Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 36:6 पर टिप्पणी—क्यों यह verse महत्वपूर्ण है
यह वचन यह संकेत देता है कि परमेश्वर की निर्णायक आलोचना और दयालु सुधार दोनों एक साथ चलते हैं। इस्राएलियों ने जातियों के बीच अपमान और अस्थिर नैतिकता को बढ़ावा दिया; परन्तु परमेश्वर अपने विरुद्ध किसी भी सम्मान-घृणा को सहन नहीं करते। इस वचन में खोए हुए देश-गौरव को फिर से जगाने की नीयत और पवित्र-सुधार की योजना एक स्पष्ट संदेश के रूप में दीपित है: नीति-संहार के विरुद्ध स्पष्ट बोल, और पवित्रता की पुनर्स्थापना।
पुष्टि के लिए मूल संदर्भ
यहोवा के these शब्दों में भविष्यवाणी इस्राएल की भूमि के विरुद्ध नहीं, बल्कि उसकी आचरण-गुणों के विरुद्ध है—खराब धारणा, जातीय अपमान, और गलाती हुई नैतिकता। पहाड़ों, नालों और तराइयों तक यह संदेश फैलता है ताकि हर क्षेत्र में यह स्पष्ट हो कि परमेश्वर ने देश के लिए उच्च मानक तय कर दिए हैं। यह समय-सीमित दंड नहीं; यह सुधार और पुनर्स्थापन की तैयारी है, ताकि यह देश अपने परमेश्वर के साथ सही संबंध स्थापित करे।
मुख्य संदेश—क्या कहता है यहौवा?
यह वचन स्पष्ट करता है कि:
धर्म-सूत्र और पवित्र तत्त्व
इस पाठ में कुछ प्रमुख थीम्स गहरे रूप से उभरते हैं:
cross-references (संभावित संबंध)
नीचे तीन संदर्भ दिए गए हैं जो इस वचन के विचार-विभाजन से जुड़े हैं:
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर अपने लोगों से केवल सजा नहीं मांगते, बल्कि एक नई जिंदगी की राह भी दिखाते हैं—विश्वास में वृद्धि और परमेश्वर के साथ सीधे रिश्ते की पुनःस्थापना।
व्यावहारिक देवotional संदर्भ
यह धमक नहीं, बल्कि एक बुलावा है: जीवन में जहाँ-जहाँ हमारी नीयत और कार्यक्रम परमेश्वर की पवित्र नैतिकता के विरुद्ध हो, वहां स्पष्ट बदलाव की जरूरत है। आप अपने दैनिक जीवन में इस तथ्य को कैसे लागू कर सकते हैं? हर दिन के कार्यों में ईमानदारी, दूसरों के प्रति न्याय और नम्रता को प्राथमिकता दें। यदि कोई गलती हो, तो शिक्षा और सुधार के मार्ग पर अग्रसर हों—यही सही आचरण की प्रतीक है।