Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48



यहेजकेल 5:7 पर टिप्पणी — अधिक ढकोसले और नियमों से विमुखता
इस भाग में ईश्वरीय न्याय का आह्वान स्पष्ट है: यहूदा के बाद भी परमेश्वर आपनी नीति-नियमों से विचलन कर रहे हैं। यहेजकेल 5:7 में प्रभु यहोवा कहता है कि लोग अपनी जगह-जगह की जातियों के अनुशासन, धूम-धड़ाके और अपने चारों ओर की संस्थाओं के नियमों से ऐसे प्रभावित हैं कि वे मेरी विधियों और नियमों को न तो मानते हैं और न उनका अनुसरण करते हैं। यह उद्धरण एक स्पष्ट चेतावनी है कि अलौकिक मोहरों से भरे निर्भय संसार में भी धार्मिक और नैतिक ठहराव रखने की अनिवार्यता बनी रहती है।
क chapitre के भीतर यह Verses का स्थान
यह भाव स्पष्ट रूप से इस्राएल की सामाजिक-धार्मिक अस्थिरता को दर्शाते हैं: धर्मयोजना और सामाजिक आचरण के बीच का फटाव बढ़ रहा है। यहोवा कहता है कि उन्होंने अपने नियमों की उपेक्षा करते हुए चारों ओर की जातियों के ढकोसलों और उनके मानदंडों को अपनाया है, जिससे उनकी पवित्रता और वैश्विक पहचान खतरे में पड़ गई है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
मुख्य सुसंगत पाठ यह है कि परमेश्वर चाहता है कि उसकी विश्वसनीय व्यवस्था पर अडिग रहकर लोग अलग-थलग न रहें, बल्कि उनकी आचार-विचार और सामाजिक व्यवहार भी उसकी प्रतिबद्धता से समरूप हों। यहाँ चारों ओर के सामाजिक दबावों, मानदंडों और धारणाओं के बावजूद परमेश्वर की विधियाँ सर्वोपरि हैं। यहूदियों के लिए यह एक चेतावनी है कि वे सामाजिक अनुकूलन के नाम पर पवित्रता को बिना सोचे-समझे त्याग न दें।
शब्दार्थ और पाठ-समझ
वाक्य में “यह कहता है… तुम लोग जो अपने चारों ओर की जातियों से अधिक हुल्लड़ मचाते” का आशय है कि धार्मिक-आचरण में बाहरी प्रदर्शन और आंतरिक व्यवस्था में असंतुलन है। “मेरे नियमों को मानते” और “मेरे चारों ओर की जातियों के नियमों के अनुसार भी न किया”—इन दो धारणाओं का जोड़ दिखाता है कि इहलौकिक समाज के दबाव से बचना कठिन है, पर परमेश्वर के नियमों से समझौता करना उसे स्वीकार नहीं है।
पवित्र ग्रंथों के तुलनात्मक संदर्भ
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि बाहरी सामाजिक दबाव बनाम आंतरिक धार्मिक प्रतिबद्धता के बीच संतुलन कितना आवश्यक है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंस और उनके अर्थ
1) यहRomans 12:2 की तरह यह बताता है कि संसार के ढांचे से मिलकर नहीं, बल्कि मन renewing द्वारा परिवर्तन उचित है।
2) यशायाह 1:17 जैसी शिक्षा से स्पष्ट होता है कि धर्म की वास्तविकता कर्म-प्रकाश से प्रकट होती है—न केवल बाहरी आडंबर।
3) 1 पतरुस 1:14-16 बताता है कि पवित्र बने रहें, क्योंकि प्रभु जो है उसी तरह है; यही जीवन की दिशा तय करता है।
संक्षिप्त सार
यहेजकेल 5:7 यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर की पवित्र व्यवस्था को त्यागना सामाजिक मानदंडों के दबाव में पड़ना नहीं है।Faithful discipleship के लिए आचार-विचार और सामाजिक व्यवहार में ईश्वर की विधियों का पालन आवश्यक है। यह एक मिसाल है कि ईश्वर के नियम मानने में बाहर की दुनिया के प्रभाव कम, परंतु आंतरिक समर्पण अधिक मायने रखता है।
एंट्री के लिए उपयोगी संकेत: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के 짧े उद्धरण आवश्यक जगह पर शामिल किए गए हैं। नीचे उनके विचारों के संक्षेप में उल्लेख है:
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नोट: यदि आप चाहें तो मैं Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट संक्षिप्त उद्धरण या उनके विचारों के ठोस सार जोड़ दूँ, ताकि पाठ और अधिक संदर्भपूर्ण हो जाए।