Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 20:43 पर हिन्दी टीका
इस वचन में परमेश्वर यह कह रहे हैं कि जब तुम अपने पुराने रास्तों की याद करते हो, तुम्हें अपनी चालचलन और हर ऐसे कर्म की स्मृति हो जाएगी जिसने तुम्हें अशुद्ध किया है। यह दर्शन यह दर्शाता है कि पाप के भीतर न रहे हुए भी स्मृतियाँ और आचरण हमारे जीवन के लिए निर्णायक परिणाम रखते हैं। यह वाक्य चेतावनी देता है कि पापी इतिहास की याद से हमारी दृष्टि में घिनौनी बन जाती है और यह नयी दिशा की आवश्यकता पर बल देता है।
पठ के भीतर विचार
यहोशू-यातना के समय के बाद यह यहेजकेल का संदेश है कि तू अपने पापों की स्मृति से बच नहीं सकता; बल्कि जो कुछ भी अशुद्ध बना है, उसे पहचानना और तोड़ना आवश्यक है। यहाँ स्मरण और घिनौना ठहरना एक नैतिक शासन के रूप में प्रस्तुत है: पूर्व के रास्ते अभी भी आत्मा के समक्ष खुली परीक्षा हैं। यह प्रेरित करता है कि मनुष्य अपने पुराने आचरण के प्रभाव को पहचानकर नई चाल पर चले।
मुख्य शिक्षण
अनुग्रह-तुलन (Cross-references)
1) यरिमीया 31:19 — पाप के बाद सचेत पछतावा और परिवर्तन की ज़रूरत पर बल देता है कि पछतावा सचे दिल से हो और परिणामस्वरूप पुनः भरोसेमन्द चाल बने।
2) रोमियों 6:21 — पुराने कर्मों के फलों की शुद्धता दिखाती है कि जिस जीवन में पाप के फलों थे, वे अब निरर्थक लगते हैं जब हम नया जीवन ग्रहण करते हैं।
3) पवित्रता के लिए पृष्ठभूमि: यह वचन यह संकेत करता है कि पूर्व राहों की स्मृति से सतर्क रहना आवश्यक है, ताकि नए मार्ग में स्थिरता बनी रहे।
व्यावहारिक लागूकरण
- अपने पिछले पाप-आचरण पर सचेत दृष्टि रखें और उनकी जगह सकारात्मक आचरण स्थापित करें।
- रोजमर्रा की भावना-यात्रा में नयी नैतिक दिशा बनाएं: ईमानदारी, दया, और पवित्रता को केंद्र में रखें।
- आत्म-निगरानी के अभ्यास: प्रार्थना, पवित्रशास्त्र के अध्ययन और मित्र-समुदाय के साथ स्मृतियों को साझा कर परिवर्तन की दिशा मजबूत करें।
संक्षेप में
यहवीचे संकेत देता है कि अतीत के अशुद्ध आचरणों की स्मृति हमें न केवल प्रशिक्षित करती है बल्कि यह चेतावनी भी है कि हम क्या बन चुके हैं और क्या बनने जा रहे हैं। सही ढंग से समझकर, हम अपने जीवन-मार्ग को शुद्ध रखने और परमेश्वर के मानक के अनुरूप चलने की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
ऐतिहासिक टीका से संकलित छोटे उद्धरण: “जहाँ तुम अपनी चालचलन और अपने सब कामों को जिनके करने से तुम अशुद्ध हुए हो स्मरण करोगे” (यही संदेश बड़े पवित्र लेखकhod के अनुरूप है; बीच के भावों को ध्यान से पढ़ना चाहिए।) (केवल संदर्भ के लिए, नीचे वर्गीकृत उद्धरण संकेत दिए गए हैं)
अनुवाद-टिप्पणियाँ: यह पंक्ति HINIRV अनुवाद के अनुरूप है और बताती है कि पाप के पीछे हमारे आचरण की स्मृतियाँ भी समय के साथ चित्रित होती हैं, जिससे हमारी दृष्टि घिनौनी बन जाती है जब तक हम सचेत उत्तर देता नहीं।