Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
यहेजकेल 24:1 यहेजकेल 24:2 यहेजकेल 24:3 यहेजकेल 24:4 यहेजकेल 24:5 यहेजकेल 24:6 यहेजकेल 24:7 यहेजकेल 24:8 यहेजकेल 24:9 यहेजकेल 24:10 यहेजकेल 24:11 यहेजकेल 24:12 यहेजकेल 24:13 यहेजकेल 24:14 यहेजकेल 24:15 यहेजकेल 24:16 यहेजकेल 24:17 यहेजकेल 24:18 यहेजकेल 24:19 यहेजकेल 24:20 यहेजकेल 24:21 यहेजकेल 24:22 यहेजकेल 24:23 यहेजकेल 24:24 यहेजकेल 24:25 यहेजकेल 24:26 यहेजकेल 24:27



यहेजकेल 24:13 – तत्काल परिप्रेक्ष्य और सीख
यह उद्धृत पंक्ति ईशयाही बंधन के बाद के भाग में है, जहाँ यहोवा के न्याय और पवित्रता के प्रमाण के रूप में यरूशलेम की आन्तरिक अशुद्धता पर कठोर चेतावनी दी जाती है। नगरी की अशुद्धता महापाप की चरम स्थिति तक पहुँच चुकी थी; ईश्वर कहता है कि वह शुद्ध करना चाहता था, परन्तु जब तक भीतर की पवित्रता नहीं मिलती, तब तक उसे पूर्ण शुद्धि नहीं दी जा सकेगी। यह भाव यह दर्शाता है कि परमेश्वर की पवित्रता साधारण जलन से नहीं टूटती; उसे सचमुच मन और कर्म की शुद्धता चाहिए।
पवित्रता के लिए आंतरिक परिवर्तन
पवित्रता का लक्ष्य मात्र बाह्य रीति-रिवाज नहीं, बल्कि हृदय की स्वीकृति और उद्धार के लिए तैयार होना है। “तू शुद्ध नहीं हुई” कहकर परमेश्वर स्पष्ट करते हैं कि संस्कृति-आधारित पवित्रता पर्याप्त नहीं है; तब तक पवित्रता उपलब्ध नहीं होती जब तक रीढ़ की शुद्धता नहीं आती। यह संदेश हर युग के विश्वासियों के लिए मौजू है कि परमेश्वर की जलजलाहट केवल दंड के लिए नहीं, बल्कि अस्थाई नहीं, स्थाई परिवर्तन के लिए है।
शब्दार्थ और संकेतक चित्र
– अशुद्धता: यहाँ केवल औषधीय नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अशुद्धता है, जो ईश्वर-केन्द्रित धर्म को विकृत कर देती है।
– शुद्ध करने की इच्छा: परमेश्वर की ममता और सत्य के साथ संगत शुद्धिकरण की चाहत दर्शाती है; यह क्रोध के बजाय उद्धार की दिशा है।
संबंधित शास्त्रीय टिप्पणियाँ
Matthew Henry और Albert Barnes ने इस ग्रंथ के न्याय और दया के दायरे को संतुलित किया है। Henry बताते हैं कि परमेश्वर की जलजलाहट तब तक शांत नहीं होती जब तक उसकी पवित्रता के अनुरूप परिवर्तन न हो। Barnes इसे यह दर्शाते हैं कि दंड और चीत्कार का यह स्वरूप पवित्र नगर के लिए प्रेरणा है कि वे ईश्वर के नियम के अनुसार सुधरें। Clarke ने भी यह माना है कि यहाँ दंड का उद्देश्य केवल अपराध को नष्ट करना नहीं, बल्कि आत्म-निरीक्षण और परिवर्तन की प्रेरणा देना है। (याद रहे कि यहाँ से उद्धृत किया गया छोटा अंश संक्षेप में है और पूर्ण पाठ अलग-अलग उद्धरण के रूप में उपलब्ध हो सकता है।)
क्रॉस-रेफरेंसेस
इन संदर्भों में दर्शाया गया है कि पवित्रनगर की शुद्धता केवल बाहरी रीति-रिवाज नहीं, बल्कि हृदय की पुनर्गठन से ही संभव है।
आज के लिए अनुप्रयोग
1) अपनी आस्था को बाहरी धर्म-चिह्नों से नहीं, बल्कि अपने कर्म-व्यवहार और मनोभाव से मापा जाए।
2) कठिनाई-स्थितियों में भी परमेश्वर की पवित्रता के अनुरूप आंतरिक परिवर्तन की चाह बनाए रखें; दंड नहीं, सुधार की प्रेरणा लें।
3) ईश्वर के साथ सत्य-निष्ठा बनाए रखने के लिए रोजमर्रा के निर्णयों में ईमानदारी और दयालुता को प्रथमिकता दें।
इस अंश का संदेश यही है: परमेश्वर की जलजलाहट तब तक शांत नहीं होती जब तक उसकी पवित्रता के अनुरूप आंतरिक परिवर्तन नहीं होता। परमेश्वर चाहते हैं कि हम हृदय से शुद्ध हों और वही हमें उद्धार की आशा देता है।