यशायाह 63:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तेरा पहरावा क्यों लाल है? और क्या कारण है कि तेरे वस्त्र हौद में दाख रौंदनेवाले के समान हैं?

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यशायाह 63:2 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 63:2 — इस दागी पहरावे का अर्थ

यह पद उस दृश्य को सामने लाता है जिसमें ईश्वर के उद्धारकर्ता की सामर्थ्य और शुद्धता की तुलना में उसके पहनावे का तेज कैसे उजागर होता है। तेरा पहरावा लाल है—यह बुलाहट देता है कि उद्धारकर्ता को ऐसे घोर संघर्षों से होकर गुजरना हुआ है जिसमें रक्त का धब्बा बनता है। वस्त्र हौद में दाख रौंदनेवाले के समान हैं—यानी वह विजयी जीत के साथ आता है, जैसे युद्धभूमि पर खून से भीगा वस्त्र गिरे नहीं, बल्कि दिग्भ्रमित वातावरण को बदल दे। यह चित्र उस दमन और न्याय के मेल को दर्शाता है जो परमेश्वर के कर्तव्य-भाव और उद्धार के मिशन को साथ लेकर चलता है।

पार्श्व-प्रसंग और मूल संदेश

यशायाह 63 अध्याय में यीशु के आ जाने से जुड़ी प्रतीक्षा और उसकी मिशन-यात्रा का पृष्ठ उभरता है। इस पद में नबी ने परमेश्वर के एक ऐसे रवैये की कल्पना दी है जो पाप के खिलाफ न्यायसंगत कठोरता और कृपा-उद्धार दोनों को एक साथ धारण करता है। “तेरा पहरावा लाल है” से संकेत मिलता है कि उद्धारकर्ता को ऐसी पीड़ा और संघर्षों से होकर गुजरना पड़ा जो उसकी पवित्रता और निष्पक्षता को रौंद नहीं देती, बल्कि उसे पूर्ण रूप से प्रेरित करती है। “तेरे वस्त्र हौद में दाख रौंदनेवाले के समान हैं” से यह समझ आता है कि वह विजयी सत्ता के साथ आता है, और यह विजय कर्तव्य-निष्ठा से की गई मर्मभेदक विद्यमानता है।

मुख्य विचार

  • पाप के दंश के विरुद्ध न्याय और उद्धार का एकीकृत कार्य।
  • पवित्र उद्धारकर्ता का संघर्ष-संस्कृत आना और उसकी धारणाओं में शक्ति का पूर्ण प्राधान्य।
  • तीव्र पाप-विरोधी क्रिया और दयाभाव के साथ उद्धार का लक्ष्य स्पष्ट होता है।

संबद्ध ख्रीष्ट-विश्वास के बोध

यह पद मसीह के आनी के उद्देश्य को चित्रित करता है—ईश्वर के पवित्र न्याय के साथ हमारे उद्धार के लिए मानवीय पीड़ा की आवश्यकता। इसे पढ़ते समय हमें समझ आता है कि परमेश्वर प्रत्यक्ष तौर पर पाप के जवाबदेह हैं, पर वह दया और क्षमा के साथ भी हमारे बीच है।

क्रॉस-रेफरेंस और संक्षेप टिप्पणी

- ईश 53:3–5: द्रवित करने वाली पीड़ा के माध्यम से उद्धार की राह। यह याद दिलाता है कि पापपरक दमन के विरुद्ध परमेश्वर की योजना पीड़ा को भी उद्धार के साक्ष्य में बदल देती है।

- मिसाल 20:29: युवा पंथ का तेज करने वाला अनुभव—युवा युद्घ और शक्ति का प्रतीकात्मक चित्र।

- रोम 3:25–26: ईश्वर की उभरी हुई धार्मिकता और उद्धार की संतुलित धारणा—क्रूस पर नाटक के द्वारा गढ़ी गई सच्चाई।

शास्त्रीय संदर्भों से ऊँचाई

מער Matthew Henry कहते हैं: यह दृश्य उद्धारकर्ता के शारीरिक संघर्षों और नैतिक संघर्षों दोनों का चित्र है; उसकी रक्तवर्णी पहरावा पाप-नगरी पर विजय का प्रतीक है।

Albert Barnes का संकल्प है कि इस पहरावे का वर्णन यह दिखाता है कि परमेश्वर के क्रोध और दयाभाव एक साथ काम करते हैं—युद्धभूमि के रक्त-संक्रमण से भी उद्धार उज्जवल होता है।

Adam Clarke जोड़ते हैं: यह उद्धारकर्ता की शक्तिशाली उपस्थिति का वर्णन है जो न्यायपूर्ण दबाव के बीच भी दया और न्याय का संतुलन बनाये रखते हैं।

संक्षिप्त शब्दों में देवotional विचार

प्रिय पाठक, यह पद हमें यह याद दिलाता है कि उद्धार का मार्ग गहरा है—दर्द के सफर में भी ईश्वर की उपस्थिति है। जब हम अपने कमजोर क्षणों में उसकी रौशनी देखते हैं, तब हमारा विश्वास घटक नहीं बनता, बल्कि मजबूत होता है। हर कठिनाई के बाद विजय की गूँज है, और वह विजय हमारे लिए स्वतंत्र रूप से उपलब्ध है।

सूक्ष्म cross-refs with brief explanation

1) यशायाह 52:14 के साथ सभ्यता-योग: पराक्रमी के हिंसात्मक उन्नति को भी पवित्रता में परावर्तित किया गया।

2) वActs 1:11 के साथ आस्था की सेवा: उद्धारकर्ता की उपस्थिति और उसकी विजय का विश्व-यात्रा पर प्रभाव।

3) פילीप्पי 2:8–11: निम्न अवस्था से सर्वोच्च सम्मान तक के परिवर्तन का आचारण।

ध्यान दें: इस प्रेषण का लक्ष्य आपको प्रेरित करना है कि आप भी विश्वास के पथ पर ईश्वर के न्याय और दयां दोनों को स्वीकार करें, और उसकी पूर्ण विजय की प्रतीक्षा करें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 63:2 समानांतर पद और संबंधित वचन

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वह लहू में डुबोया हुआ वस्त्र पहने है, और उसका नाम ‘परमेश्‍वर का वचन’ है।

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जाति-जाति को मारने के लिये उसके मुँह से एक चोखी तलवार निकलती है, और वह लोहे का राजदण्ड लिए हुए उन पर राज्य करेगा, और वह सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के भयानक प्रकोप की जलजलाहट की मदिरा के कुण्ड में दाख रौंदेगा। (प्रका. 2:27)

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