Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहोवा के विरुद्ध मिथ्या अनुष्ठान के परिणाम (यहेजकेल 20:26)
इस व Verse में यहोवा यह स्पष्ट करता है कि उन्होंने क्यों इस्राइल के लोगों के लिए पवित्रताओं और त्याग-चिह्नों में कठोर पूजा-निर्देश दिए। इस्राइल के पुत्रों पर परमेश्वर ने अपने नियमों के अनुसार एक-एक प्रथा की जाँच की, ताकि वे जान लें कि मैं यहोवा हूँ। यह संदर्भ प्रेषित करता है कि परमेश्वर अपनी महिमा के लिए कर्मों की शुद्धता और आचरण की पवित्रता चाहता है, न कि एक-एक बाह्य रीति-रिवाज का उल्लंघन कर केवल दिखावे के लिए offerings भेजना।
केंद्रीय अर्थ
यह वाक्य एक चेतावनी और निष्कासन-चर्चा का संयोजन है। परमेश्वर ने चरम मामलों में मिथ्या और अशुद्ध उपायों से दायित्व निभाने के परिणाम दिखाए—न कि केवल बाह्य धर्म के कारण, बल्कि हृदय-समर्पण और प्रस्तुतिकरण में पूर्ण योग्यता की आवश्यकता। जब वे अपने पहलौठों को आग में होम करने लगे, तो यह एक तरह का संकेतन है कि त्याग-आहुति के साथ भी उनका हृदय कहाँ है। परमेश्वर अपने लोगों को यह सिखाते हैं कि वास्तविक भेंट वही है जो हृदय से निकल कर विश्वास-आचरण में परिणत हो।
मुख्य थीम
संबद्ध पदों के सम्बद्ध संदर्भ
1) यहेजकेल 18:21-23 — परमेश्वर कहता है कि न्याय और पाप के मापदंड स्थिर हैं; अंतर्मन की सच्चाई से ही भेंट स्वीकार होगी।
2) रोम 12:1 — मन-व्यवहार को युक्त करने के लिए समर्पण की वास्तविकता; शरीर को जीवित बलिदान की कल्पना से प्रस्तुत करें।
3) मत्ती 15:8-9 — बाह्य रीति-रिवाजों के पीछे के हृदय की निष्क्रियता की आलोचना; परमेश्वर के पास सत्य worship आवश्यक है।
व्यावहारिक विचार
हम आज भी यह देखेंगे कि हमारी प्रेरणा किन कारणों से क्रिया-कलाप में उभरती है। धार्मिक कार्यक्रम, दान और पूजा-सामग्री कितने भी उत्तम क्यों न हों, यदि हमारा हृदय ठिकाने और नम्रता से भरा नहीं, तो वे अक्सर खाली दिखेंगे। यदि हम अपने जीवन में यहोवा के नियमों के अनुरूप व्यवहार को प्राथमिकता दें—यानी प्रेम, दया, न्याय और विश्वास—तो हमारी भेंट सचमुच स्वीकारयोग्य बनती है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहेजकेल 20:26 एक चेतावनी और प्रेरणा दोनों है: बाह्य परिशुद्धता के भीतर यदि हृदय और आचरण शुद्ध न हों, तो पवित्रता की आहuti भी निरर्थक हो जाती है। परमेश्वर चाहते हैं कि हम अपनी भेंटों के पीछे की आस्था और पुनर्निर्माण को उन्नत करें, ताकि वे सत्य में स्वीकार हों और यहोवा के नाम की महिमा पर खरे उतरें।