमेश्वर के सिंहावलोकन को स्थापित करती है कि आकाशीय प्राणी, करूब, पृथ्वी पर उनके कार्य–स्थल और ईश्वर की महिमा को संरक्षित करने वाले दूत, सत्ता के हिसाब से अपने स्थान से नहीं डिगते। इस पाठ में करूबों के पुनःस्थापना की संकल्पना शक्ति और पवित्रता की निर्भयता को इंगित करती है।
साहित्यिक संदर्भ ( literary context )
यहेजकेल की पुस्तक में करूब प्रतीक हैं जो ईश्वर के सिंहासन के चारों ओर और मंदिर सेवाओं में उसकी उपस्थिति को दर्शाते हैं। यहाँ उनका उठना – भूमि पर से उठ जाना – एक मूर्तिकृत परिवर्तन नहीं, बल्कि परमेश्वर के कार्य-स्थल के परिवर्तन का संकेत है। यह दृश्य कबारी नदी के किनारे देखे जाने की स्मृति से जुड़ता है, जो भविष्य में राज्य–परिवर्तन और दूत Monad की भूमिका को शामिल करता है।
θεological significance ( theological significance )
करूबों का पृथ्वी से उठना ईश्वर की परमसत्ता के साथ उनके दायित्वों का पूर्ण निष्पादन दर्शाता है। वे दायित्व–पूर्वक यथावत रहते हैं; परन्तु वे उस समय पुनः सक्रिय रूप से प्रकट होते हैं जब ईश्वर सभा के कार्यों के लिए आवश्यक होते हैं। यह संदर्भ बताता है कि परमेश्वर की महिमा और उसकी योजना समय के साथ सक्रिय रहते हैं, भले ही मानवीय दृष्टि उसे तुरंत न देख सके।
अनुवादित उद्धरण और स्रोत संकेत (quotes and sources)
यदि पाठक मार्गदर्शक के रूप में पुराने सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के विचार में रुचि रखते हैं, तो नीचे संक्षेप में समाहित है कि:
खासतौर पर इन उद्धरणों में शब्दशः पूर्ण वाक्यांश नहीं दिया गया है, पर मंदिर-सेवा और दूत-प्रवाह के संदर्भों में इन टिप्पणियों की दिशा स्पष्ट है।
क्रॉस-रेफरेंसेज़ (cross-references) और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि प्रार्थना–दृष्टि में करूबों का उठना, ईश्वर की व्यवस्था के एक हिस्से के रूप में कार्यशील रहने की याद दिलाता है।
विचार-विमर्श के प्रश्न (reflection questions)
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहेजकेल 10:15 परमेश्वर के महिमामय राज्य के भीतर करूबों की भूमिका को पुनः उजागर करता है—वे उठते हैं, ताकि परमेश्वर की पवित्रता और सत्ता की योजना tend–to–be fulfilled. पाठ यह स्मरण कराता है कि दूत-कार्य और दृष्टी–संरचना में परिवर्तन निरंतर चलते रहते हैं और ईश्वर के उद्देश्यों के अनुसार उनके कदम संचालित होते हैं। हमें आवश्यकता है कि हम भी पवित्रता और विनम्रता से ईश्वर के आदेशों के साथ चलें, ताकि उनके पवित्र कार्य में भागीदार बन सकें।