यशायाह 63:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“मैंने तो अकेले ही हौद में दाखें रौंदी हैं*, और देश के लोगों में से किसी ने मेरा साथ नहीं दिया; हाँ, मैंने अपने क्रोध में आकर उन्हें रौंदा और जलकर उन्हें लताड़ा; उनके लहू के छींटे मेरे वस्त्रों पर पड़े हैं, इससे मेरा सारा पहरावा धब्बेदार हो गया है। (प्रका. 19:15, प्रका. 14:20)

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यशायाह 63:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 63:3 पर टिप्पणी

इस आयत का सरल अर्थ यह है: परमेश्वर अपने क्रोध में इतनी कठोरता से दमन करते हैं कि वह अकेले अपना प्रतिशोध निभाते हैं, बिना मानव सहयोग के। उसका उद्देश्य पाप के परिणामों को दिखाना और न्याय की आवश्यकता को स्पष्ट करना है; आगे यह उद्धार की आशा के साथ जुड़ता है कि परमेश्वर का शासन हिंसा से नहीं,कृपा और न्याय से चलता है।

प्रसंगिक पृष्ठभूमि

यशायाह का आगमन भाग यहूदियों के द़ूर बहिर्गमन के बाद के कठिन समय में आता है, जब वे बाबुल से लौटने के लिए उत्सुक थे, परन्तु पाप के कारण पृथ्वी पर दंड और उद्धार के संकेत एक साथ दिखते हैं। अध्याय 63 में प्रभु के क्रोध-रूप का वर्णन उस समय के धार्मिक-राजनैतिक संकट को रेखांकित करता है जब परमेश्वर अपने लोगो के पाप के लिए न्याय कर रहे हैं, और फिर भी उनकी करुणा की आवश्यकता भी बनी रहती है।

व्याख्यात्मक बिंदु

  • क्रोध का एकाकी दायित्व: “मैंने तो अकेले ही हौद में दाखें रौंदी हैं” से स्पष्ट होता है कि दंड की जिम्मेदारी परमेश्वर पर है, मानव भागीदारी नहीं। यह दृढ़ चेतावनी देता है कि पाप के दुष्परिणामों से बचना केवल दया के प्रकाश की ओर लौटकर संभव है।
  • जन-समुदाय की निष्ठुरता: “देश के लोगों में से किसी ने मेरा साथ नहीं दिया” से संकेत मिलता है कि समूह के भीतर विश्वासघात या निश्चयहीनता ने दंड को तीव्र किया। यह न्याय के साथ-साथ विश्वास-आस्था की ज़रूरत पर भी बल देता है—एकता और समर्पण के बिना उद्धार कुछ भी नहीं बदल सकता।
  • क्रोध और पवित्रता: “क्रोध में आकर उन्हें रौंदा और जलकर उन्हें लताड़ा” दिखाता है कि परमेश्वर की पवित्रता पाप के प्रति कठोर नहीं, बल्कि दृढ़ है। क्रोध नहीं, बल्कि न्याय का निष्पादन परमेश्वर के चरित्र का भाग है।

थीमैटिक सार

संदर्भ-क्रॉस-रेफरेंसे

  • प्रकाशकियाँ: प्रका. 19:15 - यह त्रुटिपूर्ण सैन्य-युद्ध के चित्रण में क्रोध की अधिकारिता को दिखाता है; यहाँ भी न्याय और शक्ति एक साथ प्रकट होती है।
  • प्रका. 14:20 - जो दंड के समय की तीव्रता को दर्शाता है, वह यह बताता है कि दंड की पराकाष्ठा भी कभी-कभी प्रार्थना और पुनःस्थापना के अवसर बन जाती है।
  • यशायाह 59:17 - भले ही यह आयत न्याय-परिधान के बारे में है, संदेश एक समान उर्जा देता है कि परमेश्वर का वेषधारी-न्याय और उद्धार एक साथ चलते हैं।

पाठ-व्यावहारिक सार

1) परमेश्वर के न्याय को समझना चाहिए, ताकि हम भय के साथ पाप से बच सकें। 2) आफ्नो समुदाय के साथ विश्वास-निष्ठा बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि एकजुटता ही उद्धार के मार्ग को साफ करता है। 3) हमारी परिस्थितियाँ चाहे कितनी कठिन हों, परमेश्वर की करुणा और धर्मनिष्ठता के साथ आशा बनी रहनी चाहिए।

पूर्ववर्ती टिप्पणीकारों के विचार (संক্ষेप)

Matthew Henry के अनुसार इस पद में परमेश्वर के क्रोध का दृढ़ और व्यापक आचरण उभरता है, परंतु उद्धार की आगही भी बनी रहती है। Albert Barnes इसे यह कहकर देखते हैं कि यह दंड की दृश्यता है, लेकिन परमेश्वर की पवित्रता और न्याय में दृढ़ता का प्रमाण है। Adam Clarke यह दर्शाते हैं कि यह चित्रण एक न्यायप्रिय शासन के क्रोध का प्रतीक है, जो पाप के परिणामों को स्पष्ट करता है।

इनमें से किसी भी टिप्पणीकार के स्वतः उद्धरण उपलब्ध हो सकें तो नीचे उल्लेख किया गया है:

“I have trodden the wine-press alone” — Matthew Henry से संक्षिप्त अर्थ-सूत्र। “He shall tread them in his anger, and trample them in his wrath” — Adam Clarke के शब्दों में न्याय का दृढ़ स्वर।

निष्कर्षतः, यह आयत परमेश्वर के न्याय और बंधनों से मुक्त होने के लिए उद्धार की अपेक्षा दिखाती है; भक्तों के लिए यह प्रेरणा है कि पाप के कारण दूर हटना आवश्यक है, और परमेश्वर की करुणा की खोज में आशा बनाये रखनी चाहिए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 63:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तब तुम दुष्टों को लताड़ डालोगे, अर्थात् मेरे उस ठहराए हुए दिन में वे तुम्हारे पाँवों के नीचे की राख बन जाएँगे, सेनाओं के यहोवा का यही वचन है।

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