Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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यहेजकेल 36:1 यहेजकेल 36:2 यहेजकेल 36:3 यहेजकेल 36:4 यहेजकेल 36:5 यहेजकेल 36:6 यहेजकेल 36:7 यहेजकेल 36:8 यहेजकेल 36:9 यहेजकेल 36:10 यहेजकेल 36:11 यहेजकेल 36:12 यहेजकेल 36:13 यहेजकेल 36:14 यहेजकेल 36:15 यहेजकेल 36:16 यहेजकेल 36:17 यहेजकेल 36:18 यहेजकेल 36:19 यहेजकेल 36:20 यहेजकेल 36:21 यहेजकेल 36:22 यहेजकेल 36:23 यहेजकेल 36:24 यहेजकेल 36:25 यहेजकेल 36:26 यहेजकेल 36:27 यहेजकेल 36:28 यहेजकेल 36:29 यहेजकेल 36:30 यहेजकेल 36:31 यहेजकेल 36:32 यहेजकेल 36:33 यहेजकेल 36:34 यहेजकेल 36:35 यहेजकेल 36:36 यहेजकेल 36:37 यहेजकेल 36:38



यहेजकेल 36:29—Meanings at a Glance
इस वाक्य का स्पष्ट अर्थ यह है: परमेश्वर अशुद्धता के कारण जो तलाक जैसी स्थितियाँ बन जाती हैं, उनसे छुटकारा दिलाकर फिर उद्धार और फल-फसल की व्यवस्था को पुनः स्थापित करेगा। वह परमेश्वर अपनी कृपा से पक्षपात नहीं करेगा, बल्कि अपने लोगों को स्वच्छ कर के नई जीवनशैली और उन्नति के मार्ग पर ले जाएगा, ताकि अकाल न पड़े और उनकी कृषि-उत्पत्ति में वृद्धि हो।
Contextual Background
यहोशू या उसके बाद के अंतःकरण-नाटक से आगे बढ़ते हुए यहेजकेल के किताब में परमेश्वर के संदेसों को किसान-जीवन और देश के पुनर्स्थापन से जोड़ा गया है। भविष्यवाणीकर्ता यह कहता है कि जब लोगों के अंदर की अशुद्धता दूर हो जाएगी और उत्साहपूर्ण धार्मिक-निष्ठा लौटेगी, तब प्रभु अग्नि-आग्रह के बिना भी अनाज-उत्पादन और खेती की अनुकूलता देगा। यहेजकेल 36 अध्याय में परमेश्वर की पुनर्स्थापना की योजनाओं का केंद्रभाग है, जिसमें गंदी-गंदगी, असमानता, और आत्मिक निर्भरता के बावजूद उद्धार की आशा स्पष्ट है।
Interpretive Observations
Short Thematic Outline
Cross-References (संक्षेप में) और उनका संयोजन
इन संदर्भों से प्रवाह स्पष्ट होता है: जब हृदय और समाज पवित्र बने रहते हैं, तब प्राकृतिक और सामाजिक दोनों प्रकार के आशीषों की बौछार संभव होती है।
Historical-Commentary Echoes (संक्षिप्त उद्धरण चर्चा)
अगर आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट विचारों से जुड़ाव देखते हैं, तो उनके दृष्टिकोणों में सबसे प्रमुख बिंदु यह है कि परमेश्वर की पवित्र क्रिया से स्थानीय-समुदाय की मुक्ति-यात्रा संभव होती है, और यह परिवर्तन वास्तविक आंतरिक परिवर्तन से आरम्भ होता है। यह पंक्ति अशुद्धता से छुटकारा और कृषि-उन्नति के साथ एक सामूहिक चंगा-उद्धार की आशा दर्शाती है।
उद्धरण-संकेत: Henry, Barnes, Clarke के समान “साफ-सुथरे दिल से परमेश्वर का वरदान आता है” प्रकार के विचार उनके सामान्य टोन में मिलते हैं; हालांकि इन लेखकों के पूर्ण उद्धरण यहां नहीं दिए जा रहे हैं, उनके प्रवचन इस प्रमुख विचार पर टिके रहते हैं कि आंतरिक परिवर्तन बाहरी आशीष का जनक है।
Practical Takeaway
व्यक्ति और समुदाय दोनों के लिए, पाप के बंधनों से छुटकारा पाना और परमेश्वर की आज्ञाओं के अनुसार जीवन-यात्रा अपनाना ही सफलता के कार्य है। जब दिल शुद्ध हों और ईश्वर की राह पर चलें, तब खेती और जीवन-यात्रा में स्थिरता और उन्नति आती है।