Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 22:29 का संदर्भ-परिदृश्य और आस्था की शिक्षा
पद का आंतरिक संदर्भ यह कहता है कि यह_TIME_ यहूदियों के भ्रष्ट समाज की धार्मिक-नैतिक गिरावट के बारे में है। यहाँ दर्शाए गए अपराधों में दुराचार, धन के लिए अन्याय, दबे-कुचलों का शोषण, और न्याय व्यवस्था में विकृति प्रमुख हैं। यहेजकेल भगवान के सामने समाज की करप्शन और पापपूर्ण व्यवहार की गहराई बताता है, ताकि परमेश्वर के न्याय औरअपेलळा के साथ सचेत चेतावनी प्रकट हो सके।
ईश्वर पर विश्वास और आस्था का संदेश
वचन यह दिखाता है कि परमेश्वर सबके कर्मों का हिसाब लेता है, चाहे वह देश का साधारण गरीब हो या धनाढ्य सत्ता-धनस्वामी। दीन-दरिद्र के साथ अन्याय, और परदेशी पर अंधेरा करने की प्रवृत्ति ईश्वर की दृष्टि में अस्वीकार्य है। विश्वास का सार यह है कि परमेश्वर सत्य और न्याय से रहते हुए समाज के कमजोर वर्गों के लिए सुरक्षा और संरक्षण चाहते हैं।
मुख्य शब्दों और imagery की स्पष्टता
- अंधेर करना: यहाँ से आशय भ्रष्टाचार, छल, और धर्मी निर्णय में अवरोध है; यह केवल व्यक्तिगत पापकर्म नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक दादागिरी के माध्यम से अन्याय को बढ़ावा देना है।
- पराया धन छीनना: धन का गलत इस्तेमाल, ज़ायज अधिकारों के स्थान पर दूसरों के अधिकारों का हनन—यह नैतिक गिरावट की गहराई को दर्शाता है।
- दीन दरिद्र को पीसना: कमजोर वर्गों के शोषण के चित्र को उजागर करता है; इसका अर्थ है कानूनी और सामाजिक सुरक्षा से वंचित करना।
अन्य उद्धरण-समझ और संबंधित पाठ
Related passages से संकेत मिलते हैं कि किन्हीं अन्यायपूर्ण सामाजिक संरचनाओं के विरुद्ध साहस और सच बोलना परमेश्वर के साथ गहरे संबंध की मांग है:
आज के जीवन में नैतिक-आचार का अनुप्रयोग
1) समाज में कमजोर वर्गों के अधिकारों की सुरक्षा करें—दीन-दरिद्र के लिए सहायता और उचित पारिश्रमिक सुनिश्चित करें।
2) धन के प्रति दृष्टिकोण सुधारें—लाभ-लाभ के लिए दूसरों के अधिकारों का दमन न करें; निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवहार अपनाएं।
3) पेशेवर और कानूनी व्यवस्था में ईमानदारी बनाए रखें—झूठी धाराओं, भ्रष्टाचार या दबाव के सामने सच का साथ दें।
संक्षेप-निष्कर्ष
यहेजकेल 22:29 कहता है कि समाज की नैतिक संरचना यदि उपर से नीचे तक भ्रष्ट हो जाए, तो परमेश्वर की न्याय-निष्ठा नहीं टिकती। इतिहास के पलों में भी, परमेश्वर गरीब के हक के लिए खड़ा रहा है; इसलिए विश्वासियों को चाहिए कि वे अपने समाज में सत्य, न्याय और करुणा के मानदंडों को स्थापित करें।
उद्धृत विचार-योग्यता (स्टैण्डर्ड स्रोत): मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के समान टोन में, यह पाठ सामाजिक-न्याय और आस्था के बीच संतुलन बनाए रखने की चेतावनी देता है—परमेश्वर बुराई के विरुद्ध है, और उसकी व्यवस्था में सत्य और दयालुता का पालन अनिवार्य है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप): यहेजकेल की नीतियों से जुड़ी नैतिकता की स्मृति दिलाती हैं, और अन्याय के विरुद्ध समुदाय-न्याय के महत्व को रेखांकित करती हैं।