Old Testament
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यहोवा की शपथ और देशों की निन्दा — यहेजकेल 36:7
यह वचन यहेजकेल की उन गहन प्रतिज्ञाओं के संदर्भ में दिया गया है जिसमें परमेश्वर अपने इमान और न्याय को दृढ़ करता है। यहोवा कहता है कि निःसन्देह चारों ओर की जातियाँ, जो इस्राइल के भ्रष्टाचार और व्यवस्था-विरोध से जुड़ी हुई परिस्थितियों में आ चुकी हैं, उनकी निन्दा उनके ऊपर ही पड़ेगी। यह संदेश एक चेतावनी है कि परमेश्वर बिना-सुविधा के यहोवा के निष्ठुर और पवित्र नियमों के विरुद्ध हुए आचरण के प्रतिफल को छोड़ेंगे नहीं।
मुख्य अर्थ
यह शपथ यह दर्शाती है कि परमेश्वर का न्याय सार्वभौमिक है और वह उन सभी जाति-समूहों के लिए भी जिम्मेदार ठहराते हैं जो इस्राइल के साथ जुड़ी स्थिति में निन्दा और दण्ड के भागीदार बनते हैं। यह बताता है कि हमने जो किया है, उसके परिणाम स्वयं पर ही लौटते हैं—यह एक कॉस्मिक सिद्धान्त है कि पाप की कीमत अंततः वहन करनी पड़ती है, भले ही उसे तुरंत न दिखे।
मुख्य विषय
अन्य प्रासीन्न अंश (Cross references)
- यह्रू 36:22-23 के संदर्भ में, जहाँ परमेश्वर अपने नाम के लिए पवित्रता और महानता दिखाते हैं और यह दिखाते हैं कि निन्दा केवल दुष्टों के विरुद्ध नहीं, बल्कि ईश्वर का भक्त-पथ अपनाने वालों के लिए भी जागरण का अवसर है।
- अंदरूनी पवित्रता और चमत्कारिक पुनर्स्थापना के विषय में, योएल 2:32 जैसे संदर्भों से प्रेरणा मिलती है कि विश्वासियों के सामूहिक प्रतिरोध और उद्धार परमेश्वर के नाम की महिमा के लिए है।
- दाऊद-काल के प्रवचनों में भी सार्वभौमिक न्याय की चर्चा मिलती है जो यह दर्शाती है कि निर्भय प्रजा के लिए भी ईश्वर की शांति और न्याय सुनिश्चित है।
व्यावहारिक विचार
हम आज भी अपने समुदाय में देख सकते हैं कि अन्य समुदाय या राष्ट्र हमारे कर्मों के प्रभाव से प्रभावित होते हैं। इस वचनों से सीख यह है कि ईश्वर के नियमों के उल्लंघन के परिणाम केवल निजी नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर पर आते हैं। धैर्यपूर्वक इमानदारी, सुधार-कार्य और धार्मिक निरन्तरता से ही सामाजिक कल्याण लौट सकता है। यह भी याद रखें कि परमेश्वर की न्याय-प्रधानitude के साथ mercy भी है—उसे अपनाकर पुनर्स्थापना संभव है।
संक्षेप
यहेजकेल 36:7 में परमेश्वर की शपथ स्पष्ट करती है कि निन्दा-गलतियों के दुष्परिणाम সকল पर पड़ते हैं। यह संदेश एक चेतावनी है कि पथभ्रष्टता की कीमत चुकानी पड़ेगी, परन्तु परमेश्वर का उद्धार-योजनाओं में पुनर्स्थापना भी संभव है, यदि लोग सचेत होकर धर्म-भक्ति और नैतिकता की ओर लौटते हैं।
पूर्व-प्रकाशन उद्धरण (कथनों से संदर्भ)
यह भाग आवश्यक स्रोत-आधार के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के समानांतर टिप्पणियों के सार-रूप से संकलित है। वास्तविक इकबालिक उद्धरण यदि उपलब्ध हों, तो नीचे के पाठ में संक्षेप में संकेतित हैं:
किशोरकथा के अनुसार, परमेश्वर की शक्ति और न्याय की पूरी प्रकृति इस शपथ में खुलती है—न्याय के साथ उद्धार का भी मार्ग वही दिखाते हैं।