Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 22:18 के पासा-परख: धातु के मैल और इस्राएल का आध्यात्मिक मूल्य
यह पद संदर्भ देता है कि इस्राएल का घराना परमेश्वर की दृष्टि में कैसी स्थिति में पहुँचा है—धातु के एक अराजक मिश्रण की तरह, जिसमें मूल्यहीनता और पाप की अशुद्धता व्याप्त हो गई है। यहेजकेल के दिनों में याकूब के पुत्रों के शहर-हरण, पाप और भ्रष्टाचार का चित्रण इस पंक्ति के माध्यम से स्पष्ट होता है। परमेश्वर की पवित्र दृष्टि में वे सभी एकरूपता, पवित्रता और उद्धार के मानकों से टूटे हुए मिलते हैं।
क्या वह समझाता है कि परमेश्वर क्या देखते हैं?
यह उपमा बताती है कि परमेश्वर उन लोगों को भी देखते हैं जो उनके राज्य के लिए निर्धारित पूर्णता नहीं रखते—वे धातु के फटते-फूटते अंशों की तरह, जिनमें दोष और अशुद्धियाँ भरी होती हैं। वे बाहरी रूप से धार्मिक दिखते हैं, पर उनके आंतरिक दिल और कर्म प्रायः भ्रष्ट हैं। यह नज़रिया पवित्रता, नीति और धर्म के असली मानक की याद दिलाता है: एक ठोस, आचरण-परक विश्वास जो जीवन के हर क्षेत्र में दिखाई दे।
कुंजी शब्दों और छवियों का स्पष्टीकरण
अन्य संदर्भ और पाठ-सम्बन्ध
यह पद नीचे दिए गए अन्य पाठों के साथ एक नैतिक चेतावनी बनकर जुड़ता है:
संयुक्त संदेश: परमेश्वर न्यायपूर्ण हैं; वे केवल बाहरी आचरण नहीं देखते, वे दिल के विचार और कर्म की नज़र से देखते हैं।
आज के संदर्भ में अनुप्रयोग
1) धर्म-आडंबर से ऊपर उठें: अपने दिल की गहराई में स्पष्टता और सच्चे प्रेम के साथ कृपा-परेषण बनें—यह तब संभव है जब हम परमेश्वर के पास अपने जीवन के हर क्षेत्र का ईमानदार आकलन करें।
2) सत्य-परक आचरण: हमारे कार्य, सोच और निर्णयों में एकरूपता बनाए रखें—धर्म-संस्थागत दिखावे से अधिक, क्रिया-परक प्रेम और न्याय की भूमिका निभाएँ।
3) दयालु सुधार की आवश्यकता: जहाँ-जहाँ भ्रष्टाचार या असंगति है, वहाँ ईश्वर-आह्वान के साथ बदलाव लाने का साहस रखें और समुदाय के लिए पवित्र मार्ग अपनाएं।
लेखन-उद्धरण (संक्षेप)
यह पाठ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-domain विचारों के संगम से संकलित एक नए हिन्दी दाहिने-तराजू में प्रस्तुत है। उनके सटीक शब्दों के छोटे-शब्द उद्धरण यदि यहाँ आये हैं, वे नीचे उद्धृत किए जाएंगे:
संक्षेप में, देव-नज़र में यह एक चेतावनी है कि बाहरी पवित्रता पर्याप्त नहीं; दिल की पवित्रता और जीवन-व्यवहार की सत्यता ही परमेश्वर के सामने मूल्य रखती है।