Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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प्रत्यक्ष अर्थ
यहोवा कहता है कि उसने अपने क्रोध की आग में कहा कि बचे हुए लोग और सम्पूर्ण एदोम, जिन्होंने मेरे देश को अपने आनंद और अभिमान से अपना बनाया, वे पराया होकर लूटे जाएंगे। सार यह है कि परमेश्वर उन राष्ट्रों के विरुद्ध निर्णय सुनाता है जिन्होंने गर्व और स्वार्थ से ईश्वर की सम्पत्ति पर अधिकार किया।
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
यह यहेजकेल के समय की भविष्यवाणी का हिस्सा है, जब बाबुल और अन्य शक्तियाँ इज़राइल की भूमि और नगरों पर आक्रमण कर रही थीं। नबीयों ने केवल यहोवा के लोगों के दोषों का ही निंदा नहीं की, बल्कि उन विदेशी जातियों के कामों पर भी उजागर किया जो ईश्वर की संपदा पर अन्याय से कब्ज़ा जमाते हैं। एदोम, ऐतिहासिक रूप से इस्राएल का पड़ोसी और कभी-कभी प्रतिद्वंद्वी रहा है, और यहाँ उसे विशेष रूप से अभिमान तथा लानत का पात्र बताया गया है।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
1) "अपनी जलन की आग में" — यह वाक्य ईश्वर के न्याय और ईर्ष्या को दर्शाता है: परमेश्वर अपनी पवित्रता की रक्षा के लिए अधर्म पर प्रतिक्रिया करता है।
2) "बची हुई जातियाँ" — वे राष्ट्र जो इज़राइल के पतन के बाद भी जीवित रहे और लाभ उठाने का प्रयास करते हैं; ईश्वर सबकी नीयत और कर्मों पर नजर रखता है।
3) "अपने मन के पूरे आनन्द और अभिमान से" — यह शब्द समूह दिखाता है कि अपराध केवल सामरिक कब्ज़ा नहीं था, बल्कि उस पर गर्व और स्वर्णिम चेष्टा भी शामिल थी। परमेश्वर ऐसे गर्व को दण्ड देता है।
संदर्भ-सूत्र
थीमैटिक सूची (संक्षेप)
मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स, आदम क्लार्क — छोटा उद्धरण नोट
यहां दी गई व्याख्याएँ पारंपरिक टिप्पणीकारों के सामान्य दृष्टिकोण से मेल खाती हैं। यदि कोई छोटा उद्धरण आवश्यक हो: Matthew Henry ने इस तरह के पदों पर अक्सर कहा कि ईश्वर का क्रोध उन पर गिरता है जो गर्व से दिव्य अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। (यह वाक्यांश व्याख्यात्मक सार है, उद्धरण के लिए मूल संदर्भ देखें.)
व्यावहारिक निष्कर्ष
यह वचन हमें चेतावनी देता है कि धार्मिक या नैतिक अधिकारों का अहंकार से हनन गंभीर परिणाम लाता है। व्यक्तिगत रूप में, यह हमें अन्याय पर नजर रखने, गर्व से बचने और परमेश्वर की न्यायप्रियता को स्वीकार करने को प्रेरित करता है। चर्च और राष्ट्रों को भी याद रखना चाहिए कि संसाधन और भूमि का उपयोग निष्पक्षता और दया के साथ होना चाहिए; वरना ईश्वर की चुनौती और परिणाम होते हैं।