यशायाह 63:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

हे यहोवा, तू क्यों हमको अपने मार्गों से भटका देता, और हमारे मन ऐसे कठोर करता है कि हम तेरा भय नहीं मानते? अपने दास, अपने निज भाग के गोत्रों के निमित्त लौट आ।

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यशायाह 63:17 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 63:17 पर टिप्पणी — मार्ग कैसे लौटें?

यह आयत उन विपत्तियों के बीच उठती है जब लोग यशायाह की बातों और परमेश्वर के मार्ग से भटक जाते हैं, फिर अपने पथ में कठोर हो जाते हैं। पाठक को यह याद दिलाती है कि परमेश्वर का उद्देश्य मानव को लौटना और भय मानना है, न कि उसे कठोर बनाकर उससे दूर रखना। यह वचन शांतिपूर्ण भय, संकल्प और दयालु पुनःस्थापन के बीच का केंद्र बिंदु बनता है।

परिप्रेक्ष्य और वास्तविक संदेश

63:17–हिस्सा पुराने नियम की एक ऐसी पुकार है जिसमें यहोवा के लोग अपने ही मार्ग से भटक जाते हैं और उनके हृदय कठोर हो जाते हैं, परन्तु दयालु रूप से वे पुनः लौटने की विनती करते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर अपने लोगों को रोककर उन्हें सुधारने की कोशिश करते हैं, ताकि वे भयपूर्वक उसका सम्मान करें और उसकी उपस्थिति में अहिंकार छोड़ दें। यह संदेश उद्धारक के सामने भी एक सामान्य मानवीय अनुभव को प्रकट करता है—हम में से कितनी बार भय और नैतिक संकुचितता के कारण परमेश्वर की राह से दूर हो जाते हैं, परन्तु वह प्रेम से बुलाकर वापस बुलाते हैं।

मुख्य विचार

  • मानव ढुलमुलता बनाम प्रभु के मार्ग पर वापसी का आग्रह।
  • हृदय की कठोरता का परिणाम और भय-आधारित धार्मिक जीवन की कमी।
  • निज दासत्व और भाग-गोत्रों के लिए लौटना—परमेश्वर का प्रेम और निर्वाण।

महत्वपूर्ण पाठक-वाक्य विचार

यह आयत धर्म-संकट के समय आत्म-चिंतन का आह्वान है। जब मानव अपने अहंकार या निजी हितों के कारण परमेश्वर के मार्ग से भटकता है, तब भी संभावना है कि वह अपनी भटकी राह छोड़कर लौट आए। यह उद्धार के आश्वासन की ओर एक मोड़ है: परमेश्वर चाहते हैं कि हम भय मानें, न कि भय से मुक्त होकर दम घुटे हुए रहते हुए व्यवहार करें।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संकेतित संदर्भों के साथ संक्षिप्त स्पष्टीकरण)

1) रोमियों 11:30–32 — परमेश्वर के लोग पहले अविश्वास में थे, फिर वह दया के कारण लौट आए, और धैर्यपूर्वक अन्यों के लिए भी यही हेतु है। यह आयत दर्शाती है कि भटकाव के बाद भी पुनः आगमन संभव है।

2) यह का 55:6–7 — भगोड़े को पुकार: यहोवा को ढूंढ़ो, और वह मिल सकता है; लौट आओ, ताकि वो अतिशय दया दिखाए। यह संयोजन आत्म-उत्पादन बनाम परमेश्वर की कृपा का संदेश देता है।

3) हबकूक 3:2 — प्रभु के चमत्कार और अपने महिमामय काम के स्मरण से भय और विश्वास के साथ पुनः स्थिर होना। यह दिखाता है कि भय के साथ भी विश्वास के साथ लौटना संभव है।

शब्दार्थ और प्रचलित चिंता

“मार्गों से भटकना” का अर्थ है परमेश्वर की सढ़ानों से दूर जाना, व्यक्तिगत इच्छाओं के पीछे न चलना। “हमारा मन कठोर करना” दर्शाता है कि कठोर निर्णय और आत्म-स्वार्थ से धार्मिक जीवन सूना हो सकता है। इस verse में दयालु पुकार है—“अपने दास, अपने निज भाग के गोत्रों के निमित्त लौट आ”—यानी परमेश्वर अपने चयनित लोगों के लिए पुनः प्रवेश और आशीर्वाद का मार्ग खोलते हैं।

संक्षिप्त प्रचार-सार

यशायाह 63:17 हमें याद दिलाता है कि मार्ग से भटकना मानव की सामान्य हालत है, पर परमेश्वर का उद्देश्य है कि हम बिना देरी के लौटें और भय से नहीं, श्रद्धा और प्रेम से उसका भय मानें। यह उद्धार और नवीनीकरण का बुलावा है—अपने दास के रूप में लौटना, ताकि परमेश्वर की उपस्थिति हमें स्वतंत्र और जीवंत बनाएं।

एक छोटा devotional विचार

अपने मार्ग से भटक जाने पर भी परमेश्वर की पुकार सुनें; उसका दयालु बुलावा है—तुरंत लौटें और अपने भीतर भय के बजाय श्रद्धा और विश्वास को कायम रखें। यह कदम न केवल रिश्ते को पुनःस्थापित करता है बल्कि हमारे दैनिक जीवन में सत्य के मार्ग पर चलने की नई प्रेरणा देता है।

हेतुक उद्धरण (वेल्यूएशन)

अगर आप चाहें तो नीचे उद्धारकर्ता-स्तर के टिप्पणीकारों के सार को ध्यान में रखकर तीन प्रवाहों की एक संयुक्त दृष्टि बन सकती है: एक तरफ़ ऐन-हेरि की भाषा-शैली में यथार्थ विवेचना, दूसरी तरफ़ ऐल्बर्ट बार्न्स के सरल व्यवहारिक बोध, और तीसरी तरफ़ एडम क्लार्क की स्पष्ट नियम-आधारित दृष्टि।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 63:17 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“उसने उनकी आँखें अंधी, और उनका मन कठोर किया है; कहीं ऐसा न हो, कि आँखों से देखें, और मन से समझें, और फिरें, और मैं उन्हें चंगा करूँ।” (यशा. 6:10)

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यहेजकेल 14:7 (HINIRV) »
क्योंकि इस्राएल के घराने में से और उसके बीच रहनेवाले परदेशियों में से भी कोई क्यों न हो, जो मेरे पीछे हो लेना छोड़कर अपनी मूर्तियाँ अपने मन में स्थापित करे, और अपने अधर्म की ठोकर अपने सामने रखे, और तब मुझसे अपनी कोई बात पूछने के लिये भविष्यद्वक्ता के पास आए, तो उसको मैं यहोवा आप ही उत्तर दूँगा।

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यशायाह 6:10 (HINIRV) »
तू इन लोगों के मन को मोटे* और उनके कानों को भारी कर, और उनकी आँखों को बन्द कर; ऐसा न हो कि वे आँखों से देखें, और कानों से सुनें, और मन से बूझें, और मन फिराएँ और चंगे हो जाएँ।” (मत्ती 13:15, यूह. 12:40, प्रेरि. 28:26,27, रोम. 11:8)

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