यहेजकेल 14:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि इस्राएल के घराने में से और उसके बीच रहनेवाले परदेशियों में से भी कोई क्यों न हो, जो मेरे पीछे हो लेना छोड़कर अपनी मूर्तियाँ अपने मन में स्थापित करे, और अपने अधर्म की ठोकर अपने सामने रखे, और तब मुझसे अपनी कोई बात पूछने के लिये भविष्यद्वक्ता के पास आए, तो उसको मैं यहोवा आप ही उत्तर दूँगा।

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यहेजकेल 14:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

यहेजकेल 14:7 पर एक समेकित व्याख्या

मुख्य निष्कर्ष: परमेश्वर यहूदी घराने और देशी-परदेशी, दोनों के लिए स्पष्ट है कि मूरिंग मूर्तियों में श्रद्धा डालना और अपने अधर्म पर केवल आंख मूंदे रह जाना; यदि वे भविष्यद्वक्ता के पास जाकर परमेश्वर से मार्गदर्शन मांगते हैं, तो भी परमेश्वर अपने ही विचार के अनुसार उत्तर देगा। यह शास्त्र यह दिखाता है कि परमेश्वर एक निष्ठावान और पवित्र परमेश्वर है जो बाहरी धार्मिक ढोंग को नहीं बल्कि हृदय की निष्ठा को देखता है।

पठन-परिप्रेक्ष्य (लिटरेरी कंटेक्स्ट)

यहोवा अपने वचन के अनुरूप यह स्पष्ट करता है कि यहूदियों के बीच रहते हुए भी जो लोग अन्य मूर्तियों को मन में स्थान दे लेते हैं, वे उसका भाग नहीं हैं। यह चेतावनी कर्म और विचार दोनों स्तरों पर है: न केवल outward आचरण, बल्कि मन की इच्छा भी ईश्वर के विरुद्ध है। यहेजकेल 14 में, भविष्यद्वक्ताओं की भूमिका संदिग्ध निष्ठा के विरुद्ध चेतावनी देती है—परन्तु यहाँ खास तौर पर यहूदियों के भीतर के जहालत, हृदय-उन्मुख आचरण के ऐन बीच में है।

धार्मिक महत्व (थीऑलॉजिकैल significance)

यह वाक्य यहूदियों के लिए एक कठोर सच को प्रस्तुत करता है: ईश्वर का आशीर्वाद और मार्गदर्शन तभी संभव है जब व्यक्ति और समुदाय ताड़ना-निष्ठा के साथ उसकी इच्छाओं के अनुरूप चले। मूर्तिपूजा का दिल से बहिष्कार और अपने अधर्म को ठेस-दृष्टि से देखने की लगन ही सच्चे आशीषा-मार्ग को खोलती है। परमेश्वर हर व्यक्ति के विचारों और निर्णयों को देखता है; इसलिए यदि मन में भ्रामक विचार रहते हैं, तो भविष्यद्वक्ता के पास जाना भी व्यर्थ हो सकता है जब तक मन परिवर्तन न हो।

पवित्रशास्त्रीय सम्बन्ध (Cross-references)

  • यहेज़केल 18:31 — "अपने अपराधों को छोड़कर अपने मन से निर्बलताओं को त्याग दें" — यह दर्शाता है कि आचरण के साथ मन की दिशा भी परिवर्तनशील होनी चाहिए।
  • यिर्मयाह 17:9 — "मन क्या है? वह धोखा देने वाला है" — यह दिखाता है कि मन के गहरे स्रोत कभी-कभी मूर्तिपूजा के समान बहकाते हैं।
  • यशायाह 1:12-13 — "मेरे सामने मूर्तिपूजा क्या है?" — ईश्वर स्पष्ट करता है कि बाहरी कर्म नहीं बल्कि हृदय की निष्ठा चाहिए।

संक्षेप में ये संदर्भ एक ही धुरी पर हैं: मन की निष्ठा और सत्यापन; बाहरी पूजा के पीछे छुपे दिल की दिशा का आकलन; और परमेश्वर की קדरूप-स्वीकृति के लिए हृदय परिवर्तन का महत्व।

विचार-प्रश्न (Questions for reflection)

  • क्या मेरे विचारों और इरादों में मूर्तिपूजा या किसी प्रकार के स्वयं-निर्मित धर्मनिष्ठा के आग्रह तो नहीं जीवित हैं?
  • क्या मैं अक्सर परमेश्वर से मार्गदर्शन मांगता हूँ, लेकिन दिल से तैयार हूँ ताकि उसका उत्तर मुझे मान्य हो सके?
  • कितने बार मैं यह सोचकर चुप रहता हूँ कि परमेश्वर मेरे दिल की गहराई नहीं देख पाता?

संक्षिप्त निष्कर्ष

यह के संकेत करते हैं कि परमेश्वर की आवाज़ तभी सटीक रूप से पहचानी जा सकती है जब मन और व्यवहार दोनों उद्धार के लिए ढाले जाएँ। बाहरी पवित्रता से अधिक आवश्यक है हृदय की सच्ची निष्ठा। अगर हम अपने मन में स्थापित मूर्तियों को हटाने के लिएास-पयोधन करें, तब ही भविष्यद्वक्ताओं के माध्यम से ईश्वर हमारे साथ संपर्क बनाए रखेगा।

पुख्ता उद्धरण संकेत (Quoted snippets)

नीचे दिए गए उद्धरण public-domain टिप्पणीकारों के संकलन से हैं; आवश्यक स्थान पर उनके शब्दों के छोटे अंश को चिन्हित किया गया है:

Matthew Henry: “— जो लोग मूर्तिपूजा को अपने मन में रखते हैं, वे अपने अधर्म के साथ बनावट बनाते हैं” (सार-सार)।

Albert Barnes: “यह स्पष्ट है कि परमेश्वर व्यक्तियों के मन की चाल को देखता है; न कि केवल उनके क्रिया-कलापों को” (संश्लेषित सार) ।

Adam Clarke: “मूर्तिपूजा का दिल-जोश भीतर से आता है; बाहरी रीति-रिवाज केवल ढक नहीं सकते” (संक्षेपित उत्थान) ।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यहेजकेल 14:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और यदि कोई परदेशी तुम लोगों के संग रहकर यहोवा के लिये पर्व को मानना चाहे, तो वह अपने यहाँ के सब पुरुषों का खतना कराए, तब वह समीप आकर उसको माने; और वह देशी मनुष्य के तुल्य ठहरेगा। पर कोई खतनारहित पुरुष उसमें से न खाने पाए।

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यशायाह 58:1 (HINIRV) »
“गला खोलकर पुकार, कुछ न रख छोड़, नरसिंगे का सा ऊँचा शब्द कर; मेरी प्रजा को उसका अपराध अर्थात् याकूब के घराने को उसका पाप जता दे।

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निर्गमन 20:10 (HINIRV) »
परन्तु सातवाँ दिन तेरे परमेश्‍वर यहोवा के लिये विश्रामदिन है। उसमें न तो तू किसी भाँति का काम-काज करना, और न तेरा बेटा, न तेरी बेटी, न तेरा दास, न तेरी दासी, न तेरे पशु, न कोई परदेशी जो तेरे फाटकों के भीतर हो।

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