Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
यहेजकेल 10:1 यहेजकेल 10:2 यहेजकेल 10:3 यहेजकेल 10:4 यहेजकेल 10:5 यहेजकेल 10:6 यहेजकेल 10:7 यहेजकेल 10:8 यहेजकेल 10:9 यहेजकेल 10:10 यहेजकेल 10:11 यहेजकेल 10:12 यहेजकेल 10:13 यहेजकेल 10:14 यहेजकेल 10:15 यहेजकेल 10:16 यहेजकेल 10:17 यहेजकेल 10:18 यहेजकेल 10:19 यहेजकेल 10:20 यहेजकेल 10:21 यहेजकेल 10:22



यहेजकेल 10:5 पर टिप्पणी—करूबों के पंखों का शब्द
इस आयत में प्रेरित दृष्टि से परमेश्वर के महिमामय कर्तव्य का एक दृश्यमान चित्र उभरता है। यह करूबों के पंखों के शोर के भीतर एक ठहराव और एक उच्चारण का संदेश है: परमेश्वर के सेवानियां और आवाहन प्रकट होते हैं, और उनका शब्द पूरे भवन-आँगन तक पहुँचता है। इस verse को समझना करूबों के आलोक में परमेश्वर की महिमा, पवित्रता और शासन को देखने का अवसर देता है।
पृष्ठभूमि और अध्याय के साथ संबंध
यहेजकेल की पुस्तक में महत्त्वपूर्ण दृश्य-योजना है—राज्य-डाक के बजाय परमेश्वर के संदेशन की महिमा और उसका नियम, जो प्रत्येक ईमानदार लोगों के लिए नयापन और चेतावनी लाता है। यह verse उसी भाग का भाग है जहाँ भाग-भोजन और मंदिर-आचार का दायरा फिर से प्रकट होता है। करूबों के पंख और “बाहर आँगन तक सुनाई देता था” यह दर्शाते हैं कि परमेश्वर की आवाज, जो पवित्रता और दायित्व को साथ लाती है, सार्वजनिक स्थान पर प्रतिध्वनित होती है।
मूल आध्यात्मिक पाठ—मुख्य शिक्षा
इस आयत का केंद्र बिंदु है: परमेश्वर का बोलना जीवन और आचरण पर सीमा संकेत देता है। यह बताता है कि दिव्य उपस्थित̇ि इतनी स्पष्ट होती है कि हर स्थान-परिसर भी उसकी आवाज़ सुन सकता है—राज्य की जिम्मेदारियाँ और नीति उसे माननी पड़ती हैं। करूबों के पंखों के शब्द का बाहरी आँगन तक पहुँचना दिखाता है कि परमेश्वर की महत्ता और दायित्व सब समाज तक पहुँचते हैं, न कि केवल एक पवित्र-स्थल के भीतर सीमित रहते हैं।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण से संकेत (संत संकलन से तात्पर्य)
हम Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायूर ऑउट-ऑफ-प्रिंट टिप्पणियों से मिलते हुए एक संयुक्त दृष्टिकोण पाते हैं:
इन टिप्पणियों के बीच एक सामान्य ध्वनि निकलती है: परमेश्वर की आवाज़ सार्वभौमिक है, और इसका मानना/अनुकरण हर आयाम को प्रभावित करता है। यह एक चेतावनी है कि धार्मिक प्रतीकों से अधिक, आचरण और नीति प्रस्तुत होती है।
अनुसंग (Cross-references) और उनका छोटा अनुभव
संक्षेप में, इन संदर्भों से ज्ञात होता है कि परमेश्वर की आवाज़ मानव समाज के भीतर व्यापक प्रभाव डालती है—ताकि पाप का जड़ से नाश और सत्य का उद्घोष हो।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षेप सार
यहेजकेल 10:5 यह संदेश देता है कि परमेश्वर की महिमा और उसका वाणी सार्वभौमिक रूप से प्रतिध्वनित होता है—करूबों के पंखों के साथ-साथ यह बाहरी आँगन तक पहुँचती है। यह हमें स्मरण कराता है कि पवित्रता, आचरण और डिका-बिलास के भीतर परमेश्वर का निर्देश स्पष्ट और सार्वजनिक रूप से उद्घोषित होता है।