Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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यशायाह 63:4 — बदला लेने का दिन और छुड़ाई का वर्ष
यह वचन क्यों मायने रखता है? यशायाह 63 अध्याय का यह भाग एक दिव्य क्रिया-कलाप का उद्घोष है जिसमें परमेश्वर की निष्ठा और उद्धार की योजना स्पष्ट Höगे। इसका संदेश आज भी आस्था को उर्जा देता है: परमेश्वर की ओर से अन्याय के विरुद्ध निर्णय लेने और अपने लोक के लिए पुनर्जीवन के समय की घोषणा। यह वचन यह बताता है कि किस प्रकार मुक्ति का दिन पवित्र प्रेरणा के साथ आकर मानव इतिहास में निर्णायक मोड़ बनता है।
पार्श्वभूमि और मूल संदर्भ
यशायाह 63 अध्याय में ईश्वर के उद्धारक कार्य का एक दृढ़, स्मरणीय चित्र मिलता है। यह भाग परमेश्वर के न्याय और करुणा के अंतःकरण का मिश्रण प्रस्तुत करता है: प्रभु बदला लेने से पूर्व अपने लोग को उद्धार की राह में लाते हैं। इस पृथक् दिन का वर्णन समाज के दायित्वों, दुष्कर्मों के परिणामों और परमेश्वर की दूरगामी मुक्ति योजना की प्रेरणा देता है। यहाँ “वर्ष” का उल्लेख उद्धार के सभी समारोहों—यथा मुक्तिदायिनी वर्ष—की याद दिलाता है, जो यहूदी हर साल गढ़ते थे।
मुख्य संदेश
इस Verse का केंद्रीय कथन है कि प्रभु की कुवत और न्याय एक साथ चलते हैं। बदला लेने का दिन मेरे मन में है और मेरी छुड़ाई हुई प्रजा का वर्ष आ पहुँचा है—यानी परमेश्वर एक निर्णायक समय में उठकर अपनी प्रजा को मुक्त करने जा रहे हैं। यह वक्तदान नहीं, बल्कि कृपा-युग का उद्घोष है जिसमें दासत्व और पाप के बन्धन टूटते हैं। साथ ही यह यहूदियों की ऐतिहासिक स्मृति से जुड़कर एक भविष्यवाणी-सी लगती है कि उद्धार का दिन संभव है और वह आयेगा।
क्रूस-टिप्पणियाँ और संगत विषय
- न्याय के साथ करुणा: परमेश्वर अपने लोगों के लिये दया भी दिखाते हैं और अन्याय के विरुद्ध निर्णय लेते हैं।
- उद्धार का वर्ष: यह एक सामूहिक उत्सव और परिवर्तन की प्रतीकशाला है—नये आरम्भ, दास्यता से छुटकारा।
कुछ उपयोगी क्रॉस-रेफरेंस
ये संदर्भ समकालीन दृष्टान्त देते हैं कि मुक्ति केवल निजी राहत नहीं, बल्कि सामाजिक-आध्यात्मिक परिवर्तन का संकल्प है।
पश्चात्ताप-आशय और प्रेरित विचार
यशायाह के इन शब्दों में एक ईमानदार प्रश्न है: क्या मैं उस उद्धार-युग के लिए अपनी मानसिक और नैतिक स्थिरता को बदल रहा हूँ? क्या मैं परमेश्वर के न्याय और दया के संतुलन को अपनी जीवन-चाल में देख सकता हूँ? इस दृष्टि से यह वचन एक जागृति देता है: यदि उद्धार आ रहा है, तो मेरी आस्था और मेरे व्यवहार दोनों में परिवर्तन आवश्यक है।
सूक्ष्म टिप्पणी (संदर्भ-आधार)
यहाँMatthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के साथ संयोजन की एक संक्षिप्त, संतुलित धारणाओं का सार प्रस्तुत किया गया है—
- Henry के अनुसार यह दिव्य निर्णय का दिन है जिसमें उद्धार का युग शुरू होता है।
- Barnes इस काल-रूप को प्रभु की व्यवस्था के साथ जोड़ते हैं, जहाँ न्याय और उद्धार एक साथ चलते हैं।
- Clarke मानते हैं कि यह भाषा परमेश्वर की क्रुद्ध-निस्सारता नहीं, बल्कि कृपापूर्ण उद्धार की योजनाबद्धता का अभिव्यक्ति है।
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त्वरित devotional reflection
परमेश्वर के उद्धार के दिन का विचार आत्मा को आशा और आस्था से भर देता है कि अंधकार के बावजूद प्रकाश और बंधनों के पीछे स्वतंत्रता के संकेत हैं। आज के दिन भी हमें स्मरण रखना चाहिए कि ईश्वर अपने लोगों के लिए एक नये वर्ष के साथ आ रहे हैं—जहाँ हर दिन नई कृपा, नई सच्चाई और नई स्वतंत्रता लेकर आता है।]