Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48



यहेजकेल 5:5 पर टिप्पणी — यरूशलेम की स्थिति और शिक्षा
यह वही समय है जब यहेजकेल ने यहोवा के संदेश को एक कठोर दृश्य-खंड में प्रस्तुत किया: यरूशलेम को एक संरक्षित नगर के रूप में स्थापित किया गया, फिर उसे चारों ओर देशों से घिरा देखा गया। यह वाक्य इतिहास के कठोर सच को दिखाता है कि परमेश्वर के आदेश के अनुसार एक विशिष्ट स्थान और दायित्व से दूरी बनना कैसे सामाजिक और आध्यात्मिक संकट का कारण बन सकता है। इस वर्णन में सूक्ष्मता से परमेश्वर का न्याय और कृपा दोनों उभरते हैं: उसका उद्देश्य लोगो को सचेत करना और फिर भी उन्हें गति में लौटाने के अवसर देना।
पद का अध्यायगत संदर्भ
यहेजकेल 5 पूरे अध्याय के संदर्भ में एक प्रतीकागत दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। यहाँ यहोवा यरूशलेम की नाकामी को उस नगर के भाग-भाग में विभाजन के रूप में दिखाते हैं—उसकी स्थिति “अन्यजातियों के बीच में ठहराई गई” है, और उसके चारों ओर देश रोक-थाम के बिना घिरे हुए हैं। यह एक चेतावनी है कि प्रतिदिन की गलतियाँ और नागरिक व्यवहार की बर्बादी अंततः पूरे समुदाय को संकट में डाल देती है।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
इस वचन की प्रमुख सीख यह है कि दायित्व-संरचना और नैतिक स्तर के गिरावट का परिणाम कैसे समाज पर पड़ता है. परमेश्वर जो एक-एक्रारी कानून के अनुसार देखता है, वह व्यक्तिगत पापों के साथ-साथ सामूहिक सजा की चेतावनी देता है। परन्तु यह भी विचारधारा है कि यदि लोग अपने पापों से तुच्छ न हों, तो वास्तविक परिवर्तन संभव है—यही संभव है कि वे फिर से रास्ते पर आकर ईश्वर की आशीष पाएँ।
अन्य बाइबल संदर्भों से तुलनात्मक विचार
इन संदर्भों में यह स्पष्ट होता है कि पवित्रता और जिम्मेदारी का पालन न करने पर समाज के हर हिस्से पर प्रभाव पड़ता है, परन्तु ईश्वर की करुणा और अवसर-प्राप्ति भी बना रहता है ताकि लोग लौट आएं।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
हम कैसे इस संदेश को अपने समय के जीवन पर लागू करें?
चयनित क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका संक्षेप
संदर्भ का छोटा संबंध समझना सहायक रहता है:
उपयुक्त संक्षेप
यह-पथ स्पष्ट करता है कि परमेश्वर की योजना में इतिहास-व्यक्ति और नगर—दोनों के लिए दायित्व है। यदि उनका जीवन क्रम बंधित रहता है और वे लक्ष्य से भटक जाते हैं, तो परिणाम एक सामूहिक चुनौती बन जाता है। परन्तु आत्म-समझ और क्षमा-योग्य मार्ग में लौटना संभव है, ताकि वह नगर और लोगों को बचाने की दिशा में फिर से चल पड़े।
अनुदेशन के उद्धरण: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke में से कहीं-कहीं स्पष्ट टिप्पणी मिलती है कि लोग अपने स्थान और कल्याण के प्रति जागरूक रहें और पाप के कारण आने वाले दुःख से बचें—परन्तु ईश्वर की करुणा के अवसर भी दिए जाते हैं।