Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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यहेजकेल 36:37 — संदर्भ और मर्म
यह परिणामस्वरूप पाठ यह दर्शाता है कि परमेश्वर अपने विश्वासियों के लिये नये जीवन और बढ़ती कृपा की भीख मांगने पर भी अत्यंत उत्साहित रहता है। इस्राएल के घराने का पुनर्निर्माण, उनकी आत्मिक और सामाजिक वृद्धि का संकेत है, जब लोग ईश्वर से गहरे से लगाव और विनती से सहायता मांगते हैं। यह प्रकाश डालता है कि परमेश्वर अपने चित्त में अब भी उनके लिए आशा और प्रसन्नता देखता है, भले ही पूर्ववर्ती असफलताओं के कारण उनकी स्थिति चुनौतीपूर्ण क्यों न हो।
संक्षेपित संदेश और विश्लेषण
इस वाक्य में यहोपया गया है कि परमेश्वर यहोवा यह कहता है कि जब इस्राएल अपने लिए विनती करेगा, तो मैं उनके लिये वृद्धि करूँगा—मनुष्यों की गिनती भेड़-बकरियों के समान बढ़ाऊँगा। यह वृद्धि केवल जनसंख्या की नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण, प्रोत्साहन और स्थिर विश्वास की भी वृद्धि है।
मुख्य शब्दों और चित्रों की व्याख्या
संबद्ध आयतों के संदर्भ
- यह दिखाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ संवाद में है और उन्हें उन्नति के लिए प्रेरित करता है (उद्धरण संकेतन बिना पूर्ण पाठ के): उनके विनती पर कृपा और भरपूर आशीर्वाद का संकेत।
- अन्य आयतों में भी परमेश्वर का ऐसे ही उत्साह स्पष्ट है, जैसे कि उद्धार का क्रम और समाजिक-सामरिक परिवर्तन के लिए बुलाहट।
आधुनिक अनुप्रयोग
आज के विश्वासियों के लिए यह संदेश आत्म-आत्मसमर्पण और प्रार्थना के महत्व को रेखांकित करता है। कठिन परिस्थितियों में भी हम अपनी गिनती नहीं खोते; क्योंकि परमेश्वर हमारे लिए आवश्यक आशीष और समर्थ बढ़ोतरी दे सकता है। अपनी कमज़ोरियों तथा परिस्थितियों को लेकर ईश्वर के सामने निराश होने की बजाय विनती करें—क्योंकि वही गभीरता से सुनते हैं और वृद्धि के अवसर बनाते हैं।
प्रचलित संदेश का संकलन
यह तेज संकेत देता है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ सक्रिय संबंध बनाये रखता है, उनकी प्रार्थनाओं के उत्तर में उन्हें जीवन से भरपूर आशीष प्रदान करता है। जीवन के हर क्षेत्र—आत्मिक, सामाजिक, और नेतृत्व—में वह वृद्धि का स्रोत है।
यथार्थ cross-references (संक्षेप)
1) परमेश्वर की प्रतिक्रियाशील कृपा पर विचार—किस प्रकार विनती पर आशीर्वाद खुलते हैं; 2) आत्मिक वृद्धि के प्रमाण—विश्वासियों की एकता और समृद्धि की ओर प्रवृत्ति; 3) उद्धार के क्रम में समुदायिक पुनर्निर्माण—आज के चर्चीय जीवन की प्रेरणा।
टिप्पणी नोट: नीचे के तीन प्रेरक टिप्पणीकारों में से हर एक का सीधे उद्धरण इस पाठ के संदर्भ में संक्षेप में अनुमत है, परन्तु पूर्ण पंक्तियों के बिना उद्देश्यपूर्ण रूप से प्रेषित किया गया है।
नोट
यह commentary पंक्तियों की संक्षिप्त व्याख्या है, और किसी विशेष पाद के पूर्ण पाठ की भरपूर प्रतिलिपि नहीं है।