Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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यहेजकेल 20:5 पर हिंदी टिप्पणी — संदर्भ और अर्थ
इस पद में परमेश्वर यहोवा यह स्पष्ट करते हैं कि इब्रानी इतिहास का चयन और बुलाहट विशिष्ट उद्देश्य से हुआ है: ईश्वर ने इस्राएल को चुना, याकूब के वंश को शपथ के साथ पहचान कर उन्हें अपना भागीदार बनाया, और मिस्र देश के समय में अपनी उपस्थिति और स्वामित्व का उद्घोष किया। यह बयान न केवल राजनीतिक-ऐतिहासिक घटनाओं को बल्कि परमेश्वर के निवेदन और वचन की विश्वसनीयता को दर्शाता है: मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यहोवा का यह चयन और शपथ, पवित्र इतिहास की धुरी है। यह संभावना है कि यह पंक्तियाँ ईसराइल के पूर्व-रेखा के बारे में एक स्मरण-कर्ता के रूप में कही गईं, ताकि वे यह समझ सकें कि ईश्वर ने किन कारणों से उनके साथ अनुबंध किया। मिस्र देश में रहते हुएGod का उद्घोष—यह संकेत देता है कि चयन केवल पारिवारिक या भू-स्वार्थी नहीं था, बल्कि एक दिव्य योजना के साथ जुड़ा है जिसमें चमत्कार, निकाह और प्रतिज्ञा शामिल है।
व्याख्या के मुख्य बिंदु
कैसे पढ़ें — निर्गत पाठ से संबंध
यहेसकेल के पाठ में यह विश्वास दिया गया है कि ईश्वर का चयन इतिहास-निर्माता है: एक समुदाय के रूप में वे प्रभु से पहचान और सुरक्षा पाते हैं, और यह पहचान उनके राष्ट्र के दायित्वों को भी निर्धारित करती है। नतीजा यह है कि अगुवाई और दायित्व, दोनों मिलकर ईश्वर के ईमान और वाचा की पुष्टि करते हैं।
संदर्भ-गत संबंध (3 छोटे cross-references के साथ)
संक्षिप्त निष्कर्ष और व्यावहारिक अनुप्रयोग
यहेजकेल 20:5 हमें स्मरण करवाता है कि ईश्वर ने एक चुने हुए लोगों के इतिहास को खोला—न कि केवल उनके व्यवसाय, परंतु उनके जीवन-यात्रा के हर कदम में उनका संरक्षक और पथ-रहनुमा बना। हमारे जीवन में भी यह सच है: हमारे चयन और बुलाहट का उद्देश्य हमारा परमेश्वर के साथ स्थिर और जीवंत संबंध है। राहत और सुरक्षा के लिये ईश्वर की वाचा पर निर्भर रहें।
टीका-उद्धरण (सम्पूर्ण प्रभाव) और नोट्स
इस पंक्ति के साथ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke ने अपने-अपने व्याख्यान में यह उद्धृत किया है कि परमेश्वर का चयन और शपथ एक दिव्य योजना का भाग है, जो राष्ट्र को आशीर्वाद और जिम्मेदारी दोनों देता है। यदि आप उनके शब्दों से कोई छोटा उद्धरण देखेंगे, वह यहाँ संक्षेप में रखा गया है: “मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ”—यह ईश्वर के निजी सुरक्षा-विश्वास के रूप में बार-बार उद्घोषित होता है।
नोट: उद्धृत टिप्पणीकारों के लिए छोटा संदर्भ
यह टेक्स्ट Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के हस्तलेख-प्रकार के विचारों से प्रेरित एक समेकित अवलोकन है, जिसमें उनके विश्लेषण की संक्षिप्त झलकें एकत्र की गई हैं।