Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 20:41 — Immediate setting और समझ
यहेजकेल 20:41 में परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों के लिए एक नए चरण की घोषणा करते हैं। वह बताता है कि अपने folk को वे देश-देश से एकत्र कर रहा है, ताकि वे उनके लिए एक सुगन्ध की तरह ठहरें और अन्यजातियों के सामने पाक-साफ, पवित्र ठहरें। यह क्षण, जहाँ दाऊदीय संघर्षों के बीच भी ईश्वर का नियोजन निरस्त नहीं होता, उनके पवित्र दायरे के पुनःस्थापन की पुष्टि है।
ईश्वर का ध्येय और Faith के साथ जुड़ाव
इस वाक्य में ईश्वर की एक ठोस प्रेरणा दिखती है: देश-देश के लोगों से एकत्र करना, अर्थात् प्रकाशित सभा की एक पुनर्स्थापना। यह ठहराव “सुगन्ध” के रूप में जाना जाएगा—यानी ईश्वर के सामने प्रशंसनीय, वासना से परे एक सुवासित अनुभव। यह संकेत देता है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ टूट-फूट को पाटना चाहता है, उनके व्यक्तित्व को पवित्रता के वातावरण में विकसित करना चाहता है, ताकि वे अन्यजातियों के बीच भी उसकी महानता को साफ-साफ दिखा सकें।
महत्वपूर्ण शब्दों और imagery की व्याख्या
अन्य प्रासंगिक उद्धरण और संरेखण
नीचे दिए गए क्रॉस-रेफरेंसेज़ इस विचार का समर्थन करते हैं कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए एक नई, पवित्र स्थिति बनाते हैं:
पवित्र इतिहास से संरेखण: पवित्रता और समुदाय
इस मार्ग पर, ה और ईश्वर के दायित्व स्पष्ट हैं: एक ऐसे समुदाय की रचना, जो उनके नाम से पहचानी जाए। यह दृश्य बंधन और आजीवन प्रतिबद्धता की याद दिलाता है—कि पवित्रता केवल व्यक्तिगत आस्था नहीं, बल्कि एक समुदाय का आशीर्वाद और सेवा है।
आज के लिए अनुप्रयोग
- व्यक्तिगत प्रतिबद्धता: अपने जीवन के हर क्षेत्र में ईश्वर के सामने एक सुगन्ध बनना—उत्तम चरित्र, सत्यता, और प्रेम से भरा जीवन।
- समुदाय की भूमिका: चर्च-समाज के रूप में एक ऐसी पहचान बनाएं जो बाहरवालों के लिए आकर्षण का केंद्र हो, ताकि वे यह देख सकें कि ईश्वर कौन है।
- दायित्वपूर्ण संघ: दूसरे पर्यpreferred संदर्भों में दिए गए विचारों से प्रेरणा लें कि कैसे हम मिलकर एक पवित्र और स्वागतयोग्य समुदाय बना सकते हैं।
फुटनोट: क्लासिक टिप्पणी से संकेत
जिन प्रसिद्ध पवित्र-ग्रंथ टिप्पणीकारों ने जैविक रूप से इस प्रकार के उद्धरणों को समझाने की कोशिश की है, उन्होंने कहा है कि यह उद्धरण प्रेरक है कि ईश्वर अपने लोगों के साथ पुनर्मिलन के समय एक नई सुवास और पवित्रता को ग्रहण करते हैं। यह विचार 1) ईश्वर की इच्छा के साथ सामंजस्य और 2) सामाजिक-धर्म की नई संरचना दोनों पर बल देता है।