Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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यहेजकेल 20:25 पर विचार: अस्वीकार्य नियमों के कारण जीवन का खतरा
यह पद यह संकेत देता है कि परमेश्वर ने इस्राइलियों के लिये ऐसी-ऐसी विधियाँ और रीति-रिवाज निर्धारित किए जो उनकी आत्मा को जीवन में बाधित करतीं। यह उद्धार के मार्ग के विपरीत नहीं बल्कि प्रशिक्षण की कड़ी के रूप में समझना चाहिए: वे जो अपने दिल से परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप जीवन जीने के बजाय मानवीय परम्पराओं और आध्यात्मिक कठोरताओं में फँस जाते हैं, वे सचमुच जीवित रहने से दूर रहते हैं। सरल भाषा में कहा जाए, तो ज्ञान और आस्ति-भक्ति के बीच संतुलन बनाते हुए परमेश्वर उनके लिये ऐसे नियम स्थापित करते हैं जिनसे उनका सामान्य जीवन और आशीषें बाधित हों।
मूल प्रसंग की समझ
यहोशफरत के समय से पहले यहेजकेल के बारे में यह कथन दिखाता है कि क्यों यहूदियों के लिये रवैया और नियमों में सुधार आवश्यक था। इस समय कैदखाने के बाहर की दुनिया में बसे नीति-नियम और सार्वजनिक धर्म से लोग आत्मिक रूप से निर्जीव बनते जा रहे थे; परमेश्वर ने संकेत दिया कि किन विधियों के कारण वे जीवित रहते हैं और किनके कारण वे मरते रहते हैं। यह आत्मिक अवनति के खिलाफ चेतावनी है: परंपराओं का पालन तब तक सही है जब वह परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप हो।
मुख्य संदेश
बाइबल से जुड़े छह बिंदु
नीचे के विषय परमेश्वर के नियमों के सही मोल और उनके समेकन पर रोशनी डालते हैं:
15 विशेष cross-references (संक्षिप्त व्याख्या)
इन संदर्भों के माध्यम से आप यह समझ पाएँगे कि withering धर्म और जीवन के कदम कैसे जुड़ते हैं:
व्यावहारिक पालन-योग्य पाठ
यह अनुभवी पथ हमें कैसे प्रेरित करे:
देवotional reflection
परमेश्वर ने नियम दिए ताकि उनका चयनित समुदाय सुरक्षित रहे और निर्भय बनकर जीवन जी सके। जब हम नियमों को केवल बाहर से पकड़ लेते हैं, जीवन रुक जाता है; पर यदि हम दिल से उसकी इच्छा को मानते हैं, तो रीति-रिवाज भी जीवन का स्रोत बन जाते हैं। यहेजकेल के समय से आज भी यहनिष्ठा और प्रेम के साथ की गई आस्था ही वास्तविक जीवन देती है।
उद्धृत विचार-रेखाएँ: इस पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के मूल भाजपा-रचना से प्रबंधित टिप्पणियाँ उपकरण के रूप में संकलित हैं। नीचे उनके संक्षिप्त मानक उद्धरण मिलते हैं:
Matthew Henry: “God’s ways and His statutes are to be observed with the heart, not merely with the hand.”
Albert Barnes: “Where the form of worship is empty, the life of religion decays; therefore, true worship is a harmony of duty and devotion.”
Adam Clarke: “Religion consists not in numerous laws, but in a sincere obedience to the will of God.”