Old Testament
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यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48



यहेजकेल 5:13 पर टिप्पणी — यहोवा की जलन और शान्ति पुनः प्राप्ति
यह कहावत यहेजकेल की गहरी दृष्टि में आता है कि परमेश्वर कैसे अपने वचन के अनुसार राजा-राज्यों, नगरों और व्यक्तियों के हृदयों में नियंत्रण बनाये रखते हैं। एक विशिष्ट समय पर उनकी कृपा और नवीनता फिर से प्रकट होती है, जब लोगों ने अपने पापों के कारण परमेश्वर की सच्चाई से दूरी बना ली है। यहेजकेल 5:13 इस तथ्य को स्पष्ट करता है कि कोप और जलन, परमेश्वर की पवित्र इच्छा के साथ, न्यायपूर्ण ढंग सेයි और अंततः इकट्ठा किये गए मार्गों का परिणाम बनते हैं।
पद पाठ का छोटा परिचय (यह अध्याय संदर्भ सहित)
यह अध्याय यहोवा के प्रतिनिधि नबी यहेजकेल से जुड़ा है, जिसमें वह विशिष्ट प्रतीकों के माध्यम से यह कहता है कि प्रत्यक्ष आलोचना और दण्ड से कैसे उनका राज्य और परमेश्वर का आदर विखंडित हो गया है। 5:13 में उद्धृत भाव यह दर्शाता है कि जब परमेश्वर अपने न्याय को लागू करते हैं, तब वह अपने लोगों के बीच शान्ति और कारण बनाते हैं—यानी दोषों के लिए दण्ड, और पश्चात्ताप के बाद शुद्धिकरण।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
मुख्य संदेश यह है कि परमेश्वर का कोप उनके लोगों की अविश्वास और उतार-चढ़ाव के कारण नहींrenderer; बल्कि यह एक जाँच और चेतावनी है ताकि वे अपने जीवन के मार्ग को सम्हाल सकें। उद्धार के पीछे उसका उद्देश्य शान्ति है—यह वही शान्ति है जो पाप के कारण प्रभावित होती है, जिसे पुनः स्थापित किया जाना आवश्यक है। इसके साथ यह भी दिखता है कि परमेश्वर अपने क्रोध के समय में भी सत्य के साथ चलता है और अपने नाम के लिए ख्याति प्राप्त करता है।
अन्य बाइबल पाठों के साथ संबंध
इन क्रॉस-रेफरेंसेज से एक सामान्य निष्कर्ष यह मिलता है कि परमेश्वर की क्रोध और शान्ति का क्रम बाइबिल की एकात्मिक योजना का हिस्सा है: चेतावनी, पश्चात्ताप, दयालु उद्धार, और फिर शान्ति-स्थापना की पुनर्स्थापना।
जीवन पर लागू पाठ
- ईमानदारी से आत्म-परिशोधन: अपने जीवन में यहोवा के आह्वान और अपने पापों की पहचान करें; उनके क्रोध से डरना नहीं, बल्कि उनकी पवित्रता में निम्न नहीं होना।
- पश्चात्ताप का मार्ग: जब भी अपनी असफलताओं का एहसास हो, तो दिल से लौटकर परमेश्वर के साथ एक नए अनुबंध को स्वीकार करें।
- शान्ति का निर्माण: परमेश्वर की जलन से नहीं, बल्कि उनके प्रेम से प्रेरित शान्ति को अपने घर, समुदाय और जीवन में प्रवाहित करें।
सूक्ष्म निष्कर्ष और आध्यात्मिक पाठ
यहेजकेल 5:13 बताता है कि जब परमेश्वर क्रोध के साथ अपनी जलजलाहट उठाते हैं, तब वे अपने नाम की महिमा को स्थापित करते हैं और सच्ची जलन के भीतर भी उद्धार का मार्ग दिखाते हैं। यह हमें याद दिलाता है कि कड़वी चेतावनी भी प्रेमपूर्ण मार्गदर्शन का हिस्सा है, ताकि जीवित विश्वास को पुनः बनाये रखा जा सके।
नोट्स — ऐतिहासिक-संदर्भ और उद्धरण
यह भाग सार्वजनिक-डायम-प्रमाणित टिप्पणी की शैली में एकीकृत है, जिसमें मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के संक्षिप्त, आवश्यक उद्धरणों की अनुकृति शामिल हो सकती है। उपलब्ध समय के अनुसार यह पाठ उनके दृष्टिकोणों से प्रेरित है, किन्तु यह नवीन सम्यकंतर बनावट के साथ हिंदी पाठकों के लिए लिखा गया है।
संदर्भ-नीति: यदि किसी पाठक को इन क्रेडिट-उद्धरणों के छोटे उद्धरण की स्पष्ट आवश्यकता हो, तो नीचे दिए गए तीन प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के छोटे-छोटे उद्धरण प्रस्तुत हैं—ये केवल संदर्भ के रूप में हैं:
यह पाठ 700 शब्दों के भीतर संक्षेप और स्पष्ट प्रस्तुत किया गया है ताकि पाठक अध्याय 5 के सन्देश को सीधे समझ सकें और अपने जीवन से सम्बद्ध लागू कर सकें.