यशायाह 63:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

हाँ, मैंने अपने क्रोध में आकर देश-देश के लोगों को लताड़ा, अपनी जलजलाहट से मैंने उन्हें मतवाला कर दिया, और उनके लहू को भूमि पर बहा दिया।” अनुग्रह का स्मरण

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यशायाह 63:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 63:6 पर टिप्पणी — क्रोध के प्रभाव और अनुग्रह की स्मृति

: यशायाह 63:6 में परमेश्वर अपने क्रोध के कारण देश-देश के लोगों को ताड़ रहा है, उनकी लहू-राग से भूमि को लाल कर रहा है और अपनी जलजलाहट से उन्हें मात देता है। यह एक गहन अभिव्यक्ति है कि परमेश्वर के क्रोध और न्याय का क्रियात्मक प्रमाण किस प्रकार इतिहास के घटनाक्रम में सामने आता है।

परमेश्वर और विश्वास के बारे में जो पाठ दिखाता है

यह वचन परमेश्वर की न्यायशीलता और पवित्रता को उजागर करता है। प्रभु का क्रोध तब भी पूरी तरह न्यायप्रिय रहता है जब वह अपने चयनों की रक्षा के लिए कठोर कदम उठाता है। साथ ही, यह स्मरण कराता है कि अनुग्रह और दया के क्षणों के पीछे भयावह सामर्थ्य भी स्थित है ताकि पाप के परिणाम दूर हों। साहित्यिक रूप से यह चित्रण एक युद्ध-यात्रा जैसा है, जहाँ ईश्वर की नीति और धर्मी निर्णयों से राष्ट्रों की दशा तय होती है।

महत्वपूर्ण शब्दों और छवियों की स्पष्टता

  • — परमेश्वर के पवित्र निदेश का परिणाम, जो पाप के विरुद्ध कठोर न्याय को दर्शाता है; वह प्रेम-न्याय के संतुलन का प्रमाण है।
  • — ईश्वर की प्रचंड पवित्रता और अग्निकथन जैसी शक्ति; नफरत और पाप पर विजय पाने की तीव्रता।
  • — युद्ध-यथार्थ में पाप के कारण होने वाले हताहतों का प्रतीक; दया की अपेक्षा में भी न्याय-चेतना बनी रहती है।

संबद्ध पाठ (cross-references) — संक्षिप्त प्रस्तुति

यशायाह 59:18–19 — पाप और उद्धार की नीति में ईश्वर के न्याय के चिन्ह। यह verse स्पष्ट करती है कि पाप के विरुद्ध क्रोध और उद्धार के उपाय एक साथ चलते हैं।

रोमियों 11:22 — प्रभु की कृपा के साथ न्याय की सुरक्षा; अगर हम उनका चमत्कारमय संरक्षण नहीं मानते, तो गिरावट संभव है।

यूहन्‍ना 3:36 — पिता के प्रत्यक्ष निर्णय के साथ विश्वास की ओर आने की आवश्यकता पर बल देता है, न्याय और अनुग्रह दोनों का संतुलन।

पढ़ने के लिए एकीकृत सार

63:6 यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर की क्षमा-नीति और दया-शक्ति के साथ न्याय की आवाज भी साथ-साथ चलती है। यह पाठ हमें याद दिलाता है कि देवदत्त अनुग्रह के साथ ही पाप के परिणामों से दूर रहने के लिए आस्तिक समुदाय को आत्म-निरीक्षण और नैतिक नवीकरण की आवश्यकता है। इस दृश्य में इतिहास की घटनाओं के साथ भविष्य की परिकल्पना भी जुड़ी है कि ईश्वर कब और कैसे राष्ट्रों के लिए निर्णय लेते हैं।

महत्वपूर्ण टिप्पणी स्रोतों के संक्षिप्त संकेत: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke का सार्वजनिक-डोमेन विचार यहाँ सारगर्भित रूप में समाहित है। उनके अनुसार यह वचन क्रोध और दया के बीच संतुलन को दर्शाता है—क्रोध तब होता है जब न्याय की आवश्यकता स्पष्ट हो जाती है; पर अनुग्रह की स्मृति वही है जो विश्वासियों को आशा देती है कि उद्धार संभव है।

चाहे जाने वाले पाठ्य-उद्धरणों का उल्लेख

यदि उपलब्ध हो, तो Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सीधे शब्द उद्धरण इस पंक्तियों में शामिल किए जाते हैं; यहाँ मौजूदा पाठ में केवल उनसे प्रेरित सार संकेतन प्रस्तुत है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 63:6 समानांतर पद और संबंधित वचन

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प्रकाशितवाक्य 14:10 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
प्रकाशितवाक्य 14:10 (HINIRV) »
तो वह परमेश्‍वर के प्रकोप की मदिरा जो बिना मिलावट के, उसके क्रोध के कटोरे में डाली गई है, पीएगा और पवित्र स्वर्गदूतों के सामने और मेम्‍ने के सामने आग और गन्धक की पीड़ा में पड़ेगा। (यशा. 51:17)

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प्रकाशितवाक्य 16:19 (HINIRV) »
इससे उस बड़े नगर के तीन टुकडे़ हो गए, और जाति-जाति के नगर गिर पड़े, और बड़े बाबेल का स्मरण परमेश्‍वर के यहाँ हुआ, कि वह अपने क्रोध की जलजलाहट की मदिरा उसे पिलाए।

यशायाह 49:26 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 49:26 (HINIRV) »
जो तुझ पर अंधेर करते हैं उनको मैं उन्हीं का माँस खिलाऊँगा, और, वे अपना लहू पीकर ऐसे मतवाले होंगे जैसे नये दाखमधु से होते हैं। तब सब प्राणी जान लेंगे कि तेरा उद्धारकर्ता यहोवा और तेरा छुड़ानेवाला, याकूब का शक्तिमान मैं ही हूँ।” (प्रका. 16:6)

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